
अभिलाष मिश्रा/इंदौर. कहते हैं कि हर व्यक्ति की समाज के प्रति अपनी जवाबदेही होती है और हर किसी को यह जवाबदेही समझनी चाहिए. इंदौर के आसरा निशक्तजन वेलफेयर सोसाइटी में ऐसे 30 बच्चे रहते हैं, जिनकी उम्र तो बढ़ी है, लेकिन उम्र के साथ दिमाग विकसित नहीं हो पाया है. इन सभी का जिम्मा संभाल रहे हैं दीपक फडणवीस. दीपक 2008 से ऐसे बच्चों की देखभाल का काम कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी.
दीपक बताते हैं कि 2008 से मैं इन बच्चों के लिए पूरी तरह से समर्पित होकर काम कर रहा हूं. 2013 में मेरे काम को देखते हुए लोगों ने मुझे सलाह दी कि आप अपने इस सेवा कार्य को जारी रखें और अपने संस्थान को रजिस्टर्ड करा लें. जिसके बाद मैंने 2013 में ही अपने संस्थान को रजिस्टर्ड करवाया. 2017 से हमारे कार्य को और अधिक प्रोत्साहन मिला, जब सरकार की ओर से हमें सहायता मिलने लगी.
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में आसरा निशक्तजन वेलफेयर सोसाइटी में करीब 30 बच्चे रहते हैं. सभी18 वर्ष से ऊपर के हैं. ऐसे बच्चों को कई बार संभालना मुश्किल भी होता है, पर हमारी टीम यह काम अपना धर्म मान कर करती है. हमारे यहां बच्चे केवल रहते नही हैं, बल्कि यहां पर बच्चों को कौशल के गुर भी सिखाए जाते हैं, ताकि यह बच्चे अपना खर्चा आगे चल कर खुद चला सकें. दीपक कहते हैं कि हमारे यहां के कई बच्चे अब काम भी करने लगे हैं. एक बच्चा तो ऐसा भी है जोकि लगभग 3 साल से एक ही दुकान पर काम कर रहा है.
20 बच्चों की देखभाल के लिए शासन से मिलती है सहायता
दीपक ने कहा किइन बच्चों के लिए यह काम करना बड़ी बात होती है, क्योंकि भले ही यह शारीरिक रूप से बड़े हो गए हो पर अभी भी इनका दिमाग बच्चों का ही होता है. पर हम ऐसे बच्चों को प्रशिक्षित करते हैं, ताकि वह भी सम्मान और स्वाभिमान की जिंदगी जी सकें. उन्होंने कहा कि 2017 से 20 बच्चों की देखभाल के लिए हमें शासन से सहायता मिलती है, जबकि अभी भी 10 बच्चों का खर्च हम खुद उठाते हैं और इस कार्य को हम ईश्वर का कार्य मानकर करते हैं. हमारे यहां के बच्चे बहुत सारे कंपटीशन में भाग लेते हैं और ट्रॉफी और मेडल जीतकर भी आते हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 25, 2023, 17:42 IST








