हाइलाइट्स
यूरेनस ग्रह पृथ्वी से 2.5 अरब किलोमीटर दूर है जिससे इसका अध्ययन मुश्किल है.
इसका अवलकोन इसकी स्थिति की वजह से आसान हो सका.
इसके ध्रुव में वायुमंडल में चक्रवात की मौजूदगी पाई गई है.
सौरमंडल के ग्रहों में यूरेनस ग्रह पर एक नई खोज ने वैज्ञानिकों के लिए शोध की एक नई राह खोलने का काम किया है. वैसे तो यूरेनस ग्रह पृथ्वी से 2.5 अरब किलोमीटर की दूरी पर है और उसका अध्ययन उतनी बारीकी से नहीं हो सकता है जैसे की हम शुक्र या मंगल का कर सकते हैं, लेकिन फिर भी यूरेनस ग्रह ने हमारे वैज्ञानिकों को बहुत अनोखी जानकारियां दी हैं और बताया कि सौरमंडल के ग्रह कितने अजीब हो सकते हैं. अब नासा ने ऐसे मजबूत संकेत हासिल किए हैं जिनसे साफ होता है कि यूरेनस ग्रह के ध्रुवों के वायुमंडल में बहुत विशाल चक्रवाती तूफान मौजूद हैं. इस तरह के संकेत पहली बार पाए गए हैं.
यूरेनस की विशेष स्थिति
बहुत दूर स्थित होने की वजह से यूरेनस ग्रह का अवलोकन और अध्ययन वैसे ही बहुत मुश्किल होता है क्योंकि वहां से तरंगों को आने में काफी समय लगता है, वहीं यूरेनस की धुरी लगभग ग्रहों की परिक्रिमा के तल के समांतर ही होती है. वहीं एक अच्छी बात यह है कि कुछ दशकों से यूरेनस का एक ध्रुव पृथ्वी की ओर मुंह नहीं किए हुए है, जिससे उसके ध्रुव के अवलोकन में आसानी हो गई है.
आसान हो गया अध्ययन
यही वजह है कि धरती पर मौजूद रेडियो टेलीस्कोप के जरिए हमारे खगोलविद यूरेनस के ध्रुव का अध्ययन कर सके. वैज्ञानिकों ने बर्फीले ग्रह से निकलने वाली रेडियो तरंगों के अध्ययन के आधार पर पाया कि यूरेनस के उत्तरी ध्रुव पर विशाल और प्रचंड चक्रवात की प्रक्रिया चल रही है.
सभी ग्रहों में भंवर की प्रक्रिया
इस पड़ताल के नतीजे ने इस बात की भी पुष्टि करने का काम किया है कि बुध को छोड़कर हमारे सौरमंडल के सभी ग्रहों, जिनमें में वायुमंडल है, उनके ध्रुव धूमते हुए भंवर के संकते जरूर हैं. चाहे ग्रह पथरीला हो या फिर गैसीय. दिलचस्प बात यह है कि वैज्ञानिक बहुत लंबे समय से यह जानते हैं कि यूरेनस के दक्षिणी ध्रुव में घुमावदार आकृतियां मौजूद हैं.
यूरेनस ग्रह की तस्वीरें इससे पहले नासा के वॉयजर 2 यान ने कई साल पहले ली थीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA_JPL-Caltech )
पहले भी देखे गए थे घूमते बादल
नासा के वॉयजर 2 यान की तस्वीरों से पता चला था कि यूरेनस के दक्षिणी ध्रुव के ऊपर मीथेन के बादल हैं और लेकिन आसपास की तुलना में ध्रुव के केंद्र में हवाएं ज्यादा तेजी से घूम रही हैं. वॉयजर के इन्फ्रारेड मापन के अवलोकन से किसी तरह का तापमान में बदलाव नहीं देखे गए थे. लेकिन जियोफिजिकल रिसर्चन लैटर्स में प्रकाशित अध्ययन के नतीजों में ऐसे बदलाव जरूर देखे गए हैं.
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मजबूत चक्रवात का संकेत
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के लिए न्यू मैक्सिको स्थित वेरी लार्ड ऐरे के विशाल एंटीनाओं का उपयोग किया और यूरेनस ग्रह के बादलों के अंदर झांकने का प्रयास किया. उन्होंने पाया कि घूमती और बहती हवा के कारण ग्रह के बादलों की हवा गर्म और सूखी है और यह एक मजबूत चक्रवात का संकेत है.

यूरेनस की विशेष अवस्था से वैज्ञानिकों को इस ग्रह का इस तरह से अध्ययन करने का अवसर मिला. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)
उम्मीद से कहीं ज्यादा सक्रिय
शोधकर्ताओं ने 2015, 2021, और 2022 तक लिए गए अवलोकनों के जरिए शोधकर्ता यूरेनस के वायुमंडल की गहरी और अभूतपूर्व जानकारियां हासिल की जिनसे यूरेनस की कहानी के बारे में बहुत कुछ पता लगा. इनमें सबसे जरूरी बात यही है कि जितना समझा जाता है यूरेनस उससे कहीं ज्यादा सक्रिय ग्रह है.
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इन सभी उपलब्धियों के पीछे यूरेनस की खास अवस्था की सबसे बड़ी भूमिका है. यूरेनस को सूर्य का एक पूरा चक्कर लगाने में पृथ्वी के कुल 84 सालों का समय लगता है, लेकिन पिछले कुछ दशकों से ध्रुवों की दिशा पृथ्वी की ओर नहीं थी, जिससे वैज्ञानिकों के लिए दोनों ही ध्रुवों की अच्छी जानकारी हासिल करना आसान हो गया. यूरेनस पर पानी ना होने से ये चक्रवात ध्रुवों पर ही फंस गए हैं अब वैज्ञानिक इन चक्रवातों का गहन अध्ययन करेंगे.
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Tags: Earth, Research, Solar system
FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 06:49 IST








