
अंकित कुमार सिंह/सीवान. बिहार के सीवान में स्थित सहकारी सुता मिल के कर्मचारी बिहार सरकार की अनदेखी और ढुल मुल रवैया की वजह से आज भुखमरी के कगार पर पहुंच गए. स्थिति आज ऐसी हो गई है कि उन्हें अपना घर परिवार चलाना तक मुश्किल हो गया है. आज के वक्त में जैसे तैसे इन मजदूरों की जिंदगी कट रही है.
वहीं मिल में काम करने वाले मजदूर आज भी बकाया वेतन की आस में मिल परिसर में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो बकाया वेतन मिल रहा है. न ही सरकार ने मिल बंद होने के बाद उनके लिए कोई इंतजाम किया है. इनके पास अब ना तो रोजगार का साधन रहा और ना ही सरकार से कोई आस.
एक-एक पाई के लिए मोहताज मजदूर
दरअसल, सरकार की ओर से अब मिल परिसर खाली करने का भी आदेश जारी कर दिया गया है. इन मजदूरों के पास ना तो कोई जमीन है और ना ही अपना घर. ऐसे में स्टाफ क्वाटर ही एकमात्र सहारा है. लिहाजा सरकार के आदेश के बाद मजदूरों का कहना है कि अगर सरकार ने उनसे जमीन भी खाली करवा ली तो उनके पास कोई चारा नहीं बचेगा. ऐसे में मजदूर अपना पेट पाले कि जमीन खरीद कर मकान बनाए, यह सवाल खड़ा हो गया है. मजदूरी कर अपना परिवार चलाने वाले मजदूर आज पाईपाईके मोहताज हो गए हैं.
1982 में हुई थी मिल बनने की शुरुआत
मजदूरों से मिली जानकारी के अनुसार सहकारी सूत मिल 1982 में बनना शुरू हुआ और 1986 में बनकर तैयार हो गया. 5 टर्म में कर्मियों की नियुक्ति हुई. 1986 में ही पहली बार यहां पर 86 मजदूरों की बहाली हुई. नियुक्ति के बाद 1995 में दूसरी बार 208 मजदूरों को नियुक्त किया गया. तीसरी बार 95 मजदूरों को और इसके बाद 148 मजदूरों की नियुक्त किया गया. जब मिल बंद हुई. उस समय कुल 537 मजदूर काम कर रहे थे.
बुनकरों की अच्छी संख्या होने की वजह से हुआ था स्थापित
सीवान में सूत मिल की इसलिए स्थापना की गई थी कि जिले में बुनकरों की अच्छी-खासी संख्या है जो हैंडलूम और पावरलूम पर चादर, तौलिया, लुंगी, बेडशीट, साड़ी बनाने का काम करते थे. इस सूत मिल में रुई से धागा तैयार किया जाता था. रुई असम से आती थी और यहां तैयार धागा सीवान के बुनकर ले जाते थे. साथ ही यहां बना धागा दिल्ली, कोलकाता और यूपी के खलीलाबाद तक जाता था.
बुनकरों द्वारा तैयार कपड़ों की मांग गिरते जाने से उन्हें दूसरे कामों की तरफ रुख करना पड़ा. इससे धागे की मांग में गिरावट आई. सूत मिल द्वारा तैयार धागा बिक नहीं पा रहा था. इससे सूत मिल लगातार घाटे में जाती गई.
कभी भी पूरी क्षमता से नहीं चलाई गई मिल
दरअसल, सूत मिल कभी अपनी पूरी क्षमता से नहीं चली. सूत मिल में 52 रिम-फ्रेम लगे थे. यदि यह पूरी क्षमता से चलती तो. यहां 1,500 मजदूरों को काम मिलता,लेकिन यह हमेशा 26 रिम-फ्रेम पर ही चला. इस कारण यहां मिल अपनी क्षमता से आधा उत्पादन ही करती थी. इसे चलाने में तीन करोड़ की पूंजी की जरुरत थी. लेकिन स्टेट सरकार ने यह भी नहीं दिया.
वहीं सूत मिल को आज तक घोषित रूप से बंद नहीं किया गया है. कभी नोटिस नहीं लगाया कि कच्चे माल या पूंजी के अभाव में इस सूत मिल को बंद किया गया. न लोगों को रिटायर किया न हिसाब किया गया. कई मजदूर रिटायरमेंट होने के कगार पर हैं. जबकि कुछ मजदूरों की मौत भी हो गई है.
कहते हैं उद्योग विभाग के जीएम
जिला उद्योग केंद्र सीवान के महाप्रबंधक प्रवीर कुमार ने बताया कि नोटिस देने व हटाने को लेकर जो मामले सामने आए हुए हैं, उससे हम लोगों का कोई लेना देना नहीं है. कंपनी के निकल्वेटर पटना के द्वारा ही निर्देश दिया गया है और वही इसमें कुछ भी विशेष जानकारी दे सकते हैं. एक्शन लेने का अथॉरिटी उनको व कम्पनी के जीएम को ही है.
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FIRST PUBLISHED : May 17, 2023, 14:34 IST








