महिलाओं की बॉडी क्लॉक पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा असरदार कैसे होती है, नए शोध में मिले संकेत

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Science Facts: आपने कभी देर रात तक जागने के कारण अपने पास हो रही ज्‍यादातर बातों या चीजों को थोड़ा अजीब सा महसूस किया है. अगर हां, तो ये आपके शरीर की सर्केडियन क्‍लॉक है, जो इस तथ्‍य से जूझ रही है कि आप उस वक्‍त जाग रहे हैं, जब आपको सो जाना चाहिए. वैज्ञानिक इस पस्थिति को खास नाम ‘सर्केडियन मिस-अलाइनमेंट’ देते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, हर व्‍यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता है. एक नए अध्ययन के मुताबिक, सर्केडियन मिस-अलाइनमेंट के कारण होने वाले नुकसान पुरुषों में ज्‍यादा और महिलाओं में कम होते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाएं बॉडी क्‍लॉक के मामले में पुरुषों के मुकाबले ज्‍यादा लचीली होती हैं. पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता और अध्‍ययन के लेखक सीन एंडरसन कहते हैं कि निष्कर्षों में व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं. इसमें शिफ्टवर्क शेड्यूल के डिजाइन से लेकर ट्रांस-मेरिडियन यात्रा से निपटने की क्षमता तक शामिल हो सकता है. जर्नल साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में 92,000 से ज्‍यादा लोगों के स्वास्थ्य डाटा का विश्लेषण कर निष्‍कर्ष निकाले गए हैं.

ये भी पढ़ें – अब लकड़ी से भी बनाया जा रहा अल्‍कोहल, कैसे हुआ संभव, किसने की खोज

New research, New Study, body clocks of women, body clocks of men, Heart Disease, Heart Stroke, Circadian Clock, Scientists, Science News, Science Facts, Medicines, circadian misalignment, heart disease, heart stroke

शिफ्ट में समान काम करने वाली महिलाओं की तुलना में पुरुष कर्मचारियों के लिए जोखिम ज्‍यादा रहता है.

मेटाबॉलिक सिंड्रोम की आशंका भी ज्‍यादा
शोधकर्ताओं ने अध्‍ययन के उन प्रतिभागियों के शिफ्टवर्क का इतिहास जुटाया गया है, जो सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे के बीच फिक्‍स्‍ड या रोटेशन के आधार पर काम करते हैं. इसमें पाया गया कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में शिफ्ट में काम करने के दौरान मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने की आशंका ज्‍यादा होती है. लेकिन, शिफ्ट में समान काम करने वाली महिलाओं की तुलना में पुरुष कर्मचारियों के लिए जोखिम ज्‍यादा रहता है. शोध में पाया गया कि शिफ्ट में काम करने वाली महिलाएं अपने पुरुष सहमर्मियों के मुकाबले बेहतर नींद लेती हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक, बिलकुल यही निष्‍कर्ष नर और मादा चूहों में भी मिले थे.

ये भी पढ़ें – मंगल पर जीवन की तलाश को बड़ा झटका! नासा ने बताया क्‍यों लाल ग्रह पर जिंदा नहीं रह सकते इंसान?

असामान्‍य दिनचर्या का पुरुषों पर असर
वैज्ञानिकों ने इसी अध्‍ययन के हिस्से के तौर पर जानवरों को असामान्य दिन-रात चक्रों में उच्च वसा वाले आहार खिलाए थे. इसमें पाया गया कि असामान्‍य दिनचर्या के बाद भी मादा चूहों का माइक्रोबायोम, मेटाबॉलिज्‍म और व्यवहार काफी हद तक तमाम परिस्थितियों से अप्रभावित रहा. वहीं,नर चूहों में हाई ब्‍लडप्रेशर की शिकायत शुरू हो गई. साथ ही उनके गट माइक्रोबायोम और लिबर मेटाबॉलिज्‍म में बदलाव होना शुरू हो गया. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि मादा चूहों के मुकाबले नर चूहों का वजन 12 सप्ताह की द्वि-साप्ताहिक शिफ्ट के बाद काफी ज्‍यादा बढ़ गया. अध्‍ययन के दौरान यही निष्‍कर्ष पुरुषों में भी पाया गया.

New research, New Study, body clocks of women, body clocks of men, Heart Disease, Heart Stroke, Circadian Clock, Scientists, Science News, Science Facts, Medicines, circadian misalignment, heart disease, heart stroke

शोध में पाया गया कि सर्केडियन क्‍लॉक हमारे दिमाग से 24 घंटे के चक्र में चलती है.

ये भी पढ़ें – कितने तापमान तक जिंदा रह सकता है इंसान, भीषण गर्मी में शरीर खुद को कैसे रखता है ठंडा

कैसे काम करती है सर्केडियन क्‍लॉक?
सर्केडियन क्लॉक हमारे दिमाग से 24 घंटे के चक्र पर चलती है और शरीर के आसपास के अंगों में घड़ियों को नियंत्रित करती है. हालांकि, इन घड़ियों की लय हमारे शरीर के क्रिया विज्ञान के सभी पहलुओं को निर्देशित करती है. फिर भी इसे हमारे सोने के समय को नियंत्रित करने के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है. ये घड़ी हमारी कोशिकाओं के काम को तय करने से लेकर हमारे मेटाबॉलिज्‍म तक को नियंत्रित करती है. पिछले अध्ययनों से पता चला था कि शिफ्टवर्क स्वास्थ्य और नींद में गड़बड़ी का कारण बन सकता है. इससे मेटाबॉलिज्‍म सिंड्रोम और काम पर दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं. इससे हाई ब्‍लडप्रेशर और ब्‍लड शुगर जैसी समस्‍याओं समेत हृदय रोग और हार्ट स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है.

Tags: Health News, Health tips, New Study, Research, Science facts

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें