
सुमित भारद्वाज/पानीपत. हरियाणा सरकार और प्रदेश के शिक्षा मंत्री हरियाणा के स्कूलों में बेहतर सुविधाओं और अच्छी शिक्षा के दावे करते नहीं थकते. जबकि कई जगहों पर हालात इन दावों से इतर हैं. हालत इतने बदतर हैं कि यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि क्या वाकई ये उस हरियाणा का स्कूल है? जिसके बारे में विकास और सुविधाओं के आसमान जितने ऊंचे वादे किए जाते हैं. अब आप पानीपत के वॉर्ड-26 के हरिनगर स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल को ही देख लीजिए जहां छोटे-छोटे बच्चों को 41 डिग्री की धूप में स्कूल की छत पर पढ़ना पड़ रहा है.
हरिनगर स्थित सरकारी प्राइमरी में बच्चों को एक लोहे की जर्जर चद्दर की छांव का ही सहारा है. जिस गर्मी में कोई चंद मिनट नहीं खड़ा हो सकता. उस गर्मी में ये बच्चे रोज़ सात घंटे बिताते हैं. स्कूल करीब 200 गज का है और इसी में मंदिर भी है. सिर्फ दो कमरों में सिमटे स्कूल में 350 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई करने आते हैं. यहां मिड-डे-मील तक शौचालयों के पास बनता है. स्कूल के बरामदे में एक साथ तीन से चार कक्षाएं चलती हैं. जिसकी वजह से न तो ये मासूम पढ़ पाते हैं और न अध्यापक इनको पढ़ा पाते हैं.
छत पर पढ़ाई करने को मजबूर
इस स्कूल की सच्चाई से तो अधिकारी और नेता सब वाकिफ हैं, लेकिन इनकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आना चाहता. एक तरफ तो शहर को सुंदर दिखाने के लिए करोड़ों रुपये के स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं लेकिन दूसरी ओर इन मासूम बच्चों की छत तक कोई बनाने को तैयार नहीं है. हमारी टीम ने जब इस स्कूल की स्थिति को देखा तो दृश्य हैरान कर देने वाले थे. पांचवीं तक के इस स्कूल में छोटे बच्चों की संख्या ज्यादा हैं. बच्चे नीचे के दो कमरे और बरामदे में बैठाने के बाद भी बच जाते हैं. उनकी एक कक्षा छत पर लगती है. यहां लोहे की जर्जर चद्दर है. इसमें भी बड़े बड़े छेद हैं. इनमें से सूरज की किरणें झुलसा देने वाली हैं. इस छत पर गर्मी और लू चलने की वजह से आम आदमी कुछ देर तक भी ठहर नहीं सकता और ये मासूम सुबह 8 से लेकर दोपहर दो बजे तक यहां पढ़ते हैं.
स्कूल में खेल का मैदान तक नहीं
स्कूल के लंच टाइम में बच्चों के लिए खेलने का प्रांगण नहीं है, इसलिए ये बच्चे छत पर ही खेलते दिखाई दिए. तपती धूप में मिड-डे-मील खाने के लिए कुछ बच्चे साथ की दीवारों की छांव में बैठे दिखाई दिए. छत पर ही साथ वाली दीवारों पर इनके पेंट किए ब्लैक बोर्ड और पढ़ने के अक्षर अंकित थे. वहीं, एक टूटा ब्लैक बोर्ड ईंटों पर रखा था. नीचे मिड-डे-मील तो बन रहा था लेकिन ये मील शौचालयों के बिल्कुल पास था. स्कूल में बच्चों के लिए खेलने की तो दूर बैठने की भी जगह कम थी. स्कूल इंचार्ज राकेश ने बताया कि काफी समय पहले मुख्यमंत्री ने अनाज मंडी में आयोजित एक कार्यक्रम में इस स्कूल को नई जगह अलॉट करने के लिए सवा एकड़ जमीन और बनाने के लिए ग्रांट की घोषणा की थी.उस समय तत्कालीन उपायुक्त अजीत बालाजी जोशी थे. उन्होंने जमीन की निशानदेही भी करवाई लेकिन इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई.
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FIRST PUBLISHED : May 17, 2023, 20:46 IST








