
रामकुमार नायक/महासमुंद. हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार निर्जला एकादशी 31 मई को मनाई जा रही है. इसे भीमसेनी एकादशी के रूप में जाना जाता है. वहीं, साल की सभी एकादशी में से यह व्रत सबसे कठिन और शुभ फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे भाव से यह व्रत और दान पुण्य करता है. वह भगवान विष्णु की कृपा का पात्र बनता है.
महासमुंद के पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि एक बार सभी पांडव बैठे हुए थे. इसी समय कृष्ण भगवान से युधिष्ठिर ने निवेदन किया कि हे राघव हे माधव ऐसा कोई व्रत है क्या जिसे करने से जाने अनजाने में हुए पाप का निराकरण हो जाए और मुक्ति मिल जाए. भगवान कृष्ण ने कहा कि एकादशी व्रत जो हर पक्ष में आता है, वह बेहद खास है. महीने में दो एकादशी होती हैं, इसलिए 24 एकादशी एक वर्ष में बताई गई हैं. भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर व्रत रखने का उपाय बताया.
फिर भीम ने कही ये बात
मान्यता है है कि इसके बाद भीमसेन ने भगवान कृष्ण से कहा कि हे राघव मुझे बहुत भूख लगता है. मैं माह में दो दिन भी एकादशी का व्रत नहीं रख सकता. मेरे लिए कोई दूसरा उपाय बता दीजिए, तो भगवान कृष्ण ने कहा कि हे भीम यदि तुम 24 एकादशी का व्रत नहीं रख सकते हो तो ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को बिना खाए और बिना पानी पिए रह सकते हो तो तुमको साल भर की 24 एकादशी के व्रत का फल प्राप्त हो सकता है.
भगवान कृष्ण की सलाह के बाद इस व्रत को भीम ने जैसे तैसे रखा, लेकिन जैसे ही एकादशी निकली भीमसेन भूख के मारे बेहोश हो गए. फिर पूजा करके अपने व्रत को पूरा किया, तभी से इस दिन को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है. बता दें कि भगवान विष्णु को समर्पित निर्जला एकादशी व्रत हर साल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को रखा जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 31, 2023, 11:07 IST









