
हिना आज़मी/देहरादून.बैसाख मास की अष्टमी तिथि के दिन भगवान शिव के अंश से ही काल भैरव की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए अष्टमी तिथि को कालाष्टमी, काल भैरव अष्टमी या भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार कालाष्टमी 12 मई को है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से आपके घर परिवार से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और इसी के साथ ही अगर किसी ने आप पर कोई तंत्र-मंत्र किया हो, तो वह भी विफल होता है. काल भैरव की सवारी श्वान अर्थात कुत्ता है, इसलिए इस दिन कुत्ते को दूध पिलाने से बहुत पुण्य मिलता है.
पंडित उदय शंकर भट्ट का कहना है कि सबसे पहले हमें यह समझना जरूरी है कि कालाष्टमी आखिर होती क्या है ? उन्होंने बताया कि वैसे तो हर महीने अष्टमी तिथि आती है लेकिन वैशाख के महीने की अष्टमी तिथि शिव भक्तों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने काल भैरव का अवतार लिया था. इसी दिन उनकी उत्पत्ति होने के कारण ही इसे कालाष्टमी या भैरव अष्टमी कहा जाता है.
नकारात्मक सोच से दूर रहना जरूरी
पंडित उदय शंकर भट्ट का कहना है कि इस दिन भक्त काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए कालाष्टमी व्रत करते है. उनका कहना है कि व्रत कोई व्यक्ति लेता है तो उसे पूरे दिन सत्य बोलना चाहिए यानी व्रती व्यक्ति के मन में कोई नकारात्मक सोच नहीं रखना चाहिए.
काल भैरव को कैसे करें प्रसन्न ?
उनका कहना है कि कालाष्टमी तिथि के दिन व्रत लेने वाला व्यक्ति सुबह स्नान करने के बाद पूजा अर्चना करें. दिनभर व्रत के बाद शाम को कालभैरव का पूजन करे. पंडित उदय शंकर भट्ट बताते हैं कि भक्त अगर काल भैरव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें सरसों के तेल से अभिषेक करना चाहिये. जिन लोगों को लगता है कि उन पर किसी ने तंत्र-मंत्र या जादू -टोना किया है तो वह व्यक्ति अपनी इस पूजा में मदिरा का इस्तेमाल भी कर सकता है क्योंकि कालभैरव को मदिरा भी प्रिय था.
सच्चे ह्रदय और आस्था के साथ पूजन से होगा लाभ
उन्होंने बताया कि इसके अलावा काल भैरव के भोग के लिए आटे के मीठे रोट बनाकर उन्हें भोग लगाया जाए और इसी के साथ ही व्रती अपना व्रत तोड़े.इसके अलावा उन्होंने बताया कि काल भैरव की सवारी स्वान या कुत्ते को माना जाता है इसलिए इस दिन काले कुत्ते को रोट और भोजन खिलाने से पुण्यदायी फल प्राप्त होते हैं.पंडित उदय शंकर भट्ट बताते हैं कि अगर आप वास्तव में काल भैरव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो सच्चे ह्रदय से और आस्था के साथ उनकी पूजा-अर्चना कालाष्टमी के दिन करें और ध्यान रहे कि अपने ही आसन पर पूजा अर्चना करें.
(NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. NEWS18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.)
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FIRST PUBLISHED : May 05, 2023, 20:50 IST








