मल में खून आए तो हो जाएं अलर्ट, इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज का हो सकते हैं शिकार, 5 लक्षण कभी न करें इग्नोर

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हाइलाइट्स

अल्सरेटिव कोलाइटिस इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज का ही एक टाइप है.
आंत से जुड़ी यह बीमारी कई लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

Inflammatory Bowel Disease: दुनियाभर में करोड़ों लोग इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) से जूझ रहे हैं. अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. इस डिजीज के लक्षण बेहद सामान्य होते हैं और कई लोग इस बीमारी को नजरअंदाज करते रहते हैं. ऐसा करना जानलेवा भी हो सकता है. ये दोनों ही कंडीशन आंत्र से जुड़ी होती हैं और लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. इन बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 19 मई को वर्ल्ड इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज डे (World IBD Day) मनाया जाता है. इस खास मौके पर आपको बताएंगे कि IBD डिजीज क्या होती है और इसके क्या लक्षण होते हैं.

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) के अनुसार इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज पाचन तंत्र के ऊतकों में क्रॉनिक सूजन से जुड़े डिसऑर्डर को कहा जाता है. इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज टर्म आमतौर पर क्रोहन डिजीज (Crohn’s Disease) और अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) कंडीशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. क्रोहन डिजीज IBD का एक टाइप है, जिससे पीड़ित होने पर आपके डाइजेस्टिव ट्रैक्ट की लाइनिंग में सूजन आ जाती है, जो गहरी परतों तक पहुंच सकती है. यह डिजीज छोटी आंत को प्रभावित करती है. यह बड़ी आंत और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को भी प्रभावित कर सकती है. अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) की कंडीशन में लोगों की बड़ी आंत (Colon) और मलाशय (Rectum) में सूजन और अल्सर हो जाते हैं.

बाउल डिजीज के लक्षण

– लगातार दस्त होना
– पेट में दर्द होना
– मलाशय से रक्तस्राव/खूनी मल
– अचानक वजन घटना
– अत्यधिक थकान

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IBD की वजह और इलाज

इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज के सटीक कारण का अब तक पता नहीं लग सका है, लेकिन जानकारों की मानें तो कमजोर इम्यून सिस्टम, जेनेटिक कंपोनेंट और फैमिली हिस्ट्री जैसे कारणों से यह बीमारी हो सकती है. इस बीमारी का पता ब्लड और स्टूल टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है. इलाज की बात करें, तो इस बीमारी को दवाओं के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन कई बार डैमेज गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को सर्जरी के जरिए हटाया जाता है. मरीज की कंडीशन के अनुसार इसका इलाज किया जाता है.

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Author: Up Head Line

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