पानी को लेकर छिड़ेगा ईरान-अफगानिस्तान में युद्ध? हेलमंड नदी का पानी है वजह

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पानी विवाद को लेकर ईरान और तालिबान में क्या युद्ध छिड़ सकता है! ईरान के राष्ट्रपति ने हेलमंड पानी समझौते पर तालिबान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी बातों को गंभीरता से लो ताकि तुम (तालिबान) बाद में शिकायत ना करो. इस पर जवाब में अफगानिस्तान के जनरल मोबिन ने एक बैरल पानी भरने का वीडियो जारी करते हुए ईरान के राष्ट्रपति से कहा- मिस्टर रायसी पानी का यह बैरल ले लो और हमला मत करो.

दोनों तरफ से इस प्रकार की बयानबाजी से संकेत लगाए जा रहे हैं कि ईरान और तालिबान के बीच पानी को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है और यह विवाद युद्ध का रूप ले सकता है. हालांकि, तालिबान प्रवक्ता ने ईरान को सार्वजनिक तौर पर ऐसे बयान ना देने की चेतावनी दी है.

बीते एक दशक में दो दिन पहले पाकिस्तान की अपनी पहली अधिकारिक यात्रा के दौरान पाकिस्तान पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने कहा कि हमारी सरकार ईरान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और हम अपने लोगों के अधिकारों का हनन नहीं होने देंगे. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि हेलमंड नदी समझौते के मुताबिक तालिबान सरकार सिस्तान और बलूचिस्तान के लोगों को पूरा पानी मुहैया कराए. इब्राहिम रायसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तालिबान उनकी बातों को गंभीरता से ले ताकि बाद में कोई शिकायत ना कर सके. उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान ईरानी हाइड्रोलॉजिस्ट को हेलमंद नदी के जल स्तर की जांच करने की अनुमति दे.

यह मामला तब तूल पकड़ गया जब अफगानिस्तान में तालिबानी प्रभाव वाले जनरल मोबिन ने एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो में जरनल मोबिन एक पीले बैरल में पानी भर रहे हैं और ईरान के राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि मिस्टर रायसी पानी का यह बैरल ले लो और हमला मत करो. इस वीडियो में एक और संदेश छुपा हुआ है कि तालिबान आत्मघाती और आईडी हमलों में पीले बैरल का इस्तेमाल करता है.

इसके बाद गुरुवार को देर शाम अफगानिस्तान और ईरान के बीच हेलमंड जल समझौते पर ईरान के राष्ट्रपति की टिप्पणी पर तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अंतरिम सरकार की तरफ से एक बयान जारी किया. तालिबान प्रवक्ता के इस बयान में ईरानी अधिकारियों को सार्वजनिक तौर पर ऐसे बयानों से परहेज करने की चेतावनी दी गई है. बयान में कहा गया है कि अफगानिस्तान संधि के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उनका देश गंभीर सूखे से पीड़ित है, जिसने अफगानिस्तान से ईरान को पानी की आपूर्ति सीमित कर दी है. बयान में यह आश्वासन भी दिया गया है कि अनेक दशकों से चले आ रहे इस मामले को सुलझाने के लिए जल्द ही ईरानी अधिकारियों को अफगानिस्तान बुलाया जाएगा.

मध्य पूर्व के गर्म और उनके क्षेत्र में बसे ईरान में हर साल औसत से भी कम वर्षा हो पाती है और उसमें भी बरसात का ज्यादातर पानी भाप बनकर उड़ जाता है. दोनों देशों की सीमा पर बसे इलाकों के लिए हेलमंद नदी जीवनदायिनी है. जलवायु परिवर्तन की वजह से इस नदी का क्षेत्र सिमट रहा है जिससे ईरान के सिस्तान-बलोचिस्तान प्रांत में जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. हेलमंद नदी ईरान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के केंद्र में भी है. सन 1973 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत अफगानिस्तान को हर साल ईरान को 820 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी देना है.

Tags: Afghanistan, Afghanistan news, Iran, Iran news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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