स्वाद का सफ़रनामा: स्वाद के साथ गुणों में लाजवाब है सरदा, दिल के लिए है लाभकारी, विदेशी फल का है रोचक इतिहास

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हाइलाइट्स

सरदा खरबूजे की तरह दिखने वाला एक गुणकारी फल है.
सरदा के सेवन से पेट संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है.

Swad Ka Safarnama: सरदा की भारत में खूब डिमांड है और गर्मियों से लेकर आती सर्दियों तक यह खूब खाया जाता है. आजकल फल मंडियों ओर बाजारों में इसके खूब दर्शन हो रहे हैं. मिठास और जूस से भरपूर सरदा में गजब के गुण हैं. यह शरीर को ठंडा तो रखता ही है, साथ ही दिल को भी दुरुस्त बनाए रखता है. यह शरीर को मोटापे से भी बचाए रखता है. सरदा भारत का नहीं है, लेकिन मिठास और जूसी के चलते इसे पूरे भारत में पसंद किया जाता है.

ठोस और कुरकुरा जैसा है इसका गूदा

सरदा (Sun Melon) फल आकार, स्वाद और जूस के मामले में खरबूजा जैसा ही मान लीजिए, इसके बावजूद वह खरबूजे से अलग है. यह खरबूजे से भारी होता है और इसमें लाइनें भी नहीं होती. खरबूजे का रंग मटमैला जैसा होता है, जबकि सरदा का पीलापन लिए हुए. खरबूजे की अपेक्षाा इसमें बीज भी बहुत कम होते हैं. इसकी बड़ी विशेषता यह है कि सरदा मिठास में खरबूजे से ज्यादा मीठा होता है, जूस भी इसमें अधिक होता है. खरबूजे का गूदा तो हलका व कठोर नहीं होता, जबकि सरदा का गूदा कुरकुरा और ठोस होता है. इसमें आम खरबूजों से ज्यादा गूदा होता है, क्योंकि अंदर बीजों के लिए ज्यादा स्पेस नहीं होता.

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सरदा जैसे फल को पनपने के लिए रेगिस्तानी वातावरण की जरूरत है. Image-Canva

सरदा की अन्य विशेषता है कि साल के अधिकतर महीनों में यह उपलब्ध रहता है, जबकि खरबूजा सिर्फ गर्मी की फसल है. यह बहुत जल्दी खराब नहीं होता. तोड़े जाने के बाद यह करीब एक माह तक खराब नहीं होता. पूरी दुनिया में इसे अलग-अलग तरह से खाया जा सकता है. भारत में इसे काट-छीलकर खाया जाता है, अन्य देशों में इसमें दही डालकर खाया जा सकता है. ड्राईफ्रूट्स के साथ भी इसे खाने का मजा है तो इसकी आइसक्रीम बनाई जा सकती हे, स्मूदी तैयार होता है, शर्बत भी बनाया जा सकता है, सलाद में इस्तेमाल किया जा सकता है.

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उजबेकिस्तान व अफ्रीका मानते हैं

सरदा कहां से आया या कहें की इसका उत्पत्ति स्थल कौन सा है, उसको लेकर दो धाराएं हैं. लेकिन हम यह स्पष्ट कर दें कि सरदा का उत्पत्ति स्थल भारत नहीं है. उसका कारण यह है कि खरबूजा और तरबूज भी भारत में पैदा नहीं हुआ तो इसकी बात तो अलग ही है. सरदा को लेकर एक पक्ष का कहना है कि इसका मूल कोरिया से जुड़ा हुआ है और वहीं से यह सिल्क रूट से होता हुआ चीन, भारत, वियतनाम, जापान आदि देशों में पहुंचा. कोरिया में इस फल को चामो, चमे, चानवे कहा जाता है. लेकिन अधिकतर फूड हिस्टोरियन मानते हैं कि सरदा को उपजने और पनपने के लिए जिस प्रकार की जलवायु की दरकार है, वह कोरिया में नहीं है. इसके लिए तो गरम रेगिस्तानी क्षेत्र जरूरी है और ऐसी आबो-हवा तो मिडिल ईस्ट के रेगिस्तानी इलाकों में ही मिलती है.

फूड हिस्टोरियन और एक्सपर्ट पुष्पेश पंत का कहना है कि जो लोग सरदा की उत्पत्ति को कोरिया से जोड़ते हैं, वे नासमझ हैं. सरदा जैसे फल को पनपने के लिए रेगिस्तानी वातावरण की जरूरत है और यह स्पष्ट है कि इसकी उत्पत्ति अफगानिस्तान या उजबेकिस्तान से हुई है. उनका यह भी कहना है कि मुगल शासक बाबर के समय में सरदा भारत आ चुका था.

इस वजह से नाम पड़ा सरदा

ऐसा माना जाता है कि जो सरदा आज हम खा रहे हैं, वह असल में वो नहीं है जो सालों पहले अफगानिस्तान से आया था, अब तो सरदा भारत में ही उगाया जा रहा है. इस मसले पर पूसा संस्थान (ICAR) के वरिष्ठ विज्ञानी (Vegetables) डॉ. हर्षवर्धन चौधरी बताते हैं कि कुछ दशक पहले अफगानिस्तान से यह सरदा सर्दी शुरू होने पर भारत में आता था, चूंकि इसका आना सर्दी से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसका नाम भारत के लोगों ने सरदा रख दिया. माना यह भी जाता है कि सरदा का एक रूट अफ्रीकी देश भी हैं. आज जो हम सरदा खा रहे हैं, वह देश के अनेक भागों में उगा रहे हैं और यह गर्मी के बाद भी उगाया और खाया जा रहा है. इसकी दो किस्में पूसा ने उन्नत की है. उन्होंने खरबूजे और सरदा के बारे में एक रोचक जानकारी यह दी कि जब खरबूजा पक जाता है तो वह अपने आप बेल से टूटकर अलग हो जाता है, जबकि सरदा पकने पर बेल से अलग नहीं होता, उसे तोड़ना पड़ता है.

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मोटापे को दूर रखने में असरकारी है

सरदा स्वाद व गुणों में लाजवाब है, इसलिए इसे शरीर के लिए भी लाभकारी माना जाता है. इसमें रस भरपूर होता है, लेकिन मीठापन व कैलोरी कम होती. यही बैलेंस इसको शरीर के लिए शानदार बना देता है. फूड एक्सपर्ट व डायटिशियन अनीता लांबा के अनुसार इसी विशेषता के चलते यह शरीर को फिट रखता है लेकिन फैट नहीं बढ़ने देता. इसका पॉजिटिव असर यह रहता है कि इसके सेवन से पेट भर जाता है, लेकिन मोटापा दूर रहता है.

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फाइबर से भरपूर सरदा खाने से पाचन सिस्टम दुरुस्त बना रहता है. Image-Canva

सरदा में एडेनोसिन (ऐसा एजेंट जो दिल की गति को सामान्य बनाए रखता है) और पोटेशियम होता है. यह दोनों ब्लड व हार्ट को कंट्रोल में रखते हैं, जिससे दिल की बीमारी का खतरा कम रहता है. सरदा में विटामिन बी भी पाया जाता है जो बालों की मजबूती की लिए लाभकारी माना जाता है. बाल झड़ने पर भी रोक लग जाती है. रिसर्च बताता है कि सरदा में बीटा कैरोटीन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जो आंखों की रोशनी को बेहतर बनाए रखती है. इसका सेवन पाचन सिस्टम को भी दुरुस्त बनाए रखता है, उसका कारण है कि इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर रहता है, जो आंतों को स्मूद बनाए रहता है. इससे कब्ज और गैस से भी बचाव रहता है. सामान्य तौर पर सरदा को ज्यादा खाया नहीं जा सकता, क्योंकि पेट भरा महसूस होगा और खाने पर रोक लग जाएगी. लेकिन इसे ज्यादा खा लिया तो लगातार उबकाई आती रहेगी और संभव है कि उल्टी भी हो जाए.

Tags: Food, Lifestyle

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Author: Up Head Line

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