The Mahabharata Secret: कौन थी दुर्योधन की बहन, जिसे अर्जुन ने किया ​विधवा, पति-ससुर की साथ हुई मृत्यु, वजह बना अनोखा वरदान

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हाइलाइट्स

धृतराष्ट्र और महारानी गांधारी के 100 पुत्र और 1 पुत्री थी.
वेद व्यास जी ने गांधारी को 100 पुत्रों की माता होने का वरदान दिया था.

महाभारत में हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र और महारानी गांधारी के 100 पुत्र और 1 पुत्री थी. दुर्योधन कौरव भाइयों में सबसे बड़ा था. दुर्योधन की बहन के बारे में कम पढ़ने को मिलता है. ऐसा भी हो सकता है कि कई लोगों को दुर्योधन की बहन के बारे में पता भी न हो. हम आपको बताते हैं कि दुर्योधन की बहन का नाम दुःशला था. कई जगह उसका दुशाला नाम भी लिखा गया है. महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने दुशाला के पति का वध कर दिया, जिससे वह विधवा हो गई थी. दुशाला के पति को जब अर्जुन ने मारा तो उसके पति त​था ससुर की मृत्यु एकसाथ हो गई. इसके पीछे एक अनोखा वरदान था. आइए जानते हैं दुशाला और उसके पति के बारे में रोचक बातें.

दुर्योधन की बहन के जीवन से जुड़ी रोचक बातें
कैसे हुआ दुशाला का जन्म?
जब वेद व्यास जी ने गांधारी को 100 पुत्रों की माता होने का वरदान दिया तो वह दो वर्ष तक गर्भवती रहीं. जब प्रसव हुआ तो उनके गर्भ से एक लोहे का गोला निकला. तब वेद व्यास जी ने उस गोले के 100 टुकड़े कराकर कुछ जड़ी-बुटियों के साथ उनको 100 घड़ों में रख दिया. गोले में से एक टुकड़ा बच गया, उससे ही दुर्योधन की बहन दुशाला का जन्म हुआ.

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जयद्रथ से हुआ था दुशाला का विवाह
दुशाला का विवाह सिंधु नरेश जयद्रथ से हुआ था. इस तरह से जयद्रथ दुर्योधन का बहनोई था. महाभारत के युद्ध में उसने कौरवों का साथ दिया. उसके पिता वृद्धक्षत्र ने काफी तप किया था, जिसकी वजह से जयद्रथ का जन्म हुआ था. वह साहसी और वीर योद्धा था.

जयद्रथ को मिला था अनोखा वरदान
जयद्रथ का जन्म हुआ तो यह भविष्यवाणी हुई कि उसका वध किसी भी साधारण मनुष्य के हाथों नहीं हो सकती है. उसे कोई वीर क्षत्रिय ही मार सकेगा. जो भी जयद्रथ का सिर काटकर जमीन पर गिराएगा, उसी क्षण मारने वाले का सिर भी 100 टुकडों में फट जाएगा.

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जयद्रथ को शिव जी से मिला 4 पांडवों को हराने का आशीर्वाद
पांडवों ने जब जयद्रथ को अपमानित किया था, तब उसने पांडवों से बदला लेने के लिए शिव आराधना की थी. उसकी तपस्या से शिव जी प्रसन्न हुए तो उसने 5 पांडवों के वध का वरदान मांगा. तब भगवान शिव ने कहा कि तुम केवल 4 पांडवों को ही युद्ध में हरा पाओगे, अर्जुन को नहीं.

जयद्रथ वध से दुशाला हुई ​विधवा
जब चक्रव्यूह की रचना हुई तो अभिमन्यु ने उसका भेदन किया और उसके अंदर घुस गए. लेकिन जयद्रथ ने बाकी 4 पांडवों को चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया. 4 पांडव उससे हार गए और अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुए. फिर अर्जुन ने जयद्रथ को अपने बेटे की मौत का दोषी माना और फिर अगले दिन जयद्रथ का वध कर दिया.

अर्जुन ने जयद्रथ का तीर से गला काट दिया और उसका सिर तपस्या में लीन पिता वृद्धक्षत्र की गोद में गिरा. सिर गोद में गिरते ही वृद्धक्षत्र के शरीर के 100 टुकड़े हो गए. इस तर​​​ह दुशाला विधवा हो गई. उसके पति और ससुर की एक ही दिन मौत हुई.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Dharma Aastha, Mahabharat

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Author: Up Head Line

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