Hasya Kavita: हुल्लड़ मुरादाबादी के लोटपोट कर देने वाले दोहे- ‘बुरे समय को देखकर, गंजे तू क्यों रोय’

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

हुल्लड़ मुरादाबादी शुरूआत में वीर रस की कविताएं लिखते थे. लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने हास्य रचनाएं लिखनी शुरू कर दीं. वे कवि सम्मेलनों में ‘सब्र’ उप नाम से काव्य पाठ करते थे. कुछ समय बाद उन्होंने खुद को हुल्लड़ मुरादाबादी के तौर पर पेश किया और देखते ही देखते हुल्लड़ की हास्य रचनाओं से कवि मंच गुलजार होने लगे. प्रस्तुत हैं उनकी कुछ हास्य रचनाएं-

कर्ज़ा देता मित्र को, वह मूर्ख कहलाए,
महामूर्ख वह यार है, जो पैसे लौटाए।

बिना जुर्म के पिटेगा, समझाया था तोय,
पंगा लेकर पुलिस से, साबित बचा न कोय।

गुरु पुलिस दोऊ खड़े, काके लागूं पाय,
तभी पुलिस ने गुरु के, पांव दिए तुड़वाय।

पूर्ण सफलता के लिए, दो चीज़ें रखो याद,
मंत्री की चमचागिरी, पुलिस का आशीर्वाद।

नेता को कहता गधा, शरम न तुझको आए,
कहीं गधा इस बात का, बुरा मान न जाए।

बूढ़ा बोला, वीर रस, मुझसे पढ़ा न जाए,
कहीं दांत का सैट ही, नीचे न गिर जाए।

हुल्लड़ खैनी खाइए, इससे खांसी होय,
फिर उस घर में रात को, चोर घुसे न कोय।

हुल्लड़ काले रंग पर, रंग चढ़े न कोय,
लक्स लगाकर कांबली, तेंदुलकर न होय।

बुरे समय को देखकर, गंजे तू क्यों रोय,
किसी भी हालत में तेरा, बाल न बांका होय।

दोहों को स्वीकारिये, या दीजे ठुकराय,
जैसे मुझसे बन पड़े, मैंने दिए बनाय।
—
हुल्लड़ मुरादाबादी ने चमचागिरी करके सफलता पाने वालों पर तीखा व्यंग्य किया है-

पूर्ण सफलता के लिए, दो चीजें रख याद,
मंत्री की चमचागिरी, पुलिस का आशीर्वाद।
—

क्या बताएं आपसे

क्या बताएं आपसे हम हाथ मलते रह गए
गीत सूखे पर लिखे थे, बाढ़ में सब बह गए।

भूख, महगाई, गरीबी इश्क मुझसे कर रहीं थीं
एक होती तो निभाता, तीनों मुझपर मर रही थीं

मच्छर, खटमल और चूहे घर मेरे मेहमान थे
मैं भी भूखा और भूखे ये मेरे भगवान् थे

रात को कुछ चोर आए, सोचकर चकरा गए
हर तरफ़ चूहे ही चूहे, देखकर घबरा गए

कुछ नहीं जब मिल सका तो भाव में बहने लगे
और चूहों की तरह ही दुम दबा भगने लगे

हमने तब लाईट जलाई, डायरी ले पिल पड़े
चार कविता, पांच मुक्तक, गीत दस हमने पढे़
चोर क्या करते बेचारे उनको भी सुनने पड़े।

रो रहे थे चोर सारे, भाव में बहने लगे
एक सौ का नोट देकर इस तरह कहने लगे

कवि है तू करुण-रस का, हम जो पहले जान जाते
सच बतायें दुम दबाकर दूर से ही भाग जाते

अतिथि को कविता सुनाना, ये भयंकर पाप है
हम तो केवल चोर हैं, तू डाकुओं का बाप है।

हुल्लड़ मुरादाबादी हिंदी के मशहूर हास्य कवि थे. हास्य कविता और व्यंग्य में विशेष योगदान के लिए उन्हें ‘कलाश्री’, ‘अट्टहास सम्मान’, ‘हास्य रत्न सम्मान’, ‘काका हाथरसी पुरस्कार’ जैसे सम्मानों से अलंकृत किया गया था.

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें