क्या शुक्र की तरह पृथ्वी भी हो जाएगी तबाह? नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप सुलझाएगा रहस्य, जानें कैसे?

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


Space News: नासा के वैज्ञानिकों ने अभी हाल में पृथ्वी से 98 प्रकाश वर्ष दूर स्थित LP 890-9c नाम के एक एक्सोप्लैनेट की खोज की है. उनका दावा है कि इसकी स्टडी ये पता करने में मदद कर सकती है कि पृथ्वी जैसा रहने योग्य ग्रह कैसे शुक्र जैसी दुर्गम दुनिया में बदल सकता है. यह एक्सोप्लैनेट छोटे लाल बौने तारे का परिक्रमा करता है. एक्सोप्लैनेट एलपी 890-9सी या स्पेकुलोस-2सी की खोज सितंबर 2022 में की गई थी. स्पेस.कॉम के अनुसार, ग्रह का व्यास पृथ्वी से लगभग 40 प्रतिशत अधिक है. 

एक्सोप्लैनेट एलपी 890-9 सी रहने योग्य क्षेत्र (Habitable Zone) के काफी करीब है. हालांकि, एक्सोप्लैनेट अपने तारे से निकटता के बावजूद, काफी शांत है. इसकी तुलना में पृथ्वी सूर्य से 152.07 मिलियन किलोमीटर दूर है. शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका मतलब है कि किसी तारे के करीब भी, किसी ग्रह का तापमान हल्का हो सकता है. कॉर्नेल विश्वविद्यालय के कार्ल सागन इंस्टीट्यूट से लिसा कल्टेनेगर के नेतृत्व में एक शोध दल ने एलपी 890-9सी (LP890-9C) के संभावित जलवायु और वायुमंडल का मॉडल तैयार किया है और पता लगाया है कि जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) उनके बीच कैसे अंतर कर सकता है.

वैज्ञानिकों के अनुसार, LP 890-9c हमारे सौरमंडल में शुक्र की तरह ही रहने योग्य क्षेत्र के अंदरूनी भाग में स्थित है, यानी ऐसे भाग में स्थित जहां, मानव जीवन संभव है. ऐसा माना जाता है कि शुक्र एक अनियंत्रित ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण एक दुर्गम दुनिया बन गया होगा. लेकिन ऐसा संभव नहीं है कि सभी ग्रह इसी का अनुसरण करेंगे. स्टडी में ये भी मालूम चला है कि शुक्र पर चुंबकीय क्षेत्र की कमी की वजह से पानी के अणु सोलर हवाओं के सामने टिक नहीं पाते और बिखर जाते हैं जबकि LP 890-9c पर चुंबकीय क्षेत्र होने की वजह से यहां जलवाष्प को बांध कर रखना संभव है जो मानव जीवन की संभावना पैदा कर सकती है. 

ये भी पढ़ें-Bakrid 2023 Date: भारत में कब मनाई जाएगी बकरीद? क्या है ईद-उल-अजहा का इतिहास? जानें 5 महत्वपूर्ण बातें

वैज्ञानिकों की टीम ने इस एक्सोप्लैनेट के मॉडल विकसित कर रासायनिक संरचना, सतह के तापमान, वायुमंडलीय दबाव, बादल आवरण और बहुत कुछ जैसे कारकों का अध्ययन किया है. इसके पांच अलग अलग मॉडल बनाकर स्टडी की जा रही है. इसमें पृथ्वी जैसे लेकिन गर्म ग्रह से लेकर शुक्र जैसे मॉडल बनाए गए हैं. कल्टेनेगर ने कहा, “यह ग्रह पहला लक्ष्य है जहां हम इन विभिन्न परिदृश्यों का परीक्षण कर सकते हैं. 

वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के जोनाथन गोमेज़ बैरिएंटोस ने बताया कि जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप इस एक्सोप्लैनेट  LP 890-9c का अध्ययन करके इसके वायुमंडलीय संरचना का निरीक्षण करेगा. इससे यह जानकारी मिल सकती है कि क्या ग्रह पर पृथ्वी के समान भापयुक्त, पानी से भरपूर वातावरण है, या क्या यह शुक्र के समान है.

Tags: Nasa, Nasa study, Space news, Venus

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें