
शशिकांत ओझा/पलामू. पलामू जिले में कभी लाह के फसल तैयार होने पर घोड़े से लोग लाह की खरीदी करने आते थे. पलामू जिला में एशिया का सबसे बड़ा लाह बगान पलामू भी है. वहीं पलामू का नाम लेखकों के अनुसार संधि विच्छेद में प से पलाश, ला से लाह और म से महुआ रखा है. लालेश्वर बताते है पलामू के इतिहास में कभी बड़े पैमाने पर लाह की खेती होती थी. जंगल कटने, वक्त बदलने और लोगों के पलायन करने से इसकी खेती सीमित होती गई.
वर्ष 2016 में जोहार परियोजना शुरू हुई. इसमें मुख्यत: पशुपालन जिसमे बकरी पालन और मुर्गी पालन का काम है. बंजर क्षेत्र होने के कारण और पलाश पेड़ की बहुलता से यहां वनोपज पर भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. जिससे वर्ष 2018 में पलामू में जोहर परियोजना शुरू हुआ. इसमें कृषि से जुड़ी कई कार्य जुड़े. वर्ष 2019 में जोहार द्वारा लाह की खेती 100 किसान दीदी से शुरू किया गया. जिन्हे प्रति किसान 3 किलो लाह बीज दिया गया. वर्ष 2020 में पलामू जिले के चैनपुर प्रखड 300 किलो बीज से 3000 किलो लाह का उत्पादन किया गया. वर्ष 2021 में 300 किसान और जोड़ा गया जिसमें किसानों ने 1500 से 2000 किलो लाह का उत्पादन किया. वर्ष 2022 में 200 किसान को और जोड़ा गया. हालांकि सूखा पडऩे से लाह का फसल अच्छा नहीं हो सका. आज कुल 600 किसान करीब 15000 पलाश तथा बेर के पेड़ पर इसका उत्पादन कर रहे हैं.
इस वर्ष 5000 किलो लाह उत्पादन का है लक्ष्य
पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी राजीव कुमार ने न्यूज 18 को बताया कि इसका लाभ दिलाने के लिए हमारे प्रखंड में उत्पादन समिति बनाई जाती है. जिसमे सखी मंडल की 20 से 30 दीदीयां इसकी सदस्य होती है. प्रखड में लाह उत्पादन के लिए चार कलस्टर बनाए गए है. पथरा, बसरियाकला, बुधीबीर, सलातुआ में लाह की खेती की जा रही है. इन कलस्टर में 28 ग्राम के 600 महिला किसान द्वारा लाह उत्पादन किया जाता है. जिसके बाद पिछले वर्ष प्रत्येक महिला को जोहार परियोजना द्वारा तीन तीन किलो लाह बीज के रूप में नवंबर माह में दिया गया. साथ ही लाह अनुसंधान केंद्र से प्रशिक्षण लिया ए वी एम द्वारा सभी महिलाओं को उत्पादन को लेकर प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण लेकर किसान लाह उत्पादन कर लाभ कमा रहे हैं. इस वर्ष जोहार परियोजना में लाह का उत्पादन पांच हजार किलो करने का लक्ष्य रखा गया है. जोहार परियोजना की शुरुआत चैनपुर में वर्ष 2018 में प्रारंभ हुआ.जोहार मुख्यत: पशुपालन तथा वनोपज पर पलामू जिले में कार्य कर रहा है. किन्नी ग्राम के वनोपज मित्र परशुराम सिंह और किन्नी ग्राम की पूजा देवी, मंजू देवी लाह की खेती से अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त करने हेतु प्रतिबद्ध है.
साल में दो बार करते है उत्पादन
किन्नी गांव की निवासी मंजू देवी ने बताया कि मायके में थी तो लाह का उत्पादन होता था. हमे इसकी खेती करने का मन करता था. वर्ष 2018 से मैं सखी मंडल की दीदी के रूप में जुड़ी हूं. पिछले दो वर्ष से लाह का उत्पादन कर रही हूं. मेरे पास 200 से अधिक पलाश और 20 से अधिक बेर के पेड़ है. जिसमे जोहर परियोजना से प्रशिक्षण लेकर लाह की खेती कर रही हूं. नवंबर महीने में जोहर परियोजना की ओर से 3 किलो लाह के बीज मिले थे. वहीं मायके से 15 किलो मंगाकर उत्पादन कर अब तक 75 किलो लाह बेच चुकी हूं. अभी नवंबर महीने में पूर्ण रूप से लाह तैयार होगा. इस वर्ष अच्छा पानी होने की उम्मीद है. हमे उम्मीद है कि इस बार अच्छा उत्पादन होगा. किन्नी गांव निवासी पूजा देवी भी लाह की खेती से लाभ कमा रही है. उन्होंने बताया कि हम लोगों ने समिति बनाया है. इसके लिए 1100 रुपए लिए गए है. उस समिति के सभी सदस्यों को नवंबर में 3 किलो के हिसाब से सबको लाह के बीज दिए गए थे. मैंने अपने 50 पेड़ में प्रारंभिक तौर में लगाया है. अभी तक बाजार में 7 किलो लाह बेच चुकी हूं.अभी भी लाह तैयार हो रहा है. इस बार बारिश अच्छा हुआ तो लाह की फसल बेहतर होगी.
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FIRST PUBLISHED : June 26, 2023, 17:56 IST





