
नकुल कुमार/पूर्वी चम्पारण. जिले के बतरौलिया के रहने वाले मनोज कुमार अभागा नाम की एंबुलेंस के संचालक हैं. सुनकर आपको भी अजीब लग रहा होगा. अभागा नाम की एंबुलेंस सुनकर आपके मन में बहुत सारे ख्याल आ रहे होंगे. लेकिन इस एंबुलेंस के बारे में आप जो सोच रहे हैं, यह वैसा है नहीं.
अमूमन एंबुलेंस का मतलब बीमार व्यक्ति को अति शीघ्रता से हॉस्पिटल पहुंचाने वाली गाड़ी के रूप में समझा जाता है, लेकिन मनोज की अभागा एंबुलेंस सिर्फ इन्हीं को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने एवं वहां से लाने का काम करती है. मनोज कुमार कहते हैं कि मैं भी सामान्य मनुष्य की तरह उठना-बैठना चाहता हूं. कहीं आना-जाना चाहता हूं. लेकिन ऐसा नहीं कर पाता हूं. ऐसी परिस्थिति में मैं खुद को एक अभागा के रूप में देखता हूं.
21 साल से बीमार रहते हैं मनोज
मनोज बताते हैं कि वह वर्ष 2002 से बीमार रह रहे हैं. धीरे-धीरे उनके शरीर का अधिकांश अंग काम करना बंद कर दिए. पहले लाठी लेकर चल पाते थे, लेकिन अब नहीं चल पाते हैं. वे बताते हैं कि उन्होंने इस बीमारी का इलाज दिल्ली में कराया. छह महीना इलाज कराने के बाद भी उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं हुआ. फिर यहां आ गए. तब से इसी एंबुलेंस से अपने मन मुताबिक जगहों पर जाते हैं और लोगों से मिलते हैं.
कमरे में लगा रखे हैं दो टीवी
अभागा एंबुलेंस संचालक मनोज कुमार दो भाई हैं. इनके छोटे भाई किसान हैं, उनकी शादी हो चुकी है. जबकि मनोज की शादी नहीं हुई है. परिवार वालों ने घर के कैंपस के बाहर ही उनके लिए एक कमरा बनवा दिया है. इस कमरे में उनका बेडरूम है. जिसमें पुराने एवं नए जमाने के दो टीवी लगे हुए हैं.
कमरे के ऊपर पानी की टंकी लगी हुई है, जो कमरे के भीतर के बाथरूम से अटैच है. मनोज कहते हैं कि वे अपना घरेलू खर्च घर से लेते हैं. इसके साथ ही सत्तू बेचने का कारोबार करते हैं. उन्हें भी किसी मसीहा का इंतजार है, जो उनका इलाज करा सके.
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FIRST PUBLISHED : May 30, 2023, 16:00 IST








