केरल नौका दुर्घटना: ‘देखा तो तीनों मेरी बहन के बच्चे थे…’ ऑटोवाले ने सुनाई त्रासदी की दास्तान

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मलप्पुरम. ऑटो रिक्शा चालक शाहुल हमीद को जिंदगीभर बीता रविवार कभी नहीं भूलेगा. वो हादसे की खबर सुनकर थूवलथीरम बीच की ओर गए थे लेकिन उन्हें जो सवारियां मिलीं, उन्हें देखकर उनका कलेजा मुंह को आ गया. हमीद को नहीं पता था कि बीच पर कैसी भीषण विपदा उनका इंतजार कर रही थी. जैसे ही उन्होंने अपना ऑटोरिक्शा वहां खड़ा किया, समुद्र से निकाले गए तीन बच्चों को आनन फानन में उनके ऑटो में लिटाया गया और तुरंत नजदीकी अस्पताल चलने को कहा गया ताकि बच्चों की जान बचायी जा सके. लेकिन अस्पताल पहुंचने पर हमीद ने पाया कि पीछे सीट पर निश्चल पड़े बच्चे उसकी बहन के हैं. रविवार की उस दुखद शाम को पर्यटन नौका संचालक ने आखिरी फेरे में क्षमता से अधिक लोगों को बैठा लिया. लोगों ने चेताया भी कि नौका एक तरफ झुक रही है पर इसे अनसुना कर दिया गया.

रविवार की रात दुखद दुर्घटना की खबर सुनकर हमीद अपने तिपहिया वाहन से थूवालथीरम समुद्र तट पर पहुंचा और बचावकर्मियों ने उसके वाहन में कुछ बच्चों को लिटा दिया, जिनमें से तीन बच्चे खुद उसके परिवार के थे. परप्पनंगडी निवासी हमीद के 12 सदस्यीय परिवार में से उसकी बहन और उसके तीन बच्चों की इस त्रासदी में मौत हो गई. इस नौका दुर्घटना में कुल 22 लोगों की मौत का दावा किया गया है जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं. हमीद ने एक न्यूज चैनल से कहा, ‘मैं दुर्घटना की खबर सुनकर समुद्र तट पर अपना ऑटोरिक्शा चलाकर गया. जब मैं वहां पहुंचा, तो बचावकताओं ने कुछ बच्चों को पानी से निकाल कर मेरे ऑटो में लिटा दिया और मैं उन्हें आननफानन में नजदीकी अस्पताल में ले गया. लेकिन अस्पताल पहुंचने पर मैंने पाया कि वे बच्चे मेरी बहन के थे. इस दुर्घटना में मेरी बहन और उसके तीन बच्चों की मौत हो गई.’

उनकी बहन के परिवार के पांच अन्य लोगों और तीन रिश्तेदारों की भी त्रासदी में मृत्यु हो गई. यह हादसा नौका मालिक और संचालकों द्वारा सवारियों की संख्या को नियंत्रित करने संबंधी नियमों के उल्लंघन को भी दिखाता है. इसी तरह की त्रासदी यहां के चेट्टीपडी गांव में दिखी जहां एक परिवार के चार सदस्यों (एक महिला और उसके तीन बच्चों) की इस हादसे में मौत हो गई. बताया जा रहा है परिवार के दो अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिनकी हालत गंभीर होने की खबर है. नौका की सवारी कितनी सुरक्षित रहेगी? इस सवाल पर अलग अलग राय के चलते कोंडोट्टी निवासी दो भाई इसाक और इब्राहिम नौका पर सवार नहीं हुए और उनकी जान बच गई.

दोनों भाइयों ने एक न्यूज चैनल को बताया कि वे वहां परिवार के साथ पिकनिक के लिए गए थे जो ‘अम्यूजमेंट पार्क’ में खेल रहे थे, लेकिन इस बीच किसी ने उन्हें बताया कि वहां नौका की सवारी भी की जा सकती है. लेकिन नौका की सवारी की सुरक्षा को लेकर मतभिन्नता के कारण दोनेां भाई नौका पर सवार नहीं हुए. दोनों भाइयों ने कहा कि नौका में पहले ही क्षमता से अधिक लोग भरे थे और इसका चालक यह कहकर और अधिक लोगों को इसमें सवार होने के लिए उकसा रहा था कि ‘यह आखिरी नौका यात्रा’ है.

शमसुद्दीन समेत उनके परिवार के आठ लोग भी इस हादसे का शिकार होने से बच गये. शमसुद्दीन ने एक टीवी चैनल को फोन के जरिये बताया कि उन्होंने जब देखा कि नौका एक तरफ झुकी हुई है, तो उन्होंने खरीदे गये चार टिकट रद्द कराने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि इसके बारे में उन्होंने नौका के संचालक को भी बताया, लेकिन उसने कहा कि चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है. शमसुद्दीन ने बताया कि उनके समूह में पांच बच्चे थे.

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स्थानीय लोगों ने कहा कि बचाव कार्यों के लिए समय पर ना तो कोई सरकारी मशीनरी मौजूद थी और ना ही मूलभूत वस्तुएं जैसे कि रोशनी और रस्सी आदि. लेकिन स्थानीय मछुआरे पानी से लोगों को बचाने के लिए इन जरूरी वस्तुओं को लेकर आए थे. हादसे में बचे तनूर निवासी शफीक ने कहा कि वह नौका में सबसे ऊपर छत पर बैठे थे और जब नौका झुकने लगी तो वह अपने आप पानी में गिर गये. शफीक ने कहा, ‘जो लोग नौका के अंदर थे वे बाहर नहीं निकल सकते थे, क्योंकि उसमें निकलने के केवल दो ही दरवाजे थे. सभी खिड़कियां बंद थीं और नौका में सवार लोगों में ज्यादातर बच्चे थे.’

Tags: Boat Accident, Kerala, Kerala News

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Author: Up Head Line

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