प्रयागराज
यादव समुदाय को ‘यदमुल्ला’ कहकर जातिगत अपमान का मामला,
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव ने दर्ज कराई शिकायत,
शिकायत पर राज्य मानवाधिकार आयोग सख्त,
सोशल मीडिया पर यादव जाति/समुदाय के विरुद्ध कथित रूप से अपमानजनक एवं जाति-आधारित घृणा फैलाने वाली सामग्री प्रसारित किए जाने का आरोप,
यूपी मानव अधिकार आयोग ने अधिवक्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव की शिकायत पर कार्रवाई का दिया निर्देश,
आयोग ने उचित कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर, लखनऊ को दिया आदेश,
पुलिस कमिश्नर को छह सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है,
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता/पीड़ित को शामिल किया जाए,
और की गई कार्रवाई से उन्हें अवगत कराया जाए,
आयोग द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में 14 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किया गया,
मामला आयोग में केस संख्या 22476/24/48/2026 के रूप में दर्ज है,
फेसबुक अकाउंट के माध्यम से अपमानजनक सामग्री प्रसारित करने का आरोप,
शिकायत में आरोप लगाया है कि फेसबुक पर दीपक गुप्ता नामक व्यक्ति के “दीपक अम्बेडकरवादी” नाम से संचालित अकाउंट से अपमानजनक पोस्ट किए गए हैं,
लगातार यादव जाति/समुदाय को निशाना बनाकर कथित अपमानजनक पोस्ट, टिप्पणियां और वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं,
शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित सामग्री में समुदाय के लिए कथित तौर पर “यदमुल्ला” और “गुबरौटी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है,
आरोप है कि इन शब्दों के माध्यम से समुदाय की सामूहिक पहचान का उपहास उड़ाने और उसके सदस्यों को सामाजिक रूप से अपमानित करने का प्रयास किया गया,
शिकायत में यादव समुदाय की पारंपरिक पशुपालन एवं पशुधन आधारित आजीविका का कथित रूप से मजाक उड़ाए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है,
शिकायतकर्ता का कहना है कि राजनीतिक दल या विचारधारा की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है,
लेकिन राजनीतिक मतभेद के आधार पर किसी पूरे जातीय समुदाय को कथित रूप से अपमानित करना अलग विषय है,
आयोग ने शिकायत को उचित कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर, लखनऊ को भेजा है,
छह सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है,
कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता/पीड़ित को शामिल करने को कहा गया,
मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को देने का निर्देश दिया गया,
शिकायतकर्ता ने संबंधित फेसबुक अकाउंट के संचालक की पहचान करने, कथित आपत्तिजनक पोस्टों एवं वीडियो की जांच कराने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है,
शिकायत में यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है,
तो संबंधित अधिकारियों द्वारा कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।







