
शिवम सिंह/भागलपुर. भागलपुर में वट सावित्री पूजा को लेकर मंदिरों व वट वृक्ष के नीचे सुहागिन महिलाओं की भीड़ उमड़ी. सज-संवर कर महिलाएं अलग-अलग इलाकों में वट वृक्ष की पूजा करती दिखाई दी. दरअसल वट सावित्री पूजा को लेकर सुहागन महिलाओं की यह मान्यता है की पूजा करने से पति की लंबी उम्र प्राप्त होती है. पति की लंबी उम्र की कामना लिए महिलाओं ने वट वृक्ष में कच्चा सूत बांधा. भागलपुर में भी महिलाओं में इसको लेकर खासा उत्साह देखा गया. आज वट सावित्री के व्रत पर शनि जयंती और ज्येष्ठ माह की अमावस्या भी है. इसलिए यह दिन बेहद खास है. वहीं महिलाओं ने बताया कि इस दिन वह अपने पति की दीर्घायु के लिए उपवास रखती हैं और इसके दूसरे दिन पानी के बाद भोजन ग्रहण कर व्रत खोलती है.
तिलकामांझी चौक स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी आचार्य रामाशंकर दुबे ने बताया की देश में आज वट सावित्री व्रत किया जा रहा है. ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत करने की परंपरा है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. वट के पेड़ की पूजा भी करती हैं. इस व्रत का महत्व करवा चौथ जैसा ही है. आइए आपको वट सावित्री व्रत की पूजन विधि, सामग्री, शुभ मुहूर्त और कथा के बारे में बताते हैं.हिंदू पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. इस बार अमावस्या तिथि की शुरुआत 19 मई को हुई. इसका समापन आज रात 09 बजकर 22 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, वट सावित्री व्रत इस बार 19 मई यानि आज ही रखा जा रहा है.
वट सावित्री व्रत का पौराणिक महत्व
आचार्य रामाशंकर दुबे ने बताया कि वट सावित्री व्रत का पौराणिक महत्व है.इस व्रत को करने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है. जिसके अनुसार, सावित्री ने अपनी सूझ-बूझ से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी. तभी से महिलाएं इस व्रत को करती आ रही हैं. दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं. साथ ही उसकी परिक्रमा करते हुए वृक्ष के चारों ओर मंगल धागा यानी कलावा बांधती हैं. हिंदू धर्म में वट के वृक्ष को पूजनीय माना गया है. इसमें त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास है.वट वृक्ष लंबे समय तक अक्षय रहता है, इसलिए इसे ‘अक्षयवट’ भी कहते हैं.
शनि जयंती पर विशेष पूजा का आयोजन
आचार्य रामाशंकर दुबे ने बताया कि शनि जयंती पर राज योगों को बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि ये व्यक्ति के लिए सुख-समृद्धि और सफलता लाते हैं. इस साल शनि जयंती तीन राज योगों के संयुक्त योग से मनाई जा रही है. इस वर्ष शनि जयंती पर शोभन योग , गज केसरी योग और शश योग का अद्भुत संगम बन रहा है. इस वर्ष शनि जयंती 19 मई 2023 शुक्रवार को है.शनि जन्य दोषों-कष्टों से मुक्ति के लिए लोग शनि जयंती के दिन उनकी विशेष पूजा करते हैं.
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Tags: Dharma Aastha
FIRST PUBLISHED : May 19, 2023, 20:36 IST








