धोनी की CSK की कामयाबी का क्या है फॉर्मूला, कैसे 5वीं बार जीता खिताब, 3 बातों से समझिए चैंपियन बनने की कहानी

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हाइलाइट्स

CSK ने GT को हराकर पांचवीं बार आईपीएल का खिताब जीता
पिछले सीजन में फिसड्डी रहने वाली CSK कैसे बनी चैंपियन?

नई दिल्ली. चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात टाइटंस को हराकर आईपीएल का पांचवीं बार खिताब जीता. इसके साथ ही धोनी की टीम मुंबई इंडियंस की बराबर पर आ खड़ी हुई. जब ये सीजन शुरू हुआ था, तो शायद ही किसी ने ये सोचा था कि चेन्नई सुपर किंग्स चैंपियन बन जाएगी. पिछले साल टीम 9वें स्थान पर रही थी. फिर ऐसा क्या हुआ कि जो टीम पिछले सीजन में फिसड्डी थी, वो चैंपियन बन गई. वो भी तब जब पूरा सीजन अनुभवहीन गेंदबाजों के साथ उतरी. चेन्नई सुपर किंग्स की कामयाबी का क्या है फॉर्मूला? कैसे सबको चौंकाते हुए माही ब्रिगेड ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया.

आईपीएल की बाकी फ्रेंचाइजी जहां नए खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ, डाटा और टेक्नोलॉजी पर जरूरत से ज्यादा जोर देती है. वहीं, चेन्नई सुपर किंग्स इससे जुदा है. यही इस टीम के सफल होने की सबसे बड़ी वजह है. बाकी टीमें मैच-अप्स, पावर हिटर्स, रिस्ट स्पिनर को ध्यान में रखते हुए प्लेइंग-XI तय करती है. लेकिन, चेन्नई का फंडा साफ है बेसिक्स ठीक रखो और जो खिलाड़ी चुने हैं, उन पर पूरी तरह यकीन बनाए रखो. इसी वजह से मौजूदा और पूर्व खिलाड़ी दोनों ही इस फ्रेंचाइजी की तारीफ करते नहीं थकते.

सीएसके में नतीजे से ज्यादा प्रोसेस पर ध्यान
चेन्नई सुपर किंग्स के चैंपियन बनने की पहली बड़ी वजह है, तैयारी पर पूरा फोकस. इसके लिए टीम का प्री सीजन कैंप लगता है. ट्रेनिंग सेशन इस तरह से प्लान किए जाते हैं ताकि मैच में उसका फायदा उठाया जा सके. पिछले सीज़न में ऐसी परिस्थितियों में संघर्ष करने के बाद, जो टीम की ताकत से पूरी तरह अलग थीं, सुपर किंग्स ने बहुत ज्यादा चिंता नहीं की. जबकि अधिकांश टीमें नीलामी में पूरी तरह से बदलाव के लिए गई. चेन्नई ने दो खिलाड़ियों – बेन स्टोक्स और अजिंक्य रहाणे को खरीदने के लिए चुना- जो संभावित रूप से प्लेइंग-XI में सीधे उतर सकते थे.

चेन्नई ने घर में अलग-अलग नेचर की पिच पर मैच खेले
इस बार आईपीएल होम और अवे फॉर्मेट पर खेला गया. यानी हर टीम के लिए बराबर फायदा और नुकसान. पर चेन्नई सुपर किंग्स बाकी टीमों से एक कदम आगे निकली और जोखिम लिया और घर में ऐसी पिचों पर मैच खेले, जो पहले के मुकाबले बिल्कुल अलग थीं. सामान्य तौर पर चेपॉक की पिच स्लो, लो रहती है और स्पिन गेंदबाजों को काफी मदद मिलती है. लेकिन, इस बार चेन्नई ने घरेलू मैच भी अलग-अलग सतह पर खेले. इससे टीम को घर से बाहर मुकाबले खेलने में आसानी हुई. इस बार सीएसके ने घर में सिर्फ 4 मैच ही जीते, जो सबसे कम है. लेकिन, घर के बाहर सीएसके को इसका फायदा हुआ.

खिलाड़ियों को खेलने की पूरी आजादी
चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल की शायद इकलौती ऐसी टीम है, जहां बहुत ज्यादा टीम मीटिंग, डाटा पर जोर नहीं दिया जाता है. खिलाड़ियों को अपना प्लान तैयार करने की पूरी आजादी है. ट्रेनिंग करना है या नहीं, वो भी खिलाड़ी ही तय करते हैं. इसके बावजूद शायद ही कभी ऐसा होता है कि कोई प्लेयर ट्रेनिंग सेशन मिस करता है. यही कारण है खिलाड़ी बिना दबाव के खेलते हैं और युवा खिलाड़ी भी उम्मीद से अधिक बेहतर प्रदर्शन करते हैं. खुद धोनी भी बार-बार ये कह चुके हैं नतीजे से अहम प्रोसेस होता है और हम उसे फॉलो करते हैं.

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कोचिंग स्टाफ में सालों से बदलाव नहीं
इसकी बात तो हमेशा होती है कि चेन्नई सुपर किंग्स टीम पर बतौर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का बड़ा प्रभाव है. पर हेड कोच स्टीफन फ्लेमिंग की अगुआई में मजबूत सपोर्ट स्टाफ का भी टीम को बड़ा फायदा हुआ है. जहां बाकी टीमें कोच और कोचिंग स्टाफ बदलती रहती हैं. सीएसके में सालों से कोई बदलाव नहीं हुआ है. फ्लेमिंग पहले सीजन से टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा हैं. बाहर से कोच लाने के बजाए सीएसके में उन खिलाड़ियों को ही कोच बनाने की परंपरा है, जो पहले इस फ्रेंचाइजी के लिए खेल चुके हैं. ताजा उदाहरण हैं टीम के बॉलिंग कोच ड्वेन ब्रावो. जो पिछला सीजन चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेले थे और इस बार गेंदबाजी कोच हैं. माइक हसी भी ऐसे ही हैं कोचिंग स्टाफ में आए. ये सपोर्ट स्टाफ ही धोनी को कारगर रणनीति बनाने में मदद करता है.

Tags: Chennai super kings, IPL 2023, Ms dhoni, Stephen Fleming

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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