
अर्पित बड़कुल/दमोह:बुंदेलखंड के दमोह जिले के हटा में राजा महाराजाओं के दौर का सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां वाला ऐतिहासिक रंग महल मौजूद है. जहां कई देशों से मीलो का सफर तय कर नृत्यांगनाए, स्वरसाधक और कला प्रेमी अपनी सुंदर प्रस्तुतियां राज देने पहुंचते थे.
दमोह जिले में करीब सात सौ साल पहलेराजा हट्टेशाह ने सन् 1300 ईस्वी में हटा नगरी बसाई. जिसमें राजा महल, रानियों के लिए देवी देवताओं के मंदिरऔर मनोरंजन के लिए रंगमहल का निर्माण करवाया था. इसके दक्षिण में बड़ा नाला स्थित हैतो वहीं रंग महल और मंदिर को बड़ी बड़ी दीवारों से सुरक्षित किया गया था जिसकी दीवारों में मारे (छेद) बनाए गए हैं अगर दुश्मन चढ़ाई करता हैं तो सुरक्षा दीवार के चारो दिशाओं में बने बड़े बड़े विशालकाय गुंबज (चेकपोस्ट) से सुरक्षाकर्मी किले परिसर की सुरक्षा किया करते थे. रंग महल की दीवारों के पत्थर को तराशकर जालीदार पत्थर की सुंदर आकृतियां बेहद आकर्षक हैं.
राजा हट्टेशाह द्वारा बसाया गया यह रंग महल
राजा हट्टेशाह द्वारा बसाया गया यह रंग महल जहां जीर्णशीर्ण हो चुका हैं. सात खंडों वाला किला भी ध्वस्त हो चुका हैं. देवी देवताओं के मंदिर जहां रानियां पूजा किया करती थी वह अब वर्तमान परिवेश में अतिक्रमण का शिकार हो चुका है. वहीं कुएं की वास्तुकला की बात की जाए तो बाकी किलों से यह भिन्न है, जिसमें राजा रानी के स्नान के लिए स्नानागार को भूमिगत बनाया गया था. स्नानागार कुएं के लिए पहुंचने वाले लंबे रास्ते को वर्तमान में जहरीले जीव एवं पक्षियों के डर से बंद कर दिया गया है.
1300 ईस्वी का किला रंग महल के नाम से मशहूर
किले की सुरक्षा में पदस्थ एमटीएस गजानंद सैनी का कहना है कि राजा ने अपने मनोरंजन के लिए रंग महल का निर्माण करवाया था. वर्तमान में एएसआई के संरक्षण में रंग महल और उससे संबंधित इमारतों को संरक्षित किया गया है, जोकि जबलपुर सर्किल के सबसर्किल सागर के अंतर्गत आता है. पुरातत्व अभिलेखागार में पदस्थ सुरेंद्र चौरसिया ने बताया कि हटा नगरी राजा हट्टेशाह के द्वारा बसाई गई थी जहां आज भी 1300 ईस्वी का किला रंग महल के नाम से मशहूर है.
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FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 11:45 IST








