लद्दाख के आसमान में घटी थी रहस्यमयी घटना! 'नॉर्दर्न लाइट्स' या फिर कुछ और? जल्द उठेगा रहस्य से पर्दा

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


नई दिल्ली. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स ने 23 से 24 अप्रैल को लद्दाख (Ladakh Aurora Lights) की हानले वेधशाला में अपने कैमरे से ऑरोरा रोशनी (Aurora Lights) को कैद किया. साथ ही अपने ट्विटर अकाउंट से ‘ऑरेरा लाइट्स’ की एक टाइमलैप्स क्लिप भी ट्वीट किया था. इसके बाद से सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है. ऑरोरा जिसे उत्तरी गोलार्ध में नॉर्दर्न लाइट्स यानी उत्तरी रोशनी के रूप में भी जाना जाता है. अब वैज्ञानिक इस घटना का विश्लेषण कर रहे हैं कि यह ‘नॉर्दर्न लाइट्स’ था या फिर कुछ और.

TOI के अनुसार चमकदार रोशनी के रंगीन ‘पर्दे’ आमतौर पर आर्कटिक सर्कल के पास के स्थानों पर देखे जाते हैं. हानले के सूत्रों ने बताया कि इस घटना का विश्लेषण किया जा रहा है. यह एक ‘स्थिर ऑरोरल रेड (SAR) आर्क’ प्रतीत होता है. लद्दाख में अपने आप में यह काफी दुर्लभ घटना है. यह एक पारंपरिक ऑरेरा नहीं है. SAR आर्क आसमान में दिखाई देने वाले लाल रंग के प्रकाश का एक बैंड है. ऑरोरा के विपरीत जहां विभिन्न रंग गतिशील पैटर्न में दिखाई देते हैं.

#Aurora from #Ladakh!
This is a time-lapse of the sky taken by a 360 deg camera at from #Hanle on 22/23 April night. You can see the aurora lights due to an intense geomagnetic storm that hit the Earth. It is extremely rare to see aurora at such a low latitude! @dstindia (1/n) pic.twitter.com/gGbrw86vsb
— IIAstrophysics (@IIABengaluru) April 29, 2023

सूत्रों के अनुसार दोनों भू-चुंबकीय गतिविधि की अवधि के दौरान दिखाई देते हैं जो सूर्य से विस्फोटित आवेशित पदार्थ की लहर से उत्पन्न होती है. लेकिन उनके गठन का तंत्र थोड़ा अलग होता है. हानले वेधशाला के सूत्र ने कहा ‘यहां तक ​​कि अगर यह एक SAR आर्क था जो यहां आसमान में दिखाई दिया था, यह एक जीवन में एक बार होने वाली घटना थी.’ हानले वेधशाला एक SAR आर्क का विश्लेषण कर रही है जिसके बारे में कहा जाता है कि वह अप्रैल में दिखा था.

पढे़ं- क्‍या इंसानों की जानकारी जुटा रहे एलियंस, मोबाइल टावर कैसे कर रहे उनकी मदद?

एक सूत्र ने कहा कि ’24 अप्रैल की सुबह, उत्तरी क्षितिज में आर्क दिखाई दिया था. साथ ही यह लंबे समय तक दिखाई दे रहा था. दुर्भाग्य से, उस समय वेधशाला से कोई भी बाहर नहीं था. तो यह नग्न आंखों से नहीं देखा जा सका. यह केवल 360-डिग्री स्काई कैमरे में रिकॉर्ड किया गया जो वेधशाला में हमेशा चालू रहता है.’ सूत्र ने आगे कहा कि ‘सोशल मीडिया में उस रात लद्दाख के ऊपर दिखाई देने वाली चमकदार उत्तरी रोशनी की तस्वीरें शायद फेक हैं.’

कुछ रिपोर्टों के अनुसार एक बड़े पैमाने पर भू-चुंबकीय तूफान, जिसे पांच के पैमाने पर कक्षा चार में मापा जाता है, ने 20 सालों में उत्तरी और दक्षिणी रोशनी (एक साथ ऑरोरा कहा जाता है) के सबसे व्यापक प्रदर्शनों में से एक को ट्रिगर किया. ऑरोरा चीन के शिंजियांग प्रांत, अमेरिका में कैलिफोर्निया, ब्रिटेन में स्टोनहेंज, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रों सहित एक विशाल क्षेत्र में देखा और दर्ज किया गया था. यह ऐसे स्थान हैं जहां ऑरोरल दृश्य बहुत दुर्लभ हैं.

हानले के सूत्र ने कहा कि वेधशाला के उपकरणों ने लद्दाख के ऊपर दिखाई देने वाली रंगीन रोशनी की ‘एयरग्लो’ होने की संभावना को खारिज कर दिया था. जो आंखों के लिए अदृश्य एक असंबंधित घटना है. लेकिन जो अक्सर रात के आकाश की छवियों में हल्के रंग के क्षेत्र के रूप में दिखाई देती है.

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें