
अंतरिक्ष अनुसंधान में अब भारत का योगदान भी बढ़ने लगा है. इसमें लद्दाख के हनले में स्थित खगोलीय वेधशाला भी दुनिया के अन्य इलाकों में स्थिति टेलीस्कोप के साथ मिल कर आंकड़े जुटाने में सहायता कर रहा है. इसके अलावा अब भारतीय वैज्ञानिकों के भी इस क्षेत्र में शोधकार्य सामने आने लगे हैं. इस कड़ी में भारतीय वैज्ञानिक की अगुआई में हुए एक नए शोध में हनले वेधशाला और दुनिया के 10 टेलीस्कोप की मदद से ब्रह्माण्ड का सबसे ऊर्जावान पिंड देखा गया है जो बहुत ही चमकीली और शक्तिशाली गैलेक्सी है जिससे उच्च ऊर्जा के विकिरण निकल रहे हैं.
क्या है ये पिंड
इस शोध में वैज्ञानिकों ने बीएल लैसर्टे (बीएल लैक) की चमक को विशेष तौर पर अवलोकित किया गया है. जो पृथ्वी से 95 करोड़ प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है. ब्लेजर खास तरह की गैलेक्सी होती है जिसे एक बहुत शक्तिशाली ब्लैक होल ताकत देने का काम करता है. इससे इस तरह के पिंड ब्रह्माण्ड के सबसे चमकीले और शक्तिशाली पिंड बन जाते हैं.
असामान्य चमक से हैरत
ब्लेजर को अति उच्च ऊर्जावान कणों को उत्सर्जित करने वाले पिंडों में गिना जाता है जिसें गामा विकिरण, एक्स विकिरण और रेडियो तरंगें शामिल हैं. यह अध्ययन भारत के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट में पोस्ट डॉक्टोरल फैलो अदिति अग्रवाल की अगुआई में टीम ने इस बीएल लैक ब्लेजर का अध्ययन किया है जिसकी असामान्य चमक वैज्ञानिकों को हैरत में डाल रही है.
भारतीय वैज्ञानिक ने किया अध्ययन
बीएल लैक ब्लेजर की असामान्य चमक वैज्ञानिकों को हैरत में डाल रही है. इस पिंड को करीब एक सदी पहले ही सबसे पहले देखा गया था और तभी से यह धीरे धीरे अपनी शीर्ष चमक की स्थिति की ओर बढ़ रहा है. ये बहुत ही संकुचित तरह के संचरनाएं होती हैं जिनमें समय समय पर विसंगति पूर्ण चमक देखने को मिलती हैं.








