
नई दिल्ली. 2017 में जब केरल में धर्मांतरण के मामलों की गूंज सुनाई देने लगी और एक के बाद एक केस आने लगे तो तत्कालीन राष्ट्रीय महिला आयोग ने ऐसे मामलों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई और उस कमेटी ने जब जांच करके रिपोर्ट सौंपी तो जो सच सामने आया उसने आतंकवाद के एक नये, लेकिन भयावह रूप को सामने रखा. सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट ‘दि केरला स्टोरीट मूवी से ज्यादा ही भयावह है.
मूवी में तो केवल तीन केस ही दिखाए गए हैं, उस रिपोर्ट में ऐसे तमाम केस हैं जो डराने के लिए काफ़ी हैं.
इस कमेटी में अध्यक्ष रेखा शर्मा के अलावा आयोग की सदस्य व केरल हाईकोर्ट की वकील कृष्णादास पी नायर के अलावा कानूनी सलाहकार के तौर पर गीता राठी सिंह भी शामिल थीं. 5 नवम्बर 2017 को ये टीम कोच्चि पहुंची और धर्मांतरण या कहें लव जिहाद के एक मामले में कोच्चि में एक पीड़ित लड़की से मिली. हालांकि स्थानीय मीडिया ने आरोप लगाया कि लड़की के माता-पिता उसके साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं, लेकिन लड़की से जब आयोग की टीम मिली तो उसने इस आरोप से साफ इनकार कर दिया.
7 नवम्बर को टीम कोझिकोड पहुंची, जहां ऐसी कई पीड़ित लड़कियों से टीम मिली और उन सबकी शिकायतें सुनीं. 8 नवम्बर को तिरुवनंतपुरम में उस लड़की की मां से टीम मिली, जिसे मूवी में नर्सिंग स्टूडेंट के तौर पर शालिनी नाम से दिखाया गया है और उसका रोल अदा शर्मा ने किया है. इस रिपोर्ट में लिखा है कि शालिनी (फिल्मी नाम) ने अपना एमबीबीएस पूरा कर लिया था, पढ़ाई के दौरान ही उसकी दोस्ती डॉक्टर बेक्सन (रिपोर्ट में लिखा नाम), उसे तिरुवनंतपुरम के सलाफी सेंटर ले गई, जहां उसका धर्मान्तरण किया गया और उसे एक नया नाम दे दिया गया, फातिमा, यही नाम अदा शर्मा के किरदार को भी धर्मांतरण के बाद मूवी में मिला है.
कई और लड़कियों के साथ बाद में उसे अफगानिस्तान ले जाया गया, उसके बाद उसकी मां ने राष्ट्रीय महिला आयोग को शिकायत दी. उस शिकायत तक शायद फातिमा का पता नहीं चला था, लेकिन डेढ़ साल उसे गायब हुए हो गए थे. लेकिन पीड़िताओं और सामाजिक संस्थाओं से बात करते हुए कमेटी को लगा कि कुछ ‘सोशल टर्मोइल’ भी है, इसलिए मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए आयोग की टीम ने ये मामला केरल के डीजीपी के सामने उठाना उपयुक्त समझा. तब आयोग की टीम पुलिस हेडक्वार्टर में डीजीपी के साथ-साथ कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिली. इस मुलाकात के दौरान उन्हें जो 11 शिकायतें कई पक्षों से मिली थीं, उनको डीजीपी के हवाले कर दिया ताकि उन पर उपयुक्त एक्शन लिया जा सके.
सूत्रों के मुताबिक कमेटी ने अपनी जो रिपोर्ट आयोग को सौंपी, उसकी शुरूआती लाइनों में ही ‘हिंद स्वराज’ में लिखी गांधीजी की 1908 की कुछ लाइनों को लिया गया है. रिपोर्ट में शुरूआत में ही लिखा गया है कि, “धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा हमारे संवैधानिक दर्शन में निहित है, धर्मनिरपेक्षता के प्रति हमारी संवैधानिक प्रतिबद्धता हमारी आजादी के लड़ाई से निकलकर आई है”. इसके बाद रिपोर्ट में 1908 में हिंदी स्वराज में लिखी गांधीजी की लाइनों का संदर्भ दिया गया है, “India cannot cease to be one nation, because people belonging to different religions live in it.. in no part of the world are one nationality and one religion synonymous terms, nor has it ever been in India”. दरअसल ये लाइन गांधीजी के पूरे जवाब की पहली और आखिरी लाइनें जो डॉट्स के जरिए इस रिपोर्ट में अलग अलग की गई हैं. दरअसल गांधीजी से सवाल पूछा ये गया था, “I am impatient to hear your answer to my question. Has the introduction of Mahomedanism not unmade the nation?”
फिर इस टीम ने संविधान की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए अपनी रिपोर्ट कई बिंदुओं में लिखी है. अपने पहले ही बिंदु में आयोग की टीम ने साफ लिखा है कि “ये पाया गया कि केरल में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण का ट्रेंड उभरकर सामने आ रहा है”, हालांकि उन्हें बताया गया है कि राज्य की सरकार द्वारा हर धर्मांतरण केस का आधिकारिक रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है. दूसरे बिंदु में लिखा गया है कि, “अंर्तजातीय विवाहों का चलन इस राज्य में कोई नया नहीं है, जिसे मल्टी कल्चरल और मल्टी रिलीजियस समाज बोला जाता रहा है. फिर भी धर्मांतरण का ट्रेंड हाल ही में उभर के सामने आया है, जो प्रथम दृष्टया योजना बद्ध और साजिशन लगता है”.
सूत्रों कि मानें तो इस रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि केरल में इन दिनों बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो रहा है, और इस धर्मांतरण के केसों में एक जैसा पैटर्न देखने में आ रहा है. पहला ये कि इन लोगों के टारगेट पर पढ़ी लिखी युवतियां हैं, खासतौर पर मेडिकल व इंजीनियरिंग में पढ़ने वालीं. दूसरा तथ्य ये कि इन लड़कियों को शुरूआत में उनके साथ की ही लड़कियां अपने धर्म से परिचय करवाती हैं और धीरे धीरे उन्हें ये विश्वास दिलाती हैं कि कैसे उनका धर्म उनके टारगेट पर जो लड़की है, उससे बेहतर है. इसका तीसरा पायदान ये होता कि उस लड़की को अपने धर्म का साहित्य (या उपदेश) दिया जाता है, जो किताबों या सीडी आदि की शक्ल में होता है.
जब ये लड़कियां उनके धर्म और उसके उपदेशों, शिक्षाओं के साथ सहज हो जाती हैं, उनको औपचारिक धर्मांतरण के लिए धार्मिक प्रशिक्षण के केन्द्रों में भेज दिया जाता है. टीम ने लिखा है कि ये बात उल्लेखनीय है कि ये सब उस लड़की के माता पिता की जानकारी में आए बिना किया जाता है. इस रिपोर्ट में लिखा गया था कि इसके बाद उनके लिए उसी धर्म का लड़का सुझाकर अक्सर उसी प्रशिक्षण केन्द्र में निकाह भी पढ़वा दिया जाता है, ऐसे दो केसों का हवाला इस रिपोर्ट में दिया गया है.
इस रिपोर्ट में ऐसी घटनाओं की तरफ भी इशारा किया गया था कि जहां लड़के लड़कियों के लिए हनी ट्रैप बिछाते हैं, लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर धर्मांतरण के लिए मजबूर करते हैं. लड़कियां जब लड़कों से इमोशनली अटैच्ड हो जाती हैं, अक्सर शादी के लिए धर्मांतरण की शर्त रख दी जाती है. ऐसा लगता है इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर फिल्म ‘दी केरला स्टोरी’ की कहानी रची गई है.
इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि कोच्चि में मिली कुछ पीड़िताओं ने तो ये तक बताया था कि इमोशनली जुड़ने के बाद उनके निजी पलों के वीडियोज तक बना लिए गए और उन्हें इन वीडियोज के जरिए ब्लैकमेल किया गया. धमकी दी गई कि अगर इस्लाम कुबूल नहीं करोगी, तो ये वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिए जाएंगे. ‘दी केरला स्टोरी’ मूवी में भी एक ऐसी पीड़िता की कहानी है, जो इस्लाम कुबूल नहीं करती तो उसके वीडियोज वायरल कर दिए जाते हैं और उसे आत्महत्या करनी पड़ती है.
रिपोर्ट में ये भी लिखा गया था कि कुछ युवा लड़कियों को फंसाने के लिए महंगे गिफ्ट्स भी दिए जाते थे, मोबाइल फोन या पैसा या फिर देश से बाहर अच्छी नौकरी का ऑफर. फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने ये भी पाया कि ज्यादातर लड़कियां बालिग थीं, ये एक सुनियोजित, साजिशन प्रयास होता था लड़कियों को ‘हसबैंड’ के रूप में नया अभिभावक दिलवाने का.
किया था PFI की करतूतों का खुलासा
सबसे चौंकाने वाला था कि धर्मांतरण के इस खेल में केरल की कई संस्थाएं भी शामिल थीं, जैसा कि इस रिपोर्ट में कहा गया है. लिखा था कि, “पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई), स्टूडेंट वेलफेयर फ्रंट, वूमेन्स लीग आदि संस्थाएं सामाजिक कार्यों के नाम पर धर्मांतरण को बढ़ावा दे रही हैं”. रिपोर्ट में साफ लिखा है कि ये संस्थाएं सामाजिक चंदे से चलने का दावा करती हैं, लेकिन इनके वित्तीय श्रोतों की जांच की सख्त जरुरत है.
रिपोर्ट में ये भी सम्भावना जताई गई कि हो सकता है कि हिंदू लड़कियों का इस्लाम में धर्मांतरण करके इसलिए विदेश भेजा जा रहा हो ताकि उन्हें युद्ध उद्देश्यों में इस्तेमाल किया जा सके और कल को भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाएं.
कमेटी ने जब पुलिस उच्चाधिकारियों से मुलाकात की तो ये भी उन्हें बताया कि कुछ इलाके हैं, जहां धर्मांतरण का ये खेल जोरों पर है. उन्होंने मालाबार के कुछ इलाकों की तरफ इशारा किया. हालांकि केरल पुलिस ने उनके सामने ये माना कि “कुछ गांव ऐसे हैं जहां स्थानीय पुलिस भी घुसने में, इन लोगों के खिलाफ एक्शन लेने में हिचकिचाती है”.
इस रिपोर्ट के बाद इस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी संस्तुतियां भी दीं. पहली संस्तुति में ही कहा गया कि सामाजिक संस्थाओं के वित्तीय श्रोतों और गतिविधियों की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जांच होना राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बेहद जरुरी है. यानी कमेटी ने मान लिया था कि ये धर्मांतरण संस्थागत रूप से योजनाबद्ध हो रहा है.
अगली संस्तुति में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने साफ साफ लिखा कि, एक जैसे तरीके से जिस तरह युवा लड़कियों का धर्मांतरण हो रहा है, उसकी जांच किसी केन्द्रीय जांच एजेंसी को ही करनी चाहिए, राज्य की एजेंसी के द्वारा नहीं. ये भी लिखा कि हमसे मिलने के दौरान कई व्यक्तियों और संस्थाओं ने ये भी कहा कि राज्य सरकार इस मामले में गंभीर रुख नहीं अपना रही है. कमेटी ने इन सब मामलों में एक अलग से कोर्ट बनाने की भी बात कही, ताकि जिन परिवारों की लड़कियों को देश से बाहर ले जाया गया है, उनकी समय से मदद हो।
कमेटी ने सबसे उल्लेखनीय संस्तुति ये की, कि जिस तरह से धर्म बदलवाकर शौहर के रूप में जो नया अभिभावक चुन लिया जाता है, उस पर रोक लगे, बल्कि प्राकृतिक अभिभावकों को ही ये अधिकार मिले. इसका सख्ती से पालन होना चाहिए. कमेटी ने ये भी कहा जबरन धर्मांतरण के दायरे में बहला फुसलाकर या प्यार के जाल में फंसाकर किया जाने वाला धर्मांतरण भी लाया जाना चाहिए.
कमेटी ने आखिरी संस्तुति में कहा कि ये धर्मांतरण ना केवल देश की सुरक्षा के लिए बल्कि सामाजिक ढांचे के लिए भी खतरा है, ऐसे में किसी सामाजिकी विशेषज्ञ से इसका गहरा अध्ययन किए जाने की जरूरत है. साथ में अंतिम लाइनें ये लिखीं कि. “For a diverse country like India, such incidents in long run, may create undercurrents and pose serious threat to the unity, integrity and security of India”.
मनोज कुमार की कहानी में भी कम पीड़ा नहीं थी, मनोज ने तमाम पीएफआई आदि संगठनों के नेताओं के नाम दिए, उसका भी जिसने उनकी पत्नी को बरगलाकर मुस्लिम बना दिया था और अब उनकी बेटियों को धर्मांतरित करने का दवाब बना रहे थे. एक ऐसी लड़की की कहानी भी आई जिसे नौफल नाम का एक लड़का फोन करके निकाह का दवाब बना रहा था, उसने मना किया तो खाड़ी देशों से फोन आने शुरू हो गए कि नौफल से निकाह करो. इस केस का तो इस टीम ने वहीं निबटारा किया और बेटी को पूरी कार्यवाही का भरोसा दिलाया.
सबसे खास था कि उनको जितनी शिकायतें मिलीं, 99 फीसदी मुस्लिम लड़कों के खिलाफ थीं, कि कैसे उनकी बेटी को धर्मांतरित किया, या कैसे वो उन्हें परेशान कर रहे हैं, ब्लेकमेल कर रहे हैं. शायद यही वजह थी कि ना केवल फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को धर्मांतरण के इस ट्रेंड के बारे में पता चला, ये भी पता चला कि केरल की पुलिस, राज्य महिला आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग और सरकार के लोग पीड़िताओं की नहीं सुनते, ये भी कि कई मुस्लिम संस्थाएं भी इसमें शामिल हैं और ये भी कैसे सारे मामलों में एक जैसा पैटर्न है.
असल सवाल ये है कि जब 2017 में ये फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार हुई तो जाहिर है केरल की सरकार को भेजी गई होगी, एक्शन लेने के लिए संस्तुतियां भी इसमें भेजी गई हैं. लेकिन क्या एक्शन हुआ, इसके बारे में ज्यादा जानकारी जनता के सामने नहीं आ पाई. हालांकि पीएफआई पर प्रतिबंध केन्द्र सरकार ने लगा दिया है लेकिन केरल सरकार ने क्या एक्शन लिया, नहीं पता चला और अब जब ‘दी केरल स्टोरी’ के जरिए ये मामला उठा है, तो केरल सरकार और उसकी विरोधी कांग्रेस दोनों ही इस मूवी के विरोध में आ गई हैं.
केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी ये फ़िल्म देखने का बाद न्यूज़18 इंडिया से बात करते हुए इस रिपोर्ट का ज़िक्र किया। स्मृति ईरानी ने ऐसे राजनीतिक दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि साल 2017 में नेशनल कमिशन ऑफ वूमेन ने धर्मांतरण के मामले में एक रिपोर्ट के माध्यम से केरल पुलिस को कुछ तथ्य सौपे थे, यह विषय सार्वजनिक जानकारी में भी है। वह राजनीतिक दल जो लड़कियों के एंटरेपमेंट जबरदस्ती धर्मांतरण आईएसआईएस ब्राइड्स को झूठलाते हैं, उनसे मैं अपील करना चाहती हूं यह फिल्म आतंक और आतंकवादियों के खिलाफ है अगर आपने इस फिल्म को अपने प्रदेश में प्रदर्शित करने से रोका है तो आप देश को यह संकेत और संदेश दे रहे हो कि आप आतंक के समर्थक हो आप महिला सुरक्षा और बेटियों की सुरक्षा के समर्थक नहीं हो।
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FIRST PUBLISHED : May 10, 2023, 13:49 IST









