बचपन में मां को खोया, कैंसर से पैर कट गया; मगर हौसला नहीं छोड़ा, अब बनना चाहता है IAS

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हाइलाइट्स

मुजफ्फरपुर के अमरनाथ के हौसले के आगे सारी मुसीबतें पस्त.
कैंसर से पैर कट जाने के बाद भी अमरनाथ के हौसले की कहानी.

मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर के बघनगरी का रहने वाला अमरनाथ जब 4 साल का था तभी उसकी मां का देहांत हो गया था. फिर उसके पिता ने अपने इकलौते बेटे को पालना शुरू किया, लेकिन शायद अमरनाथ की किस्मत में तो सिर्फ तकलीफ लिखी थी. अमरनाथ जब 14 साल का हुआ तो अचानक उसके दाहिने पैर में दर्द शुरू हुआ. इलाज शुरू तो पता चला कि उसके पैर में कैंसर है.

अपने इकलौते संतान के कैंसर के बारे में सुनकर पिता विवेकानंद झा टूट गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. पटना के महावीर कैंसर संस्थान से इलाज शुरू हुआ. डॉक्टरों की सलाह पर अमरनाथ का दाहिना पैर कटवाना पड़ा. अमरनाथ अब एक पैर पर अपनी जिंदगी जी रहा है.

अमरनाथ अपने पिता का इकलौता संतान है. पिता विवेकानंद झा किसान हैं और साथ ही गांव में पंडिताई का काम भी करते हैं. अमरनाथ एक पैर पर वैशाखी के सहारे अमरनाथ कोचिंग और स्कूल जाता है, लेकिन उसका जज्बा कम नहीं है. 10वीं का छात्र अमरनाथ पैर की वजह से सेंट अप परीक्षा नहीं दे सका, जिससे इस बार वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सका. लेकिन इस बार वह पूरी तैयारी कर रहा है.

आपके शहर से (पटना)

अमरनाथ ने News 18 से बातचीत में बताया कि उसके पिता ही उसका देखभाल करते हैं. अमरनाथ ने बताया कि वो पढ़कर IAS बनना चाहता है. हालांकि आर्थिक मजबूरी उसकी राह में रोड़ा बन जाती है. हालांकि, उसके पिता ने कहा कि वो अपने बेटे की इच्छा पूरी करेंगे.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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