प्रयागराज : फर्रुखाबाद के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की बदहाल स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीजेपी सदस्य और छात्र गौरव भारती उर्फ गौरव कुमार को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने की।
मामला फर्रुखाबाद के करनपुर मजरा बसमल स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक, 16 अगस्त 2026 को गौरव भारती ने स्कूल परिसर का वीडियो बनाया था। वीडियो में कथित तौर पर जर्जर भवन, परिसर में जमा पानी और बच्चों के बैठने की व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं दिखाई थीं। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया।
इस मामले में 19 अगस्त को पुलिस ने FIR दर्ज की थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 और 353 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 लगाई गई। FIR में आरोप लगाया गया कि गौरव स्कूल पहुंचे और उनके साथ मौजूद एक अज्ञात व्यक्ति ने शिक्षकों से कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कीं।
वहीं, गौरव भारती की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि FIR में उनके खिलाफ किसी मारपीट, धमकी, हिंसा या आपराधिक बल के इस्तेमाल का स्पष्ट आरोप नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि वीडियो में एक सरकारी स्कूल की स्थिति को सार्वजनिक करना जनहित से जुड़ा विषय है।
याचिका में आईटी एक्ट की धारा 66 लगाए जाने पर भी सवाल उठाया गया है। याची का कहना है कि स्कूल की इमारत का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करना अपने आप में कंप्यूटर संबंधी उस अपराध के दायरे में नहीं आता, जिसके लिए यह धारा लगाई गई है। साथ ही धारा 352 और 353 के आरोपों को भी याचिका में चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है और तब तक याची की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।








