Miracle:पैरालिसिस की वजह से 12 साल से बेड पर था शख्‍स, ब्रेन में चिप लगते ही दौड़ने लगा

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कुछ दिनों पहले एक खबर आई थी कि अमेरिका की एक कंपनी ने 50 लोगों के दिमाग में चिप लगा दी है. साइंटिस्‍ट का दावा है कि इससे सिर्फ अंधेपन, बहरेपन नहीं नहीं, पैराल‍िसिस, डिप्रेशन समेत तमाम बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. उसका नतीजा अभी आना बाकी है. इसी बीच एक और चमत्‍कार हो गया. नीदरलैंड में 40 साल का एक शख्‍स, जिसे हादसे की वजह से लकवा मार गया था. 12 साल से वह बेड पर ही था. बिल्‍कुल पैर भी नहीं हिला पा रहा था. वह अचानक चलने लगा. पता चला कि साइंटिस्‍ट ने उसके दिमाग में मन को पढ़ने वाली एक इलेक्ट्रॉनिक चिप फ‍िट की है, जिससे वह अपने दिमाग को नियंत्रित कर पा रहा है.

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, गर्ट-जान ओस्कम नाम के इस शख्‍स को खड़े होकर चलते हुए और यहां तक क‍ि सीढ़ियां चढ़ते हुए दिखाया गया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में काम करते समय ओस्कम हादसे का श‍िकार हो गए थे. उनके रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी. इससे चलना फ‍िरना तो दूर की बात, वे पांव हिला भी नहीं सकते थे. उन्‍हें पूरी तरह लकवा मार गया था. क्‍योंकि रीढ़ की हड्डी की चोट मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के क्षेत्र के बीच कम्‍युनिकेशन को बाध‍ित कर रही थी. इसी वजह से अक्‍सर लकवा होता है. इसके बाद न्‍यूरोसाइंटिस्‍ट ग्रेगोइरे कोर्टाइन के रिसर्च पर काम किया गया.

दिमाग में एक इलेक्‍ट्रॉनिक मशीन फ‍िट कर दी
साइंटिस्‍ट की एक टीम ने इस कम्‍युनिकेशन को बहाल करने के लिए मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बीच एक ‘वायरलेस डिजिटल ब्रिज’ विकस‍ित करने पर काम किया. उन्‍होंने ओस्कम के दिमाग में एक इलेक्‍ट्रॉनिक मशीन फ‍िट कर दी. यह पैरों के मूवमेंट पर नजर रखने लगा. रिसर्च टीम के लेखक प्रोफेसर जॉक्लीने बलोच ने कहा, जब हम चलने के बारे में सोचते हैं तो यह उपकरण मस्तिष्क द्वारा उत्पन्न विद्युत संकेतों को डिकोड करता है. फ‍िर ब्रेन से आए संकेतों को रीढ़ की हड्डी में इलेक्‍ट्रॉनिक कम्‍युनिकेशन के माध्‍यम से भेजा जाता है. इससे मांसपेश‍ियां एक्‍ट‍िवेट हो जाती हैं और पैर फ‍िर से संकेत प्राप्‍त कर मूवमेंट करने लगता है.

रीढ़ की हड्डी की चोट भी ठीक होने लगी
सबसे अच्छी बात यह है कि यह सिस्टम वायरलेस तरीके से काम करता है, जिससे मरीज स्वतंत्र रूप से इधर-उधर घूम सकता है. गर्ट-जान के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में इम्प्लांट लगाए जाने के बाद सिस्टम को कैलिब्रेट करने में कुछ ही मिनट लगे. और वह अब एक साल से अधिक समय से घर पर इसका उपयोग करने में सक्षम हैं. सिस्टम ने गर्ट-जन को अपने दम पर खड़े होने, चलने और सीढ़ियां चढ़ने की अनुमति दी है. यह वैज्ञानिकों के लिए असाधारण खुशी से कम नहीं. यहां तक क‍ि इसकी वजह से रीढ़ की हड्डी की चोट भी ठीक होने लगी है. नए तंत्रिका कनेक्शन विकसित हुए हैं.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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