एमपी एमएलए सेशंस कोर्ट ने आजम खान को उस केस में बाइज्जत बरी कर दिया है, जिसमें सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी चली गई थी. तो क्या अब आजम खान की विधानसभा सदस्यता बहाल हो जाएगी. क्या कोर्ट के इस फैसले से आजम की राजनीति को डूबते को तिनके वाला सहारा मिल गया है. क्या यूपी सरकार इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी. क्योंकि बरी होने के बाद आजम खान यूपी की बीजेपी सरकार से लेकर चुनाव आयोग तक को कठघरे में जरूर खड़ा करेंगे. इस फैसले से जुड़े कुछ सवालों के जवाब और संभावनाएं यह हो सकती हैं.
सवाल: आजम खान के खिलाफ क्या मामला है?
जवाब: पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन और हेट स्पीच घ्के मामले में आजम खान के खिलाफ IPC की धारा 153-A, 505 (1) और RP Act की धारा 125 के अंतर्गत FIR दर्ज हुई थी. इसके मुताबिक संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ अपशब्द बोलने के साथ उन्होंने धर्म के नाम पर वोट देने की अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के अनुसार MP और MLA के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन किया गया है. वहां पर ट्रायल मजिस्ट्रेट ने पिछले साल 27 अक्टूबर को आजम खान को 3 साल की सजा सुनाई थी. सजा के अगले दिन स्पीकर ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी. इसके बाद उनकी विधानसभा सीट भी खाली हो गई. आजम खान के साथ उनके बेटे की भी सदस्यता रद्द हो चुकी है. आजम खान को 2020 में गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद वे 27 महीने जेल में थे. आजम खान, उनकी पत्नी और उनके बेटे सभी लोग फिलहाल जमानत पर रिहा हैं.
सवाल: अपील कोर्ट के फैसले से आजम खान के बरी होने के बाद क्या होगा?
जवाब: ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ आजम खान ने अपील की थी. स्पेशल जज एमपी एमएलए सेशंस कोर्ट ने आजम को राहत देते हुए निचली अदालत के सजा सुनाने के निर्णय को खारिज कर दिया है. ADJ के अनुसार तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के दबाव और प्रभाव में चुनाव अधिकारी द्वारा दर्ज कराया गया मामला गलत था. एडीजे कोर्ट के अनुसार एविडेंस एक्ट के प्रावधानों के अनुसार आपत्तिजनक भाषण की पूरी स्क्रिप्ट शिकायत के साथ नहीं दिया गया था. फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो माह के भीतर अपील कर सकती है. कई बार सरकारी मामलों में विलंब होने पर कंडोनेशन आफ डिले एप्लीकेशन के साथ अपील को भी अदालत स्वीकार कर लेती है. यदि हाईकोर्ट से सेशंस कोर्ट का ऑर्डर पर स्थगन आदेश पारित हो गया तो फिर ट्रायल कोर्ट का ऑर्डर फिर बहाल हो जाएगा.[/ans]
सवाल: किस कानून के तहत आजम खान की सदस्यता रद्द हुई थी?
जवाब: संविधान के अनुच्छेद 102 (1) और 191 (1) में सांसदों और विधायकों की डिसक्वालीफिकेशन के बारे में प्रावधान दिए गए हैं. लिली थॉमस मामले में जुलाई 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (4) को निरस्त कर दिया था. RP Act की धारा 8 (3) के अनुसार 2 साल की सजा होने पर अयोग्यता का प्रावधान था. लेकिन धारा 8(4) के अनुसार 3 महीने के अपील पीरियड खत्म होने के बाद ही डिसक्वालीफिकेशन करने का प्रावधान किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार संसद को अयोग्यता के मापदंड और नियम तय करने का अधिकार है. लेकिन उन्हें तीन महीने रोकने के लिए नियम बनाने का हक़ नहीं है. वह याचिका 2005 में दायर हुई थी. लेकिन उस पर फैसला अन्ना आन्दोलन के दौरान आया. राजनीति में आपराधिक लोगों की भागीदारी पर रोक लगाने पर उस फैसले में ज्यादा जोर था. उस फैसले के बाद विधायक या सांसद को 2 साल या ज्यादा की सजा होने के बाद उनकी सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द होने की कानूनी व्यवस्था बन गई.
सवाल: लोक प्रहरी के फैसले से स्थिति बदली?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने 2018 में लोक प्रहरी मामले में फैसला देते हुए लिली थॉमस फैसले में सुधार किया. उस फैसले के अनुसार सजा के फैसले पर यदि अपील अदालत से रोक लग जाए तो फिर डिसक्वालीफिकेशन पर भी रोक लग जाएगी. राहुल गांधी के मामले में अपील अदालत से सजा पर रोक नहीं लगी इसलिए उनकी सदस्यता भी रद्द हो गई. लेकिन उनकी सीट पर अभी नए चुनाव नहीं हुए हैं. इसलिए यदि उनकी सजा रद्द हो जाए तो फिर उनकी सदस्यता बहाल हो सकती है. लक्षदीप के सांसद के मामले लोक प्रहरी फैसले के अनुसार उनकी सदस्यता बहाल हो गई थी.
सवाल: क्या अयोग्यता मामले में क़ानून का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है?
जवाब: क़ानून के अनुसार अयोग्य घोषित होने के साथ सजायाफ्ता व्यक्ति रिहाई के बाद अगले 6 साल तक विधायक या सांसद का चुनाव नहीं लड़ सकता. लिली थॉमस फैसले के परिणामस्वरूप कई दलों के विधायक और सांसदों की सदस्यता रद्द हुई है. जुलाई 2013 में फैसले के बाद सबसे पहले अक्टूबर 2013 में रशीद मसूद की सदस्यता रद्द हुई. उसके बाद लालू प्रसाद यादव, जयललिता, DMK सांसद, BJP एमएलए विक्रम सिंह सैनी, BSP सांसद अफजाल अंसारी और कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी आदि की सदस्यता रद्द हो चुकी है. लक्षदीप के सांसद की सजा स्थगित हो गई. उनकी सीट पर उपचुनाव नहीं हुए थे, इसलिए उनकी सदस्यता बहाल हो गई. लेकिन आजम खान के मामले में सजा ख़त्म होने के फैसले के पहले ही उपचुनाव हो गए, इसलिए उन्हें अब अदालत से उन्हें इस मामले पर बड़ी राहत मिलनी मुश्किल है.
सवाल: UPA सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए क्या प्रयास किए?
जवाब: जुलाई 2013 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार ने सभी प्रयास किए. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू एप्लीकेशन लगाई गई, लेकिन वह खारिज हो गई. फैसले को बदलने के लिए सरकार ने संसद में एक बिल पेश किया. बिल पारित होने में बिलम्ब था. इसलिए सरकार ने अध्यादेश जारी करने का प्रारूप सितंबर 2013 में बनाया. ऐसा माना गया कि लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले से राहत देने के लिए सरकार क़ानून में बदलाव कर रही है. उस प्रस्तावित अध्यादेश का सत्ता पक्ष के सांसद राहुल गांधी ने भी विरोध किया. केंद्र सरकार ने चौतरफा विरोध के बाद 2 अक्टूबर 2013 को अध्यादेश और कानून दोनों को वापस लेने का फैसला ले लिया.
सवाल: क्या आजम खान की सदस्यता बहाल होना मुमकिन नहीं है?
जवाब: सजा के बाद स्पीकर के आदेश से आजम खान की सदस्यता अगले दिन ख़त्म हो गई. उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने आजम की विधानसभा सीट को खाली घोषित कर दिया. किसी भी सीट को लंबे समय तक खाली रखने से आम जनता के विधायिका में प्रतिनिधित्व का अधिकार बाधित होता है. उसके तहत चुनाव आयोग ने रामपुर विधानसभा सीट में उपचुनाव कराने का फैसला लिया. 5 दिसंबर 2022 को रामपुर शहर सीट पर उपचुनाव हुए. 7 दिसंबर को नतीजे घोषित होने पर भाजपा उम्मीदवार ने सपा कैंडिडेट को हराकर विजय हासिल किया. रामपुर सीट में चुनाव की प्रक्रिया कानून के दायरे में पूरी हुई है. इसलिए निवर्तमान विधायक को हटाकर आजम खान की सदस्यता को बहाल करना कानूनी तौर पर संभव नहीं है.
सवाल: लिली थॉमस फैसले में संसद या सुप्रीम कोर्ट से बदलाव कैसे संभव है?
जवाब: लिली थॉमस फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका भी रद्द हो चुकी है. संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसले देश का कानून माने जाते हैं. ऐसे मामलों से जुड़े लोक प्रहरी के अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य फैसले हैं. उन्हें बदलने के लिए संसद से कानून बनाना पड़ेगा. लेकिन उस क़ानून को सुप्रीम कोर्ट में फिर चुनौती मिल सकती है. आजम खान सेशंस कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट में आर्टिकल 226 और सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 32 के तहत पिटीशन फाइल कर सकते हैं. राहुल गांधी और आजम खान जैसे अनेक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ के गठन की मांग उठ सकती है.
सवाल: आजम खान को राहत कैसे मिल सकती है?
जवाब: आजम खान को एक मामले में सेशंस कोर्ट से राहत मिली है. लेकिन 15 साल पुराने अन्य मामले में पुलिस के काम में हस्तक्षेप और ट्रैफिक में व्यवधान डालने के लिए आजम के खिलाफ आपराधिक मामले में उन्हें 2 साल की सजा हुई है. आजम के ऊपर जमीन पर कब्जा करने, वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़े 90 से ज्यादा आपराधिक मामले चल रहे हैं. आजम खान की सजा को खत्म करने वाले फैसले पर यूपी सरकार हाईकोर्ट में अपील करेगी. आजम खान अपनी सदस्यता की बहाली के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं. पहला, सेशंस कोर्ट के फैसले पर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से रोक नहीं लगे. दूसरा, मुरादाबाद के दूसरे मामले में आजम की सज़ा पर अदालत से रोक लग जाए. तीसरा, किसी अन्य नए मामले में आजम को अदालत से 2 साल से ज्यादा की सजा नहीं हो. इन तीन परिस्थितियों में आजम नए सिरे से विधानसभा या सांसदी के उपचुनाव में भाग ले सकते हैं.
विराग गुप्ताएडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट
लेखक सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान तथा साइबर कानून के जानकार हैं. राष्ट्रीय समाचार पत्र और पत्रिकाओं में नियमित लेखन के साथ टीवी डिबेट्स का भी नियमित हिस्सा रहते हैं. कानून, साहित्य, इतिहास और बच्चों से संबंधित इनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. पिछले 7 वर्ष से लगातार विधि लेखन हेतु सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा संविधान दिवस पर सम्मानित हो चुके हैं. ट्विटर- @viraggupta.









