Mata Vaishno Devi: माता वैष्‍णो देवी के भक्‍त ध्‍यान दें, है बड़ी खुशखबरी! अब भवन तक ‘पैदल चलने’ की जरूरत नहीं, खच्‍चर, हेलीकॉप्‍टर, पालकी भूल जाइये

Mata Vaishno Devi Bhawan Gondola Cale Car : हिंदुओं के पवित्र स्थल जम्‍मू स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर (Mata Vaishno Devi Temple) में हर मौसम श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है. गर्मी हो चाहे सर्दी या फ‍िर मॉनसून यानि बरसात का मौसम, यहां भक्‍तों की संख्‍या में कोई कमी नहीं देखी जाती. माता वैष्‍णो देवी कटरा तक जाने के लिए बस, ट्रेन, निजी वाहन व हवाई जहाज और अन्‍य परिवहन साधनों से यहां पहुंचना आसान भी है. हालांकि माता श्रीवैष्णो देवी मंदिर के त्र‍िकुटा पहाड़ पर ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से कई श्रद्धालु विशेषकर बुजुर्ग, बच्‍चे चल फिर पाने में अक्षम होते हैं. ऐसे में उनका मंदिर के दर्शन कर पाना मुश्किल या महंगा हो जाता था. ऐसे में यहां कई सालों से एक रोप-वे (Mata Vaishno Devi Ropeway) निर्माण की मांग उठती रही है. अब जल्‍द ही लाखों श्रद्धालु कटरा से वैष्‍णो देवी भवन तक की यात्रा चंद मिनटों में पूरी कर सकेंगे और इसमें उनके लिए खर्च भी बेहद कम आने वाला है. सरकार 250 करोड़ लागत की इस रोप वे परियोजना की प्रक्रिया अंतत: शुरू कर दी है. हर साल यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, 2022 के आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 91 लाख श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आए थे, इनमें से ज्यादातर जम्मू के करीब स्थित 5200 फीट की ऊंचाई पर मौजूद त्रिकुट पहाड़ पर स्थापित मंदिर तक जाने के लिए 12 किमी लंबे ट्रैक से गए थे. आइये जानते हैं इस बारे में..

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अब तक जो दर्शनार्थी ऊपर भवन तक जाने में अक्षम होते थे वह या तो पिट्ठू या खच्चर पर बैठकर दर्शन करने पहुंचते हैं. यह तरीका थोड़ा मंहगा होता है जिस वजह से हर कोई इसका उपयोग नहीं कर पाता है और मन मसोस कर रह जाता है. इसके अलावा 12 किमी जाने और आने में लगभग 1 दिन पूरा लग जाता है. लेकिन इस रोप वे के लग जाने के बाद यह प्रक्रिया चंद मिनटों में सिमट कर रह जाएगी, इस 2.4 किमी लंबे रोपवे के लिए RITES (Rail India Technical and Economic Service) ने बोली आमंत्रित की है.

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इस रोप वे के बनने के बाद हजारो फीट ऊंचे इस धार्मिक स्थल तक पहुंचने में लगने वाले 5-6 घंटे का वक्त सिमट कर 6 मिनट हो जाएगा. यह परियोजना 3 साल में बन कर पूरी हो जाएगी, और यह कटरा में स्थिति बेस कैंप ताराकोट से शुरू होकर मंदिर के करीब सांझी छत तक जाएगी. इस रोप वे में गोंडोला केबल कार सिस्टम लगाया जाएगा.

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गोंडोला केबल कार जिसे एरियल रोप वे के नाम से भी जाना जाता है, एक तरह का एरियल यानी हवाई केबल कार सिस्टम होता है जिसमें एक केबिन पहाड़ों या खाड़ियों में एक जगह से दूसरी जगह कई तारों के जरिये यात्रा करता है. गोंडाला केबल कार में विशेषतौर पर दोहरी तार व्यवस्था होती है. जिसमें दो केबिन एक ट्रेक पर यात्रा करते हैं, जो एक या कई समान तारों पर स्थित होते हैं. इस तरह दोनों केबिन एक कर्षण यानी ट्रेक्शन तार के ज़रिये मजबूती से जुड़े होते हैं, यह तार पहाड़ पर बनाए गए स्टेशन में लगी पुली के माध्यम से चलते हैं, पुली ही इन्हें आगे और पीछे लाने ले जाने का काम करती है, इस तरह जब एक केबिन ऊपर जाता है तो दूसरा नीचे आता है. दो साल पहले माता वैष्णो देवी मंदिर में त्रिकुट पहाड़ से अन्य पहाड़ पर स्थित भैरों मंदिर के लिए एक रोप वे की शुरूआत की गई थी.

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इस रोपवे के बनने के जहां वक्त बचेगा, वहीं यह हेलीकॉप्टर या दूसरे विकल्पों की तुलना में काफी सस्ता होगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में तारकोट से मंदिर तक जाने के लिए एक अन्य मध्यमार्ग का उद्घाटन किया था, जिसमें चढ़ाई तुलनात्मक रूप से काफी कम है. इसी तरह श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए 2020 में दिल्ली से कटरा तक के लिए वंदे भारत ट्रेन का संचालन भी शुरू किया गया था.

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बोली के लिए मंगाए गए दस्तावेज बताते हैं कि, आज भी कई लोग देवी के दर्शन के लिए 12 किमी पैदल चल कर जाना ही पंसद करते हैं, लेकिन जो इसके अभ्यस्त नहीं है उन्हें ऊपर तक पहुंचने में बहुत तकलीफ होती है. खासकर ऐसे लोग जिनका वजन ज्यादा है या जो चलने में अक्षम है, जिन्हें सांस की तकलीफ है या जो बुजुर्ग है, उनके लिए यह रोपवे काफी सहूलियत प्रदान करेगा. इसके संचालन से 5200 फीट ऊंचाई पर स्थित मंदिर तक जाने का वक्त 5.6 घंटे से घटकर 6 मिनिट रह जाएगा. इसके साथ ही यह रोपवे एक तरफ जहां पर्यावरण की रक्षा करेगा वहीं दूसरी तरफ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी होगा क्योंकि इसमें सवार होकर वह पहाड़ों के मनोरम नजारों को देख पाएंगे. जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.

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इसके अलावा दस्तावेजों में लिखा है कि गर्मी के मौसम में श्रद्धालु दिन के वक्त मंदिर में जाने से बचते हैं, लेकिन रोपवे लगने के बाद पर्यटक आसानी से किसी भी वक्त मंदिर में दर्शन करने जा सकेंगे. इसी तरह खच्चरों से होने वाली गंदगी और प्रदूषण से भी बचाव होगा. और कम वक्त लगने की वजह से भवन में होने वाली भीड़ भी कम होगी जिससे किसी भी तरह की दुर्घटना से भी बचाव हो सकेगा.

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Author: Jagran Times

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