
नीरज कुमार/बेगूसराय: आपने शिवालयों और मंदिरों में स्थापित छोटे और बड़े दोनों प्रकार के शिवलिंग देखे होंगे. जहां भक्त रोजना जलाभिषेक करते हैं. लेकिन, आज आपको एक ऐसे शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं जहां शिवलिंग का आकार घटता नहीं है बल्कि साल-दर-साल बढ़ते हीं जा रहा है. यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से निर्मित है.
यह शिवलिंग बिहार के बेगूसराय जिला स्थित सांव गांव में है. यहां के लोगों का कहना है कि यह शिवलिंग कितना वर्ष पुरना है इसका सटीक अनुमान किसी के पास नहीं है. लेकिन 200 वर्ष पुराना बताया जा रहा है. हालांकि स्थानीय लोगों से जब इसके बारे में पूछा गया तो उनका कहना है कि पहले छोटे आकार का था. साल दर साल इसकी साइज बढ़ती जा रही है. लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं है. यही वजह है कि दूर-दराज से भी भक्त पूजा करने के लिए यहां आते हैं.
पिछले 70 वर्षों में शिवलिंग का आकर दोगनुा से भी हुआ अधिक
बेगूसराय सदर प्रखंड के सांख गांव में शिवलिंग को यहां सांख धाम के नाम से पुकारा जाता है. देवघर की शिवलिंग की भांति इसे भी सांख धाम नाम से मान्यता प्राप्त है.सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इस शिवलिंग का आकार लगातार हर साल बढ़ रहा है. संभवत: इसलिए यहां पर हर साल स्थानीय लोगों की आस्था बढती जा रही है.
स्थानीय श्यामली देवी हर रोज भगवान शंकर का दर्शन करने के लिए आती हैं. उन्होंने बताया पिछले 70 वर्षों में शिवलिंग दोगुना से भी ज्यादा बड़ा हो गया है. गांव के बड़े-बुजुर्गो का कहना है कि यह शिवलिंग 200 वर्ष से अधिक पुराना है.
ग्रामीणों के लिए पहेली बना शिवलिंग का आकार
स्थानीय हरेराम ने बताया पहले यहां जंगल हुआ करता था और ईंट भट्ठा था. अचानक यहां पर देखा गया कि एक छोटा सा शिवलिंग है. लेकिन शिवलिंग के आकार में लगातार परिवर्तन होते आ रहा है. जिसके बाद धीरे-धीरे शिवलिंग का बढ़ता स्वरूप भक्तों को अपनी और आकर्षित करने लगा. अब यह सांख धाम में परिणत हो गया है. इसके पीछे क्या चमत्कार है, यहां के लोगों के लिए अबूझ पहेली से कम नहीं है. यहां के लोग अपने हिसाब से तर्क लगाते हैं और इसकी चर्चा करते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी मन्नत यहां मांगी जाती है वह पूरी हो जाती है.
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FIRST PUBLISHED : May 23, 2023, 18:15 IST








