ग्रह पीड़ा से हैं परेशान, नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र आएगा काम, शनि-राहु-केतु भी हो जाएंगे शांत, ज्योतिषाचार्य से जानें कैसे करें पाठ

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

हाइलाइट्स

ग्रहों की अशुभ स्थिति के कारण ग्रह दोष पैदा होते हैं.
नवग्रह पीड़ा शांति के लिए ब्रह्माण्ड पुराण में उपाय बताया गया है.

ज्योतिष शास्त्र में नवग्रह का वर्णन है, जिनके आधार पर भविष्य की गणनाएं की जाती हैं. वैसे देखा जाए तो सूर्य, शनि, बुध, चंद्र, गुरु, शुक्र और मंगल 7 वास्तविक ग्रह हैं. राहु और केतु छद्म ग्रह होते हैं, जिनका प्रभाव लोगों के जीवन पर पड़ता है. इस तरह से कुल 9 ग्रह होते हैं. इन ग्रहों की स्थिति और दशाओं के कारण व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है. किसी कुंडली में कोई ग्रह मजबूत होता है तो कोई ग्रह कमजोर होता है, ग्रहों की अशुभ स्थिति के कारण ग्रह दोष भी पैदा होते हैं. कुंडली में ग्रह दोष के कारण व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं. जैसे भाग्य कमजोर हो सकता है, धन, शिक्षा, ज्ञान आदि का अभाव, कष्टपूर्ण जीवन, माता, पिता, पत्नी, संतान आदि का सुख न होना आदि. ग्रह दोषों को दूर करने के लिए ज्योतिष में कई उपाय किए गए हैं.

यदि आपकी कुंडली में ग्रह दोष के कारण पीड़ा है, कष्ट है और दुखों का अंत नहीं हो रहा है तो ऐसे में आप उन ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति के उपाय कर सकते हैं. जिसमें मंत्र जाप, दान, व्रत आदि शामिल होता है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं नवग्रह पीड़ा से मुक्ति का उपाय.

यह भी पढ़ें: बना अशुभ षडाष्टक योग, शनि-मंगल 4 राशिवालों के जीवन में कर सकते हैं अमंगल, संपत्ति हानि, दुर्घटना, वाद-विवाद की आशंका

नवग्रह पीड़ा उपाय
ज्योतिषाचार्य डॉ भार्गव बताते हैं कि नवग्रह की पीड़ा शांति के लिए ब्रह्माण्ड पुराण में अच्छा उपाय बताया गया है. नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करने से ग्रह पीड़ा शांत हो सकती है. नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र में नवग्रहों की स्तुति की गई है. उनसे दुखों को दूर करने की प्रार्थना की गई है. नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र से शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों से मिलने वाली पीड़ा खत्म होती है.

नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र
ग्रहाणामादिरात्यो लोकरक्षणकारक:।
विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे रवि:।।1।।

रोहिणीश: सुधा‍मूर्ति: सुधागात्र: सुधाशन:।
विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे विधु:।।2।।

भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा।
वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु में कुज:।।3।।

उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुध:।।4।।

यह भी पढ़ें: सर्वार्थ सिद्धि समेत दो शुभ योग में है निर्जला एकादशी, पूजा के बाद दान करें 5 वस्तुएं, विष्णु कृपा के साथ होंगे 5 फायदे

देवमन्त्री विशालाक्ष: सदा लोकहिते रत:।
अनेकशिष्यसम्पूर्ण: पीडां हरतु मे गुरु:।।5।।

दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामति:।
प्रभु: ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगु: ।।6।।

सूर्यपुत्रो दीर्घदेहा विशालाक्ष: शिवप्रिय:।
मन्दचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि:।।7।।

अनेकरूपवर्णेश्च शतशोऽथ सहस्त्रदृक्।
उत्पातरूपो जगतां पीडां हरतु मे तम:।।8।।

महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबल:।
अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीडां हरतु मे शिखी:।।9।।

नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र पाठ विधि
नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करने से पूर्व आप स्नान आदि से निवृत होकर साफ कपड़े पहन लें. उसके बाद गौरी और गणेश का पूजन करें. फिर बारी-बारी से नवग्रह की पूजा करें. उनकी प्रिय वस्तुएं उनको अर्पित करें. उसके पश्चात नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करें.

Tags: Astrology, Dharma Aastha

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें