इंदौर के सलीम की अनोखी आदत…बिना काम के रोज आते हैं अस्पताल, दिलचस्प है इसकी वजह

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अभिलाष मिश्रा/इंदौर: शहर में एक शख्स ऐसा भी है जो लगातार 1996 से रोजाना एमवाय अस्पताल आता है. हालांकि, इस शख्स का कारोबार फर्नीचर का है और पेशे से यह एक व्यापारी है. इनका नाम सलीम अंसारी है. सलीम बताते हैं कि जिस दिन वह एमवाय अस्पताल नहीं आते, उन्हें अधूरा-अधूरा लगता है.

इंदौर के सलीम को बिना किसी काम के अस्पताल आने की आदत है, पर इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. सलीम बताते हैं कि 1996 में मेरा बेटा काफी बीमार था. उसकी हालत नाजुक थी. हम बहुत से डॉक्टरों को दिखा-दिखा कर थक चुके थे. फिर हमने सोचा कि क्यों ना बेटे को एक बार एमवाय अस्पताल में दिखाया जाए.

उस समय अस्पताल में संसाधनों की कमी हुआ करती थी. लगभग 3 महीने के मेरे बेटे का इलाज एमवाय अस्पताल में चला. इस दौरान मैंने मरीजों की तकलीफ को बहुत नजदीक से महसूस किया. ऊपरवाले की दुआ से मेरा बेटा स्वस्थ हो गया. आज वह 28 वर्ष का है और पूरी तरह से स्वस्थ है. बस उसी समय अस्पताल और मरीजों से मेरी हमदर्दी हो गई.

तब ठान लिया था रोज अस्पताल आऊंगा
सलीम का कहना है कि मैंने अस्पताल में रहते-रहते ही ठान लिया था कि अगर मेरा बेटा ठीक भी हो जाता है तो मैं अपने इस बुरे समय को कभी भूलूंगा. तब से लेकर आज वर्षों बीत गए मैं रोज अस्पताल आता हूं और अस्पताल के मरीजों के साथ समय बिताता हूं. मुझसे जितना बन पड़ता है, मदद भी करता हूं. मैंने अपने बेटे के ठीक होने के लिए मन्नत मांगी थी. सन 1996 में जब मेरा बेटा ठीक हुआ तो उसके बाद से ही लगातार मैंने अस्पताल के मरीजों के साथ समय बिताना और यथा संभव उनकी मदद करना भी शुरू किया. ऐसा करते-करते वर्षों से अस्पताल में आने की आदत हो गई.

कोरोना में भी आते रहे अस्पताल
सलीम बताते हैं कि वह रोज अस्पताल आकर यहां 2 घंटे समय बिताते हैं. बताया, मेरी गैर मौजूदगी में मेरा बेटा दुकान संभालता है. अब अगर अस्पताल ना आऊं तो दुविधा में पड़ जाता हूं और दिन अधूरा-अधूरा सा लगता है. अस्पताल के स्टाफ सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि सलीम अक्सर अस्पताल आते रहते हैं और मरीजों के साथ समय भी बिताते हैं. बहुत वर्षों से सलीम अस्पताल आते हैं. सलीम ने बताया कि मैंने कोरोना काल में भी अपनी सेवाएं दी हैं.

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FIRST PUBLISHED : May 06, 2023, 12:24 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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