Jaisalmer News : दोहरे फायदे वाली थारपारकर नस्ल की गायों से लाखों कमा रहा है ये शख्स, जानिए कीमत और विशेषताएं

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प्रतापा राम/जैसलमेर. जैसलमेर और जोधपुर क्षेत्र की थारपारकर गाय अपने आप में अद्भुत विशेषताएं समेटे हुए हैं. इस नस्ल की गायों का उद्गम स्थान पश्चिम राजस्थान और सिंध पाकिस्तान है. लेकिन इसे भारत में मुख्य तौर पर बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और कच्छ के क्षेत्रों में पायी जाती है. यह गाय शरीर में छोटी होती है और इसका रंग हल्का भूरा होता है. थारपारकर गाय का शरीर काफी गठीला और जोड़ काफी मजबूत होते हैं. इस गाय का चेहरा सामान्य रूप से थोड़ा लंबा होता है और इसके सींग मध्यम आकार के होते हैं.

जैसलमेर के भू गांव के स्वरुप दान सिंह का परिवार कई पीढ़ियों से थारपारकर गायों का लालन पालन करता है. इनका संवर्धन और ब्रीडिंग भी करता है. वर्तमान में स्वरुप सिंह के पास 60 गायें हैं जिसके इनकी आय सालाना लाखों में है.यह गाय दुधारू होने के साथ अन्य कार्यों में भी फायदेमंद है इसीलिए इस गाय को दोहरे फायदे वाली गाय भी कहा जाता है. थारपारकर गाय को ग्रे सिंधी, वाइट सिंधी और थारी के नाम से भी जाना जाता है.

थारपारकर गाय साल में 3000 लीटर देती है दूध
इस गाय का लैक्टस काल 300+ दिनों का होता है और ये इस काल में यह गाय 3000 लीटर तक दूध उत्पादन देती है. इसके दूध में वसा और ओमेगा 3 के गुण भी पाए जाते है जो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते है. थारपारकर गाय अपने जीवनकाल में 15 बार बच्चों को जन्म देती है. ये गाय सर्दी, गर्मी और बरसात में अपने आप को मौसम के अनुकूल ढाल लेती है.स्वरुप दान सिंह ने बताया कि इस नस्ल की गायें कम खर्चे में अधिक मुनाफा देती है. मेरे पास 60 गायें है इनसे प्रतिदिन 400 लीटर तक दूध मिलता है और ऑर्गेनिक खेती के लिए इस गाय का गोबर व गोमूत्र बेहतर होता है.

थारपारकर गाय का भोजन
इस नस्ल को जौ, ज्वार, गेंहूं, मक्का, बाजरा, नेपियर घास, सुडान घास, बरसीम की सूखी घास, ज्वार और बाजरे की कड़बी आदि दिया जाता है.स्वरुप सिंह ने बताया कि थारपारकर नस्ल की गायें पूरे भारत में मुश्किल से 2-3 हजार बची है और ये दुर्लभ होती जा रही है. स्वरूप सिंह इन गायों को बेचने का भी काम करते है. गाय को खरीदने के लिए स्वरुप सिंह से इस नम्बर – +919414429247पर संम्पर्क कर सकते है.

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FIRST PUBLISHED : May 06, 2023, 22:16 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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