स्कूल टाइम का ‘फेलियर लेबल’ आपका भविष्‍य नहीं, साबित कर रहे सिविल सेवा के ये सक्सेसफुल अफसर

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हाइलाइट्स

यूपीएससी रिजल्ट की रोशनी में राजस्थान के ऐसे युवाओं की कहानियां जो कभी फेल हो गए थे
दसवीं में फेल हुए बाड़मेर के जगदीश अब गुजरात के दाहोद में बने हुए हैं तेजतर्रार एएसपी
बीकानेर के आकाश के दसवीं में कम नंबर आए तो स्कूल निकाला, अब यूपी पुलिस में हैं डीआईजी
सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में वित्त नियंत्रक अधिकारी आरएएस दलपत सिंह 19 एग्जाम में हो चुके हैं फेल

हरीश मलिक

जयपुर. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सर्विसेज परीक्षा का रिजल्ट आ चुका है. ऐसे में टॉपर्स के किस्से तो देशभर में गूंजेंगे ही. उनकी पढ़ाई, हैबिट, शौक, सपनों और सक्सेस मंत्र की खूब बातें हो रही हैं, लेकिन जो यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा पास नहीं कर पाए उन पर ‘फेलियर’ होने का ठप्पा न लगे, इसलिए आज हम आपको राजस्थान मूल के ऐसे सिविल सर्वेंट के बारे में बताएंगे, जो कभी फेल हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने निराशा, हताशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया. हर हाल में सक्सेस पाने के जोश, जज्बे, जुनून और कड़ी मेहनत से उन्‍होंने अपने सपनों को साकार किया.

दरअसल, ये किस्से-कहानियां उन होनहारों की है, जिन्होंने साबित किया है कि एक बार ‘फेलियर की मार्कशीट’ उनके भविष्य को तय नहीं कर सकती. उन्होंने जो ठान लिया, वह अपनी जिद और जुनून से बनकर ही दिखाना है. बाद में आगे चलकर  इन युवाओं ने सफलता की इबारत भी लिखी.

आपके शहर से (जयपुर)

फेल होने का रिकॉर्ड, पर आज चर्चित आएएस अफसर
कवि सोहनलाल द्विवेदी ने लिखा है, ‘नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है…’ इसी को सफलता का मूलमंत्र मानकर उन्होंने ‘परीक्षाओं’ में बार-बार फेल होने के बावजूद हार नहीं मानी. मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में वित्त नियंत्रक अधिकारी के पद पर पोस्टेड आरएएस दलपत सिंह अलग-अलग एग्जाम में 19 बार फेल हुए हैं. 1991 में 10वीं एवरेज मार्क्स से पास करने के बाद 12वीं में दो बार फेल हुए. फिर फर्स्ट ईयर में 1996 से 99 तक चार बार फेल हुए और वर्ष 2000 में बीए पूरी हो पाई. सरकारी नौकरी के लिए कई परीक्षाएं दीं, लेकिन असफल रहे. साल 2003 में बचपन के दोस्त अविनाश चंपावत को आईएएस में ऑल इंडिया में दूसरी रैंक मिली. तब तय किया कि वो भी आईएएस अधिकारी बनेंगे, लेकिन दूसरे ही अटेम्प्ट में ओवरएज हो गए. लेकिन हार नहीं मानी और आरएएस के लिए जी-जान से जुट गए. आखिरकार तीसरे चांस में 55वीं रैंक लाकर उन पड़ोसी, दोस्त-रिश्तेदारों के मुंह बंद कर दिए, जो उनका मजाक उड़ाते थे.

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दसवीं में फेल होने के बाद बने तेजतर्रार IPS अफसर
बाड़मेर के बायतु कस्बे के जगदीश बांगड़वा की कहानी भी फेलियर की गलियों से होकर गुजरती है. आज वह भले ही आईपीएस अफसर बनकर गुजरात के दाहोद में तेजतर्रार एएसपी के पद पर पोस्टेड हों, लेकिन यह भी सच है कि इतने काबिल ऑफिसर 10वीं में फेल हो गए थे. जगदीश ने दूसरे प्रयास में दसवीं का एग्जाम क्लियर किया. 12वीं में गणित में बहुत कम 38 प्रतिशत अंक ही मिले थे, लेकिन जीवन में कुछ बनकर दिखाने का हौसला पूरा था. इसी के चलते कड़ी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई जारी रखी. 2018 में भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा दी और उन्हें 486वीं रैंक हासिल की और वह 23 साल की उम्र में आईपीएस अधिकारी बन गए.

कम नंबर आए तो आकाश को स्कूल ने निकाला, आज डीआईजी
हौंसलों से ही जीत मिलती है और डर के आगे हार नहीं माननी चाहिए. बीकानेर के आकाश आकाश कुलहरि ने भी यही कर दिखाया. 1996 में केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने ते दौरान उन्होंने 10वीं का एग्जाम दिया. महज 57 प्रतिशत मार्क्स आ पाए. इतने कम नंबर आने पर स्कूल ने निकाल दिया. भविष्य को लेकर मन में डर बैठ गया, लेकिन आकाश ने हिम्मत नहीं हारी. कड़ी मेहनत की और 12वीं के बोर्ड एग्जाम में 85 प्रतिशत नंबर हासिल किए. इसके बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. बीकानेर से बी.कॉम करने के बाद दिल्ली की जेएनयू यूनिवर्सिटी से एम.कॉम किया. एमफिल करने के बाद 2006 में पहले प्रयास में ही आकाश ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर ली. अब वे यूपी पुलिस के फायर डिपार्टमेंट के डीआईजी हैं.

10वीं में फेल से दिल टूटा, ईश्वर अब बने आईएएस
अब बात यूपीएससी-2022 के रिजल्ट की. राजस्थान के कई हौनहारों का नाम फाइनल लिस्ट में हैं. भीलवाड़ा के करेड़ा के निवासी ईश्वर गुर्जर की 644वीं रैंक आई है. ईश्वर ने 2011 में दसवीं कक्षा की परीक्षा में फेल हो गए. पढ़ाई छोड़ने का मन बनाया तो किसान पिता सुआलाल ने यह कहकर हौंसला बढ़ाया कि इतनी जल्दी पढ़ाई से घबराने की जरूरत नहीं है. एक बार फेल होना कोई बड़ी बात नहीं है. फिर पढ़ाई जारी रखी और एमडीएस यूनिवर्सिटी अजमेर से प्राइवेट बीए पास की. 2019 में ग्रेड थर्ड शिक्षक बनने के साथ ही पहली बार सिविल सेवा का एक्जाम दिया, लेकिन प्री में ही फेल हो गए. 2020 में शादी हो गई. इस साल इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन सफलता नहीं मिली. फिर पत्नी ने परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली, तो पढ़ाई के लिए पूरा वक्त मिल गया. कभी निराश-हताश न होने और कड़ी मेहनत करने का ही सुफल है कि अब चौथे अटेम्प्ट में ईश्वर ने ईश्वर को सफलता दिलाई है.

12वीं में नंबर कम आए पढ़ाई छोड़ी, अब यूपीएससी क्रेक
क्रिकेट का जुनून ऐसा था कि कुछ और सूझता ही नहीं था. इसका असर पढ़ाई पर इतना आया कि कम नंबर आने पर पढ़ाई छोड़कर क्रिकेटर बनने की ही ठान ली. लेकिन कुदरत ने सीकर के मनोज महरिया की किस्मत में कुछ और ही लिखा था. मनोज स्कूल में हमेशा एवरेज स्टूडेंट ही रहा. 12वीं बोर्ड में महज 62.80 परसेंट मार्क्स ही आए. वह भी इसलिए कि ड्राइंग में उसे 100 में से 84 नंबर मिल गए थे. ड्राइंग सब्जेक्ट न होता तो परसेंटेज और खराब होती. बारहवीं में कम नंबर आने के बाद तीन साल पढ़ाई ही नहीं की. प्रोफेशनल क्रिकेट खेलते रहे. सीकर की जिला क्रिकेट टीम का कप्तान भी बने, लेकिन लेकिन रणजी में सिलेक्ट नहीं हो पाया. साल 2019 में एहसास हुआ कि क्रिकेट की डगर कठिन है, ऐसे में दूसरा ऑप्शन भी होना चाहिए. पढ़ाई शुरू की और अलग-अलग कॉम्पिटिशन एग्जाम दिए. एसएससी, डीआरडीओ, क्लर्क लेवल सहित तीन नौकरियों में सलेक्शन हुआ. इसके बाद कॉन्फिडेंस आया तो यूपीएससी तैयारी शुरू की. पहली बार मेंस में 15 नंबर से रह गया. इसके बाद अब सेकेंड अटेम्प्ट में यूपीएससी क्लियर हो गई है.

Tags: Jaipur news, Rajasthan news, Success Story, Upsc result

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Author: Up Head Line

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