आज है ज्येष्ठ अमावस्या, जान लें शुभ मुहूर्त, स्नान-दान और पूजा विधि, पितरों की कृपा से चमकेगा भाग्य

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हाइलाइट्स

आज के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद पितरों की पूजा करते हैं.
ज्येष्ठ अमावस्या पर शोभन योग के साथ ही शश और गजकेसरी योग भी बने हैं.

ज्येष्ठ अमावस्या का पावन पर्व आज 19 मई को है. आज के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद पितरों की पूजा करते हैं और उनके निमित्त दान करते हैं. आज का दिन धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज शनि जयंती और वट सावित्री व्रत है. इसके अलावा आज रुद्राभिषेक के लिए शिववास भी है. ज्येष्ठ अमावस्या पर शोभन योग के साथ ही शश और गजकेसरी योग भी बने हैं. जो लोग पितृ दोष से मुक्ति चाहते हैं, वे पितरों का श्राद्ध या पिंडदान भी कर सकते हैं. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कृमार भार्गव से जानते हैं ज्येष्ठ अमावस्या के स्नान-दान मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में.

ज्येष्ठ अमावस्या 2023 शुभ मुहूर्त और योग
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का शुभारंभ: 18 मई, रात 09 बजकर 42 मिनट से
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का समापन: आज, 19 मई, रात 09 बजकर 22 मिनट पर
स्नान और दान का शुभ समय: सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 35 मिनट तक
आज का अभिजीत मूहूर्त: सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक
रुद्राभिषेक का समय: आज सुबह से लेकर रात 09 बजकर 22 मिनट तक

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ज्येष्ठ अमावस्या 2023 स्नान-दान और पूजा विधि
आज प्रात: दैनिक क्रिया से निवृत होने के बाद किसी पवित्र नदी में स्नान कर लें या घर पर नहाने के पानी में गंगाजल डाल लें और स्नान करें. स्नान के बाद ही अंगुली में कुश से बनी पवित्री धारण करके जल से अपने पितरों का तर्पण करें. इससे आपके पितरों की आत्माएं तृप्त हो जाएंगी. इसके बाद सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें.

पितरों के देवता अर्यमा की पूजा करने से भी पितर प्रसन्न होते है. अर्यमा को पितर लोक का अधिपति माना जाता है. इसके बाद पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें. उसकी जड़ को पानी से सीचें. दीप जलाएं. आज शनि जयंती भी है. इसलिए शनि देव की भी पूजा विधिपूर्वक कर लें.

पूजा करने के बाद अपने पितरों के लिए आप किसी गरीब ब्राह्मण को वस्त्र, फल, अनाज आदि का दान करें. दक्षिणा देकर खुशीपूर्वक विदा करें. इस प्रकार किया गया दान पितरों को प्राप्त होता है. वे प्रसन्न होकर अपने वंश को आशीर्वाद देते हैं. इससे आपका भाग्य प्रबल होगा. धन, सुख, वंश आदि में वृद्धि होगी.

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ज्येष्ठ अमावस्या 2023 पिंडदान या श्राद्ध का समय
ज्येष्ठ अमावस्या पर आप दिन में 11:00 बजे से पितरों के लिए पिंडदान या श्राद्ध कर्म कर सकते हैं. दोपहर में 02:30 बजे से 03:00 बजे तक इसको खत्म कर देते हैं. पिंडदान, श्राद्ध और पंचबली कर्म से पितर प्रसन्न होते हैं.

Tags: Religion

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Author: Up Head Line

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