कौशांबी जिले में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं विद्युत सप्लाई न होने से किसान परेशान नहीं कर पा रहे खेत की सिंचाई।
कौशांबी जिले के उमस भरी गर्मी से लोग परेशान हैं गर्मी से लोगों को राहत मिलने लगती थी लेकिन इस बार राहत मिलती नहीं दिख रही है वजह साफ है कि आषाढ़ महीने से बारिश की शुरुआत हो जाती थी लेकिन इस बार आधा से ज्यादा महीना सावन का गुजर चुका है और बारिश नहीं हो रही है जिसके चलते गर्मी पड़ रही है अगर तापमान 35 डिग्री होता है ऐसा लगता है 45 डिग्री तापमान है जिसके चलते लोग गर्मी से परेशान रहते हैं वही धूप में निकलना भी लोग कम करते हैं लेकिन यह देश प्रधान किसान देश है यहां पर ज्यादातर लोग किसान ही हैं किसान इस वक्त धान की रोपाई में लगा हुआ है और खेतों में धान की बियाड़ काटकर अपने खेत में रोपाई कर रहा है लेकिन वह भी सावन की बारिश का पानी से नहीं बल्कि समरसेबल के पानी से ही उसको अपना खेत में पानी भरना पड़ रहा है साथ में एक दिक्कत और भी आ रही है वजह है बिजली की सप्लाई सरकार का दावा रहता है ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे में विद्युत सप्लाई की जाती है लेकिन ओवरलोड होने के चलते किसानों को विद्युत सप्लाई की व्यवस्था ठीक-ठाक नहीं मिल पाती है किसान रात में अपने खेत के पास जाकर बैठ जाता है और बिजली के वक्त आता रहता है कि लाइट कब आए और कब हम अपने खेत में पानी लगा सकें इस बार किसान विद्युत सप्लाई के चलते काफी परेशान दिख रहे हैं उनका कहना है कि सरकार विद्युत सप्लाई की व्यवस्था ठीक नहीं करा पा रही है महंगाई का दौर है और अगर इस बार बारिश या विद्युत सप्लाई ठीक-ठाक नहीं मिली तो धान की फसल खराब होगी जो धान अभी पास ₹23 किलो बिक रहा है यही धान 30 से ₹35 प्रति किलो तक जाने की उम्मीद बता रहा है ऐसे में विद्युत सप्लाई की व्यवस्था ठीक करा देना चाहिए वैसे तो अभी तक कौशांबी जिले में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।
किसान नेता नूर इस्लाम का कहना है कि हम लोग डीएम से कई बार मिल चुके हैं और उनसे लिखित प्रार्थना पत्र भी दिया गया था कि जो भी नेहरे है वह सूखी है। उन सभी नहरों में पानी छुड़वाया जाए जिससे किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सके अगर समय से पानी किसानों को नहीं मिलता है तो जो धान किसानों ने अपने खेतों में लगाया हुआ है वह धान सूखने की कगार पर पहुंचने वाला है ऐसे में किसान काफी परेशान दिख रहा है और अपने खेतों में सिंचाई नहीं कर पा रहा है समरसेबल से जो सिंचाई होती है उसमें भी नंबर लगाना पड़ता है जब नंबर आएगा तो पानी मिलेगा क्योंकि सभी लोगों के खेतों में पानी पहुंचाना होता है।
किसान अजीजुल हसन ने बताया कि खेतों में धान की रोपाई 1 महीने पहले ही कर दिया गया था कि बरसात आने पर अच्छा धान की पैदावार होगी और इस बार बारिश ना होने के बाद हालात खराब हो गए धान पीले होने लगे हैं इसका साफ मतलब यह है कि समय से चाइना मिल पाना पानी न मिल पाना जिसके बाद धान पीला होना शुरू हो गया है यानी अब धान सूखने की कगार पर 90 % पहुंच चुका है अगर अब इसमें पानी न लगाया जाए या बारिश ना हो तो यह धान सूख जाएगा।








