What does Science Say do Astronauts need sunscreen in space

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हाइलाइट्स

अंतरिक्ष में सौर विकरण का खतरा पृथ्वी से ज्यादा होता है.
वहां भारी और विशेष तरह के स्पेस सूट हमें हानिकारक विकिरण से बचाते हैं.
पृथ्वी की तरह सनस्क्रीन का अंतरिक्ष या चंद्रमा पर उपयोग एक संभावना है.

अंतरिक्ष धीरे धीरे पर्यटन उद्योग में बदलने वाला है. जिस तरह से इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार देखने को मिल रहा है, वह दिन दूर नहीं कि अंतरिक्ष के लिए भी नियमित उड़ाने देखने को मिलेंगे. मानव शरीर को धरती पर पराबैगंनी और अंतरिक्ष विकरण की आदत नहीं होती है. खुद पृथ्वी पर हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से बचान के लिए लोग सनस्क्रीन का उपयोग करते हैं. ऐसे में एक साधारण सा प्रश्न मन में उठता है कि क्या अंतरिक्ष में यात्रियों को सनस्क्रीन की जरूरत होती है या भविष्य में बढ़ती अंतरिक्ष यात्राओं में सनस्क्रीन की मांग नहीं बढ़ेगी? आइए जानते हैं कि इस बारे में क्या कहता है विज्ञान?

क्या हुआ था चंद्रमा की पहली यात्रा पर
जब नासा की ओर से नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था, तब वे अपने अंतरिक्षयान के अंदर के सुरक्षा कवच से बाहर थे.  उन्होंने एक खास तरहका स्पेस सूट पहन रखा था, और सिर पर बुलबुरे के आकार का एक पारदर्शी हेलमेट पहना हुआ था जिससे वे बाहर का नजारा देख सकते थे. लेकिन भविष्य में अंतरिक्ष या चंद्रमा पर पहुंचने वाले लोगों को जब वे चंद्रमा के वातावरण में काम करेंगे तो क्या होगा.

अंतरिक्ष में हानिकारक विकिरण
अंतरिक्ष से आने वाली सौर विकिरण और अंतरिक्ष विकिरण में पराबैगनी और अन्य हानिकारक  विकिरण होते हैं. पृथ्वी के वायुमडंल की ओजन परत इन हानिकारक विकिरणों, खास तौर पर पराबैंगनी किरणों, को रोकने का काम करती है जिससे उनका पृथ्वी के प्राणियों पर असर नहीं होता.

कितने हानिकारण हैं ये विकिरण
पराबैंगनी विकिरण विद्युतचुंबकीय तरंगे होती हैं. वास्तव में इनका कुछ हिस्सा पृथ्वी तक भी पहुंचता है और इनका कुछ ही हद तक का सामना शरीर के लिए अच्छा भी होता है. बी प्रकार की पराबैंगनी किरणों से मानव त्वचा में विटामिन डी3 का निर्माण होता है, लेकिन इसका अधिक अवशोषण, डीएनए को खराब कर देता है जिससे त्वचा के केंसर की संभावना पैदा हो जाती है. वहीं सूर्य की सामान्य किरणों का ज्यादा सामना भी सनबर्न जैसी समस्या होती है.

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फिलहाल अंतरिक्ष में खास तरह के स्पेससूट ही हानिकारक विकिरणों से रक्षा करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मानव और पराबैंगनी किरणें
बी प्रकार की पराबैंगनी किरणों अलावा ए और सी प्रकार की पराबैगनी विकिरण भी होते हैं. इनमें से सी प्रकार की पराबैंगनी विकिरण मानव के लिए बहुत ही खतरनाक मानी जाती हैं. लेकिन दोनों ही पृथ्वी की सतह तक नहीं पहुंच पाती है. लेकिन यूवी बी पृथ्वी पर काफी मात्रा में आती हैं. पृथ्वी पर त्वचा की रक्षा के लिए सनस्क्रीन एक अच्छा उपाय है.

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भारी भरकम स्पेससूट और सनस्क्रीन
ऐसे में जब  हम चंद्रमा की सतह पर रहेंगे और काम करेंगे तो क्या हम भारी भरकम सूट और हेलमेट के साथ काम कर पाएंगे? क्या ऐसे में सनस्क्रीन हमारे लिए किसी तरह का समाधान नहीं हो सकती है. क्योंकि चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है और वहां पराबैंगनी विकिरण सहित अन्य विकिरण भी बेरोकटोक पहुंचता है. तो फिर वहां भारी भरकम स्पेससूट का ही उपयोग हमेशा उपयुक्त विकल्प कैसे होगा.

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पृथ्वी पर सनस्क्रीन हानिकारक विकिरणों से बचाने के लिए बहुत उपयोगी होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

जरूरत पड़ भी सकती है शायद
स्पेस सूट के रहते तो सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होगी.  यही वजह है कि अब तक चंद्रमा पर गए और अंतरिक्ष में स्पेसवॉक करने वाले यात्रियों को कभी सनबर्न नहीं हुआ. इसका केवल एक ही अपवाद है जब जैमनी 9 चालक दल के एक सदस्य को सौर विकरण का सामना करना पड़ा था. खुद चंद्रमा पर छह अमेरिकी झंडे लगे हैं और दो साल पहले चीन का भी झंडा लगाया गया है. विशेषज्ञ मानते हैं के दशकों से अंतरिक्ष और सौर विकिरणों का सामना कर रहे अमेरिकी झंडे का रंग उड़ गया होगा.

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ऐसे में सनस्क्रीन की उपयोगिता को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन अभी शायद हमें स्पेस सूट के बिना चंद्रमा पर काम करने के लिए तैयार नहीं हैं. इसके अलावा खुले चंद्रमा में रोबोट भी इंसानों की तरह काम कर वहां हमारी मदद कर सकते हैं और फिर एक बार संरक्षित इमारत आदि बनने पर हमें वहां से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी. ऐसा ही कुछ हम गर्मियों में पृथ्वी पर भी करने लगे हैं. इसके अलावा हमें चंद्रमा पर उन्नत किस्म की सनस्क्रीन की जरूरत होगी जो अभी शायद तैयार नहीं हुई है.

Tags: Moon, Research, Science, Space

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Author: Up Head Line

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