कैसे तय होता है वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, क्या कोविड फिर बनेगी महामारी?

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हाइलाइट्स

ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी जन स्वास्थ्य की बहुत ही असाधारण घटना के लिए लगाई जाती है.
WHO इसके लिए “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न” शब्द का उपयोग करता है.
वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल तय करने के लिए संगठन ने कुछ मानदंडों को आधार बनाया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आखिरकार ऐलान कर ही दिया कि अब कोविड-19 महामारी को लेकर दुनिया में वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं रहा है. इस ऐलान को लेकर कई देशों में बहस छिड़ सकती है. भारत में भी विशेषज्ञों ने बताया है कि देश में कोविड-19 संक्रमणों की संख्या में बढ़ती तेजी हाल ही में उतार पर आती दिखी है यानि भारत एक पीक से गुजर चुका है, लेकिन भारत में कोविड महामारी का संकट कतई तौर पर खत्म नहीं माना जा सकता है. तो फिर ऐसे में यह आपातकाल खत्म होने का अर्थ क्या है और आखिर कैसे तय होता है कि हालात ऐसे आपातकाल के लायक हैं या अब नहीं रहे. आखिर इसके पीछे की प्रक्रिया क्या है और वह कैसे काम करती है.

जनवरी 2020 से था यह आपातकाल
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ ट्रोडोस अधनोम घेब्रेयेसस ने औपचारिक तौर पर इसका ऐलान किया है. संगठन ने जनवरी 2020 में इसको लेकर आपातकाल का ऐलान किया था. संगठन किसी संक्रमित रोग के प्रकोप होने की त्वरित प्रक्रिया के तौर पर पब्लिक हेल्थ इमेरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न  की घोषणा कर सकता है. और कोरोना वायरस को लेकर किया गया ऐलान संगठन का छठा ऐलान था.

कैसे तय होता है आपातकाल
विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल का ऐलान करने के लिए दो तरहके मानदंडों का इस्तेमाल करता है. सबसे पहले तो बीमारी का प्रकोप एक से अधिक देश में होना चाहिए और दूसरी शर्त यह है कि इस प्रकोप से निपटने के लिए हो रहे प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत होनी चाहिए.

खत्म नहीं हुई है महामारी
डब्ल्यूएचओ की आधिकारिक परिभाषा में इसका अर्थ होता है कि हालात असामान्य और अप्रत्याशित तौर पर गंभीर होना चाहिए. खुद डॉ घेब्रेयेसस ने ऐलान के समय कहा कि आपातकाल खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि कोरोना ही खत्म हो गया है. पिछले हफ्ते ही कोरोना से हर तीन मिनट में एक व्यक्ति की जान गई है.

Tags: Coronavirus, COVID 19, COVID-19 pandemic, Health, India, Research, World

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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