अलवर का कलाकंद विदेशों में भी मशहूर, कसूरी मेथी हर रसोई घर की जरूरत, श्रीगंगानगर के किन्नू के क्‍या कहने

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उदयपुर. राजस्थान के कई जिलों में बनने वाले कई उत्पादों को देश-विदेश में पसंद किया जाता है. चाहे अलवर का कलाकंद हो या खाने में स्वाद घोलने वाली कसूरी मेथी या फिर श्रीगंगानगर के किन्नू सभी बेहद मशहूर हैं. राजस्‍थान के ऐसे लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा उत्पाद और कलाओं को खासा पसंद किया जाता है. ऐसे में इन सभी को यदि जीआई टैग मिले तो, राजस्थान के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है.

राजस्थान के अलवर जिले की कलाकंद मिठाई के स्वाद को बहुत से लोग बेहद पसंद करते हैं. इसके अलावा नागौर जिले में उत्पादित की जाने वाली कसूरी मेथी हर रसोई की जरूरत है. साथ ही साथ श्रीगंगानगर जिले में किन्नू फल की पैदावार होती है, यह अपने अपने स्वाद के लिए देश-विदेश में मशहूर है. इसके अलावा नाथद्वारा में बनाई जाने वाली पिछवाई कला की पेंटिंग भी बेहद पसंद की जाती है, लेकिन अब तक इन सभी वस्तुओं को जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) नहीं मिला है. जबकि इन्हें जीआई टैग मिलने से राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ ही आर्थिक उन्नति होने की भी संभावना है.

जीआई टैग मिलना क्यों जरूरी?
जीआई टैग एक तरह का भौगोलिक संकेतक है. यह प्राकृतिक, निर्मित किए जाने वाले उत्पाद, हस्तशिल्प कला आदि को दिया जाता है. जो उस भौगोलिक क्षेत्र में बनने की पहचान होता है. यह टैग उन्हीं वस्तुओं को मिलता है जिनका एक विशेष इलाके में 10 सालों या उससे ज्यादा समय से निर्माण या उत्पादन किया जा रहा है. जीआई टैग लेने के लिए सरकार के डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड पर रजिस्ट्रेशन किया जाता है. फिर विभाग प्रक्रिया के आधार पर जीआई टैग देने का काम करता है. इसके मिलने से उत्पाद या हस्तशिल्प कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल जाती है, जिससे उसकी ब्रांडिंग में मदद मिलती है.

राजस्थान के इन उत्पादों को जीआई टैग मिलने की जरूरत
राजस्थान के उदयपुर में काष्ठ कला, मिनिएचर आर्ट, जल सांझी और केसरिया ग्रीन मार्बल को जीआई टैग मिलना चाहिए. इसके अलावा राजसमंद में नाथद्वारा के पिछवाई कला, नागौर में कसूरी मैथी और हैंड टूल्स, कोटा में कोटा स्टोन, सवाई माधोपुर में अमरूद और हैंडीक्राफ्ट, श्रीगंगानगर में देसी कपास की किस्म आरजी8, गंगा नगरी किन्नू और गेहूं की किस्म 1482, अलवर में कलाकंद, अजमेर में किशनगढ़ की प्रसिद्ध बणी-ठणी चित्रकारी, पाली का गुलाब हलवा, भीलवाड़ा का फड़ चित्र, बूंदी की बूंदी शैली चित्रकला को जीआई टैग मिलने की जरूरत है. जिससे कि राज्य को आर्थिक गति मिल सके.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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