
बलबीर परमार/उत्तरकाशी. उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जिला अस्पताल में तीन सर्जन होने के बाद भी मरीजों को देहरादून जैसे बड़े शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़ा हो रहा है . उत्तरकाशी के जिला अस्पताल से आए आंकड़े बताते हैं कि एक साल में तीन सर्जन होने के बाद भी मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ा है. जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में ऑपरेशन में भारी गिरावट आई है. आंकड़ों की बात करें तो मार्च 2019 से मार्च 2020 में 537 मेजर ऑपरेशन किए गए.
2020 से 2021 तक 520 और 2021 से 2022 तक 520 मेजर ऑपरेशन जिला अस्पताल में हुए लेकिन मार्च 2022 से मार्च 2023 में तीन सर्जन होने के बाद आंकड़ों में भारी गिरावट आई है और सिर्फ 162 ऑपरेशन ही हुए हैं.मरीजों को डॉक्टर होने के बाद भी इलाज के लिए बाहर जाना पड़ रहा है.
तालमेल की कमी का खामियाजा भुगत रही जनता
स्थानीय लोगों की मानें तो डॉक्टरों में आपसी तालमेल न होने के कारण खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है.इसके अलावा तीन सर्जन होने के बाद भी जिला अस्पताल में फैमिली प्लानिंग के आंकड़ों में भारी गिरावट आई है, जिसको लेकर समय समय पर सीएमओ कार्यालय से जिला अस्पताल से जवाब मांगा गया. वहीं जिला अस्पताल सीएमएस के कई बार इन डॉक्टरों को कहने के बाद हालात नहीं सुधरे हैं.
स्वास्थ्य कारणों से मेडिकल लीव पर दो सर्जन
वहीं एक महिला सर्जन को फैमिली प्लानिंग की ट्रेनिंग कराने के बाद भी उन्होंने ऑपरेशन करने की जहमत तक नहीं उठाई. जिला अस्पताल के सीएमएस बीएस रावत का कहना है इस समय दो सर्जन जनपद में जो दोनों स्वास्थ्य के कारण मेडिकल पर हैं. कार्य के दौरान समय-समय पर इनसे बोला गया था लेकिन उसके बाद भी ऑपरेशन इन डॉक्टरों द्वारा नहीं किया गया. इस मामले में उच्चाधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है.
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FIRST PUBLISHED : May 05, 2023, 21:15 IST








