
अनूप पासवान/कोरबा. शासन की बागडोर किसी भी राजनीतिक दल के हाथ हो, चुनावी वर्ष के आते ही सौगातों की बौछार शुरू हो जाती है. फिर चुनाव में हार जीत का फैसला होते ही वादे भुला दिए जाते हैं. ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने लाखों की लागत से बनने वाले स्कूल की बाउंड्री वॉल का शिलान्यास तो कर दिया, लेकिन चुनाव को साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा होना तो दूर शुरू नहीं हो सका. अब इसका खामियाजा स्कूल में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है. स्कूल में जहरीले और हिंसक जीव जंतुओं का खतरा बना रहता है.
शहर से दूर जंगल के करीब जिला जेल के पीछे वार्ड क्रमांक 31 खरमोरा स्थित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल है. भाजपा शासन काल में शिक्षा के स्तर मे सुधार के लिए कई योजनाएं शुरू की गई थी. इन योजनाओं में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा भी शामिल था. इसके लिए शासन ने वर्ष 2016 में डीएवी स्कूल प्रबंधन को बागडोर सौंपी दी. शासन से हरी झंडी मिलते ही लाखों की लागत से बने भवन में स्कूल का संचालन शुरू किया गया.
विद्यालय में बेहतर शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियां संचालित होने लगीं, जिससे अभिभावकों का रुझान डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल की ओर बढ़ता गया. जिससे छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती गई. वर्तमान में डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल की दर्ज संख्या करीब 500 है, जिसमें केजी वन से कक्षा 12वीं के छात्र-छात्रा शामिल हैं. इन छात्र-छात्राओं के अलावा शिक्षक शिक्षिकाओं को बेहतर भवन होने के बावजूद समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
11 एकड़ में फैला है स्कूल
दरअसल, 11 एकड़ में फैले स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल की कमी बनी हुई है. बताया जा रहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह दौरे पर पहुंचे हुए थे. इस कार्यक्रम में तत्कालीन सांसद के अलावा संसदीय सचिव सहित अन्य जन प्रतिनिधि शामिल थे. उनकी मौजूदगी में 19 सितंबर 2018 को डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के बाउंड्रीवाल का शिलान्यास कराया गया था. इस दौरान अफसरों ने जल्द ही बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाने की बातें कही थी. स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल निर्माण को हरी झंडी मिलने से प्रबंधन ने राहत महसूस की थी, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया.
असामाजिक तत्वों का लगता है जामवड़ा
बाउंड्रीवाल के शिलान्यास को करीब साढ़े चार साल बीत गए, इन बीते सालों में निर्माण कार्य पूर्ण होना तो दूर शुरू नहीं हो सका. जिसका खामियाजा स्कूल में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के अलावा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है. सूनसान और जंगल के करीब होने के कारण स्कूल में जहरीले जीव-जंतु तो प्रवेश करते ही हैं, हिंसक वन्य प्राणियों के पहुंचने का भी खतरा बना रहता है. इसके अलावा शाम ढलने के बाद असामाजिक तत्वों का स्कूल के आसपास जमावड़ा लग जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 16, 2023, 18:53 IST








