गायत्री जयंती 31 मई को, हरिद्वार के पंडित से जानें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी की पूजा का लाभ

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ओम प्रयास/हरिद्वार. ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को हर साल गायत्री जयंती पर्व बड़े उत्साह के साथ पूरे विश्व में मनाया जाता है. पूरे विश्व में गायत्री माता को मानने वाले लोग रहते हैं, जो हर साल गायत्री माता की ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को पूजा पाठ, जप-तप करते हैं. साल 2023 में 31 मई को गायत्री जयंती का पर्व मनाया जाएगा.

गायत्री जयंती का पर्व हर साल गंगा दशहरे से अगले दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाने का विधान है. कहा जाता है कि गायत्री माता वेदों की जननी है. गायत्री माता की जयंती पर उनकी पूजा-अर्चना करने से ज्ञान की वृद्धि होने के साथ-साथ मान सम्मान, मान प्रतिष्ठा और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. हिंदू धर्म में गायत्री माता को ज्ञान की देवी कहा गया है. ज्ञान की देवी का वरदान प्राप्त करने के लिए सनातन धर्म से जुड़े लोग गायत्री जयंती पर उनकी पूजा-अर्चना और गायत्री मंत्र का जाप करते हैं.

ज्योतिष शास्त्र के जानकार पंडित शक्तिधर शास्त्री ने बताया कि जेष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को गायत्री जयंती का पर्व पूरे देश में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है. गायत्री जयंती को देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में सनातन धर्म के लोग मनाते हैं. हर साल गायत्री जयंती का पर्व गंगा दशहरे के अगले दिन निर्जला एकादशी को मनाया जाता है. गायत्री माता ज्ञान की देवी हैं. गायत्री जयंती मनाने का उद्देश्य महत्त्वपूर्ण इसीलिए है कि गायत्री माता सिद्धि प्रदाता हैं. ज्ञान, बुद्धि, विवेक, शिक्षा समृद्धि और धन को देने वाली हैं.

शक्तिधर शास्त्री बताते हैं कि जो भी व्यक्ति गायत्री माता की आराधना, पूजा-पाठ, अनुष्ठान, गायत्री माता के निमित्त हवन, जप-तप और गायत्री मंत्र का महाजाप करता है, उसे कई हजार अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. साथ ही वह अगले जन्म में वैकुंठ धाम में जाता है जिसका वर्णन कई धार्मिक ग्रंथों में है. गायत्री जयंती के दिन गायत्री मंत्र जाप करने का विशेष महत्त्व होता है, कहा जाता है कि गायत्री जयंती के दिन बहुत से धार्मिक अनुष्ठान हिंदू धर्म में किए जाते हैं, जिससे कई फलों की प्राप्ति होती है.

Tags: Dharma Aastha, Haridwar news, Nirjala Ekadashi

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Author: Up Head Line

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