
महेंद्र सैनी/जयपुर. आंख मूंदकर भरोसा करने वाले भले जीवन में धोखा खा जाएं, पर काश्वी पारीक आंख बंद करके सारे मुश्किल काम कर लेती है और जरा भी चूक नहीं होती. बता दें कि काश्वी महज 9 साल की बच्ची है और गुलाबी नगरी के सीरसी की रहनेवाली है.
काश्वी पारीक (Kashvi Pareek) का यह कमाल इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड (India Book Of Records) सहित एशिया में ग्रांड मास्टर सर्टिफिकेशन (पलेटिनम) में भी दर्ज हो चुका है. जाहिर है काश्वी के इस कमाल से माता-पिता का तो सिर ऊंचा उठा ही, राजस्थान (Rajsthan) और भारत (India) का भी नाम रोशन हुआ है.
विश्व रिकॉर्ड के लिए अप्लाई
काश्वी ने अब विश्व रिकॉर्ड (World Record) के लिए भी अप्लाई किया है. काश्वी के इस हुनर की प्रशंसा करते उसके आस-पास के लोग थकते नहीं हैं. इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देनेवालों का तांता लगा रहता है. काश्वी को ब्लाइंड फोल्ड (Blind Fold) के बाद किताब पढ़ने से लेकर बारीक से बारीक चित्रों में रंग भरने और स्केच तैयार करने में महारथ हासिल है. काश्वी ये सब बड़ी आसानी से आंख पर पट्टी बांध करके कर लेती हैं.
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कठिन अभ्यास
काश्वी के पिता राहुल पारीक (Rahul Pareek) हैं. काश्वी दो बहनों में सबसे बड़ी हैं. वे अभी 4 ग्रेड में पढ़ती हैं. जबकि छोटी बहन अभी नर्सरी में पढ़ती है. काश्वी अपने इस हुनर की ट्रेनिंग अपनी बहन को भी देने की कोशिश करती है. इतना ही नहीं, गणित और विज्ञान पर काश्वी की बहुत अच्छी पकड़ है. काश्वी के पिता राहुल पारीक ने बताया कि इस महारथ के लिए काश्वी 3 से 4 घंटे प्रतिदिन अभ्यास करती हैं. आश्वी अंधेरे में भी व्यक्ति के पहने हुए कपड़ों के रंग बता देती हैं.
क्या है ब्लाइंड फोल्ड
इस कला के लिए व्यक्ति का मानसिक रूप (Mental Form) से मजबूत होना जरूरी होता है. इस कला में आंखों पर कॉटन रखने के बाद कसकर पट्टी बांधी जाती है. इसके बाद ब्लाइंड फोल्ड व्यक्ति को अपने मस्तिष्क के मध्य भाग पर ध्यान केंद्रित करना होता है. जिसके बाद ललाट के चैतन्य भाग के जरिए बाहरी हिस्से की गतिविधियों और वातावरण का आभास होने लगता है. इसके लिए आमतौर पर 90 दिन की ट्रेंनिंग होती है. जहां प्रतिदिन चार घंटे अभ्यास करना होता है. इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यक्ता होती है.
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FIRST PUBLISHED : May 20, 2023, 14:19 IST








