
पीयूष पाठक/ अलवर. अलवर जिले का एकमात्र गोविंददेव मंदिर अलवर शहर के बजाजा बाजार में करीब 152 साल से स्थित है. यहां अलवर शहर की कई पीढ़ियों के लोग सालों से निरंतर दर्शन करने के लिए आ रहे हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जितना मंदिर यह प्राचीन है. इसकी खूबसूरती भी उतनी ही आकर्षक है. इस मंदिर में विराजमान भगवान गोविंद देव जी की स्थापना महावर वैश्य समाज द्वारा करवाई गई थी. यहां पर कोई भी श्रद्धालु अपनी पीड़ा और कष्ट लेकर आता है तो उनकी पीड़ा जल्दी दूर हो जाती है.गोविंद देव जी के दर्शन करने से भी हर मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. यहां आए श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां पर जो भी वक्त अपनी मनोकामनाएं और पीड़ा लेकर आए हैं, उनकी ख्वाहिश पूरी हुई है.
गोविंद देव जी मंदिर के पंडित दिनेश शर्मा ने बताया कि मैं इस मंदिर की सेवा करीब 32 सालों से सेवा कर रहा हूं. इस मंदिर की स्थापना महावर वैश्य समाज द्वारा करवाई गई थी. यह मंदिर जमीन से 20 सीढ़ियां की ऊंचाई के बाद स्थित है. यह गोविंद देव जी का एक भव्य मंदिर है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आनंद प्राप्त होता है. उत्सवों पर गोविंद देव जी का भव्य श्रृंगार किया जाता है. पंडित दिनेश शर्मा ने बताया कि इस मंदिर में भगवान गोविंद देव जी की मूर्ति साक्षात है. गोविंद देव जी के साथ इस मंदिर में हनुमान जी, शिव जी मूर्ति स्थापित है.
पंडित दिनेश शर्मा के अनुसार अलवर जिले का यह गोविंद देव जी मंदिर यह पहला मंदिर है, जिसमें गोविंद देव जी के साथ उनकी 8 सखियां भी विराजमान है. गोविंद देव जी की मूर्ति पाषाण से बनी है. राधाजी की मूर्ति अष्टधातु से निर्मित है. गोविंद देव जी की मूर्ति करीब ढाई फीट की है. गोविंद देव जी की प्रतिमा इतनी आकर्षित है कि लोग यहां पर अगर भगवान से आंख मिलाकर प्रार्थना मांगे तो उन्हें टिमटिमाना ही पड़ता है. बाजार के व्यापारी भी गोविंद देव जी का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं.
अलवर के गोविंद देव जी मंदिर में चित्रकारी कुछ इस कदर की गई है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है. इसमें मंदिर की ऊपरी दीवार पर भव्य चित्रकारी की गई है जोकि 1948 में यहां पर आए कारीगरों द्वारा उल्टे लेट कर की गई थी.
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FIRST PUBLISHED : May 23, 2023, 16:42 IST








