
अभिनव कुमार/दरभंगा. “पग पग पोखर माछ मखान” मिथिला का यह स्टेटस रहा है. यही कारण है की मिथिला में जलीय फसल सबसे अधिक होता है. चाहे बात मखाना की करें या फिर अन्य फसलों की. इन्हीं सब चीजों को देखते हुए दरभंगा महाराज के द्वारा मिथिला क्षेत्र में अनगिनत तालाब और नहरों का निर्माण करवाया गया था. जिससे कि जल यह फसल के साथ अन्य फसलों में किसानों के लिए मददगार साबित हो सके. उन तालाबों और नहरों में हमेशा जल संचय बना रहे उसके लिए वर्षा के देवता इंद्र की आराधना करने के लिए राज परिसर में इंद्र भवन का निर्माण करवाया जहां इंद्र पूजा बहुत ही धूमधाम से होती थी. आज यह जगह खंडहर हो गई है.
यहां इंद्र पूजा के बाद निश्चित होती थी बारिश
मान्यता है कि यहां इंद्र पूजा के बाद बारीश निश्चित होती थी. शायद कभी ऐसा हुआ होगा जो इंद्र पूजा के बाद बारिश नहीं हुई हो. इस संदर्भ में इस इंद्र भवन के पुजारी के पौत्र कमलेंद्र झा बताते हैं कि दरभंगा महाराज के द्वारा बहुत सारे पोखर तालाब नहर बनवाए गए थे और किसानों को भी पानी की कमी ना हो . उसके लिए पानी के देवता इंद्र भगवान की विधिवत पूजा करते थे. इस इंद्र भवन के मैदान में बहुत बड़ा मेला लगा करता था. उस वक्त मेरे बड़े दादा जी को महाराज के द्वारा विशेष रूप से बुलाया जाता था. यहां इंद्र पूजा करने के लिए क्योंकि वह बहुत बड़े विद्वान थे.
पुजारी अयाचक ब्राह्मण थे, वो दान दक्षिणा नहीं लेते थे
दरभंगा महाराज को उनका कराया पूजा पसंद आता था और पूजा करवाने के बाद यदि बारिश नहीं हुई तो माना जाता था कि इंद्र भगवान रूष्ट हैं. शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा कि पूजा के बाद बारिश नहीं हुई हो हम लोग अयाचक ब्राह्मण हैं दान दक्षिणा नहीं लेते थे. पूजा के बाद दक्षिणा देना परंपरा थी. एक रास्ता निकाला गया जिसमें दरभंगा महाराज के द्वारा दिए गए दक्षिणा को दादाजी गरीब में बांट दिया करते थे. वही दरभंगा है जो एक समय जल ही जल यहां हुआ करता था स्थिति आज की सामने है. पूजा बंद हो गई जल संकट उत्पन्न हो गई दरभंगा के लोग बूंद बद के लिए तरस रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED : May 22, 2023, 15:04 IST








