
हाइलाइट्स
गंगा दशहरा वाले दिन सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है.
इस दिन प्रात:काल से ही गंगा स्नान और दान प्रारंभ हो जाता है.
गंगा दशहरा हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाते हैं. गंगा दशहरा को गंगा अवतरण दिवस भी कहते हैं. गंगा दशहरा निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी से एक दिन पूर्व या फिर एक ही दिन पड़ता है. इस बार गंगा दशहरा एकादशी से एक दिन पूर्व ही है. गंगा दशहरा और गंगा जयंती अलग-अलग हैं. जिस दिन गंगा का जन्म हुआ, उस दिन गंगा जयंती मनाते हैं और जिस दिन गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ, उस दिन गंगा दशहरा मनाते हैं. पृथ्वी पर अवतरण से पहले गंगा भगवान शिव के जटाओं में समा गई थीं. इसके पीछे एक बड़ा कारण है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं कि इस साल गंगा दशहरा कब है, पूजा का मुहूर्त क्या है और गंगा अवतरण की कथा क्या है?
गंगा दशहरा 2023 मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 29 मई दिन सोमवार को सुबह 11 बजकर 49 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और इस तिथि की समाप्ति 30 मई दिन मंगलवार को दोपहर 01 बजकर 07 मिनट पर हो रहा है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर गंगा दशहरा 30 मई को मनाया जाएगा.
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गंगा दशहरा 2023 स्नान-दान समय
इस दिन प्रात:काल से ही गंगा स्नान और दान प्रारंभ हो जाता है. गंगा स्नान का शुभ समय सुबह 08 बजकर 51 मिनट से दोपहर 02 बजकर 02 मिनट तक है. इस दिन का शुभ समय यानि अभिजित मुहूर्त दिन में 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक है.
सिद्धि और रवि योग में गंगा दशहरा 2023
30 मई को गंगा दशहरा वाले दिन सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है. सिद्धि योग प्रात:काल से लेकर रात 08 बजकर 55 मिनट तक है. इस योग में किए गए कार्य सफल सिद्ध होते है. मंत्र और विद्या सिद्धि के लिए यह शुभ योग है.
गंगा दशहरा पर रवि योग पूरे दिन है. रवि योग में सूर्य देव का प्रभाव अधिक होता है. ऐसे में आप गंगा दशहरा पर स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें. आप पर सूर्य की कृपा होगी.
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शिव की जटा में क्यों समाईं गंगा?
राजा सगर के वंशज भगीरथ मां गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाना चाहते थे ताकि उनके 60 हजार पूर्वजों को मोक्ष मिल सके. उन्होंने कठोर तप से ब्रह्मा देव को प्रसन्न करके गंगा को पृथ्वी पर ले जाने का वरदान प्राप्त कर लिया. लेकिन समस्या तब खड़ी हो गई, जब ब्रह्म देव ने कहा कि पृथ्वी गंगा के वेग को सहन नहीं कर पाएगी. इससे प्रलय आ सकता है.
तब ब्रह्म देव के सुझाव पर भगीरथ ने कठोर तप से भगवान शिव को प्रसन्न किया ताकि गंगा पृथ्वी पर अवतरित होने से पूर्व उनकी जटाओं में उतरें और उनका वेग कम हो जाए. फिर वे आसानी से पृथ्वी पर अवतरित हों. भगवान शिव इसके लिए सहमत हो गए और उनको आशीर्वाद दे दिया. तब जाकर मां गंगा स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं में समा गईं और फिर पृथ्वी पर उतरीं.
गंगा दशहरा का महत्व
गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने मात्र से ही सात जन्मों के पाप मिट जाते हैं. इस बात का उदाहरण राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मिला मोक्ष है. इस वजह से ही मां गंगा को मोक्षदायिनी यानि मोक्ष प्रदान करने वाली कहा गया है.
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Tags: Dharma Aastha, Ganga
FIRST PUBLISHED : May 20, 2023, 09:36 IST









