4 साल बाद सहरसा के इस मंदिर का खुला दानपात्र, रुपयों की सजने लगी गड्डी, जानें कितने नोट हो गए खराब

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मो. सरफराज आलम/सहरसा. जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर महिषी प्रखंड अंतर्गत महपुरा गांव में स्थित संत बाबा कारू खिरहरी मंदिर का चार साल के बाद दानपेटी खोला गया. नोटों की गिनती चालू है. हालांकि लंबा समय बीत जाने, दानपेटी में दूध-पानी डाल देने और एक बार जलती अगरबत्ती के कारण दानपेटी में आग लग जाने से काफी सारे नोट खराब हो गए. महंत की माने तो मोटर चलाकर दानपेटी की आग को उस वक्त बुझाया गया था. उम्मीद है कि दानपेटी से 50 लाख तक सुरक्षित नोट हो जाएंगे. फिलहाल यह गिनती 15 दिनों तक चलेगी.

मंदिर के विकास कार्य में खर्च होता है दान का रुपया
बताया जाता है कि मंदिर और मंदिर की परिसंपति के रखरखाव को लेकर न्यास बोर्ड गठित है. इसके अध्यक्ष प्रसाशनिक अधिकारी एसडीओ हैं. लेकिन कतिपय विवादों के कारण विगत चार वर्षों से इस ओर ध्यान नहीं दिया गया. इस कारण मंदिर के महंत, श्रद्धालु सहित स्थानीय लोग आहत हैं.

मंदिर परिसर में कुल 8 दानपेटी है, जिसमें से 6 पेटी नोटों से भरा है. अभी एक दानपेटी को खोला गया है, जिसकी गिनती दो दिनों से जारी है. गिनती के बाद यह सभी रुपया बैंक में जमा कर दिया जाएगा और जरूरत के अनुसार मंदिर के विकास कार्य में खर्च किया जाएगा.

SDO होते हैं न्यास बोर्ड के अध्यक्ष
सीओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि 4 साल से दानपेटी नहीं खुला था. लेकिन अब दानपेटी खोल दिया गया है और रुपयों की गिनती की जा रही है. वहीं,मंदिर के महंत बाबा उपेंद्र खिरहरी का कहना है कि वर्ष 2018 और 2019 के बाद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. इसके लिए न्यास बोर्ड भी गठित है, फिर भी ठीक से रख-रखाव नहीं हो रहा है. श्रद्धालुओं के द्वारा दान पेटी में दूध और पानी चढ़ाने के कारण काफी नोट सड़-गल गए हैं. गिनती के बाद ही आंकड़ा सामने आ पाएगा.

मंदिर में प्रवेश से पहले करते हैं कोसी स्नान
लोकसंत बाबा कारू खिरहरी का यह मंदिर कोसी के पूर्वी तट पर बसा है. इस मंदिर की प्रसिद्धि मिथिलांचल के साथ-साथ सीमा पार नेपाल तक है. बड़ी संख्या में दोनों देश के श्रद्धालु यहां पूजा करने आते हैं और बाबा कारू सेअपनी मुराद मांगते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां उनकी हर मन्नत पूरी होती है. मंदिर में प्रवेश से पहले लोग कोसी नदी में स्नान करते हैं. यह मंदिर पशु देवता के रूप में भी विख्यात है.

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Author: Up Head Line

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