
कृष्ण कुमार/नागौर. नागौर के उपखंड मुख्यालय स्थित ग्राम पंचायत गोविन्दी के ग्राम डाबसी के हाईवे पुल के नीचे से निकलने वाली मेंढा नदी धीरे-धीरे लुप्त होने के कगार पर आ चुकी है. मेंढा नदी नहीं आने से सैकड़ों गांव के लिए पानी की समस्या उत्पन्न हो चुकी है. हालांकि जब नदी आया करती थी, तब यह सैकड़ों गांव के लिए वरदान साबित हो रही थी.
आपको बता दें कि मेंढा नदी राजस्थान में ऋतुकालिक (सीजनल) रूप से बहने वाली एक नदी थी. यह नदी नीम का थाना के पास झाड़ली सुरागों के पहाड़ों से उद्गम होने के बाद सामोद, हस्तेड़ा, बाघावास, लालासर, बड़ी डूंगरी, किशनगढ़-रेनवाल, मीण्डा, देवली, शिम्भूपूरा, बावड़ी, सोलाया, बरजन, डाबसी व जाब्दीनगर होती हुई 150 किलोमीटर का सफर तय कर सांभर झील में जाकर मिलती थी.
सैकड़ों गांवों में पानी के लिए थी वरदान साबित
ग्राम डाबसी के ग्रामीण हीरालाल गुर्जर ने बताया कि सैकड़ों गांवों में पानी के लिए वरदान साबित होने वाली मेंढा नदी आज लुप्त होने के कगार पर है. पिछले 40 वर्षों नदी एक दिन भी नहीं बही है. नदी के नहीं चलने के पीछे जहां कम बारिश का होना है.वहीं रास्ते में कई जगह एनीकेट बनना भी नदी का नहीं बहना कारण है. करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली क्षेत्र की एक मात्र मेंढा नदी के नहीं बहने से कुओं का जलस्तर काफी गहरा हो गया है.
मेंढा नदी विश्व प्रसिद्ध सांभर झील में होती थी विलीन
मेंढा नदी विश्व प्रसिद्ध सांभर झील में विलीन हो जाती थी. सांभर झील क्षेत्र में नमक झील में भी नदी के नहीं बहने से पानी नहीं रहा है, जिससे यहां नमक का उत्पादन बंद होने के कगार पर है. नदी के बहने तक कुओं का जलस्तर मात्र 5 से 10 फुट तक गहरा था, लेकिन अब 300 फुट से अधिक पहुंच चुका है. वर्ष 1982 के पहले प्रत्येक वर्ष यह नदी बहती थी. नदी के बहने तक सैकड़ों गांवों में पानी की कोई समस्या नहीं थी, लेकिन अब जलस्तर गहराने से यहां का पानी भी खारा हो गया है.
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FIRST PUBLISHED : May 08, 2023, 16:43 IST








