
शशिकांत ओझा/पलामू. पलामू सहित पूरे झारखंड में मानसून प्रवेश कर चुका है, जिला मुख्यालय डाल्टनगंज से गुजरी कोयल नदी में बरसात का पानी आया है. इसे देख लोगों में खुशी का माहौल है. खास कर किसान काफी उत्साहित हैं. बरसात से पहले यह नदी पूरी तरह सूखी हुई थी. बरसात के बाद यहां पानी आया है. पलामू में 19 जून को मानसून ने प्रवेश किया है, लेकिन बारिश लेट से शुरू हुई. अब तक महज 24.5 मिलीमीटर ही वर्षा हुई है. मौसम विभाग के अनुसार, जून में जिले में 150 एमएम बारिश की उम्मीद है, लेकिन यह लक्ष्य से काफी दूर है.
झारखंड के ट्री मैन कहे जाने वाले पर्यावरणविद कौशल किशोर जयसवाल ने कहा कि नदी में पानी आना काफी सुखद है. इसका सबसे ज्यादा फायदा वन्य जीवों को होगा. उन्हें पानी के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा. वे पानी की तलाश में आबादी वाले इलाके में आ जाते थे. इससे लोग व वन्य जीव दोनों को खतरा रहता है. पलामू का तापमान 45 के पार रहा है. यहां प्रत्येक साल अत्यधिक गर्मी पड़ती है. इसका कारण है पलामू का कर्क रेखा के नीचे होना. इसलिए यहां अधिकर गर्मी पड़ती है. ऐसे में यहां बारिश की भी अधिक जरूरत होती है.
वृक्ष की खेती से होगा फायदा
कौशल ने बताया कि पलामू में वृक्ष लगाए जाएं तो जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से लोगो को बचाया जा सकता है. जब हम छोटे थे. तब पलामू में चारों ओर वर्षा जल पर्याप्त मात्रा में दिखता था. साल भर झरना, नदी और तालाबों में पानी रहता था, लेकिन जनसंख्या विस्फोट और प्रदूषण बढ़ने से जलवायु परिवर्तन हुआ. जिसके बाद से पलामू में नदियां सूखने लगी. आज ये स्थित आई है कि बरसात के दिनों में ही नदियों और तालाब में रौनक देखने को मिलती है. गर्मी आने से पहले ही नदियां सूख जाती हैं. इससे बचने के लिए किसान ही मददगार साबित हो सकते हैं. किसान अगर वृक्ष की खेती करें तो प्रदूषण पर कंट्रोल से जलवायु परिवर्तन को रोका जा सकता है. नदिया फिर से जीवित हो उठेंगी.
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FIRST PUBLISHED : June 26, 2023, 10:49 IST





