Know the ICC Rules: दिग्‍गजों ने किया ‘गलत इस्तेमाल’, तो खत्‍म करना पड़ा रनर का नियम

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Cricket Rules: क्रिकेट के खेल में बाउंड्री से जरिये ताबड़तोड़ रन बटोरने से कहीं अधिक महत्‍व दौड़कर रन बनाने का है.हवा में शॉट न खेलते हुए बॉल को खाली स्‍थान या मैदान में कहीं दूर प्‍लेस करके ऐसे रन बनाए जाते हैं. ऐसे शॉट्स पर आउट होने का जोखिम तो कम होता ही है, एक या तीन रन दौड़कर बल्‍लेबाज स्‍ट्राइक भी रोटेट कर पाता है.यदि ऐसा न हो तो स्‍ट्राइक रोटेट करने के लिए उसे ओवर खत्‍म होने तक का इंतजार करना पड़े. कई बार क्रीज पर मौजूदा दो बैटर्स में से कोई एक,चोट लगने या मांसपेशियों में खिंचाव के कारण रन दौड़ने में असमर्थ हो जाता है, इस स्थिति को ध्‍यान में रखकर ‘रनर’ का नियम लागू किया गया था.

बता दें, जब 1744 में क्रिकेट के नियम बने तो रनर का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन बाद में इसे लागू किया गया. Laws of Cricket के रूल 25 में इसका विस्‍तार से जिक्र किया गया था. इसके अनुसार,जो बल्‍लेबाज घायल हुआ है, रनर उसी की टीम का सदस्‍य होना चाहिए.जब रनर का इस्‍तेमाल किया जाता था तो चोटिल बैटर क्रीज पर रहकर अपने शॉट खेलता था लेकिन रन नही दौड़ता था. रनर उसके लिए यह काम करता था.

अंपायर की सहमति होती थी जरूरी
जब घायल खिलाड़ी बैटिंग कर रहा होता है तो रनर ,आमतौर पर खेल के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पिच के समानांतर, किसी दूर के स्‍थान पर खड़ा होता है और नॉन स्‍टाइकर के साथ तालमेल बैठाकर रन दौड़ता था.जब चोटिल बैटर स्‍ट्राइक से हट जाता था तो वह स्‍क्‍वॉयर लेग अंपायर के पास खड़ा हो जाता था और रनर, नॉन स्‍ट्राइकर वाली जगह पर जाकर खड़ा होता था. रनर का उपयोग ऐसी ही स्थिति में किया जा सकता था जब ग्राउंड अंपायर इस बात से संतुष्‍ट हो कि बैटर की चोट ऐसी है जो उसकी दौड़ने की क्षमता को प्रभावित कर रही है.

2011 में किया गया ‘रनर’ का रूल खत्‍म
एक बात और, रनर टीम के प्‍लेइंग XI का सदस्‍य ही होना जरूरी था,12वां खिलाड़ी रनर नहीं बन सकता था. रनर को चोटिल बैटर के बराबर भी सुरक्षात्‍मक उपकरण(हेलमेट,पैड्स, ग्‍लब्‍ज आदि) पहनना और बैट लेना जरूरी था. बहरहाल क्रिकेट की शीर्ष संस्‍था ICC ने लंबे विचार-विमर्श के बाद 2011 में रनर के रूल को खत्‍म कर दिया. अब यदि कोई बैटर, चोटिल होने के कारण दौड़ नहीं पा रहा तो उसे रिटायर्ट हर्ट होना पड़ेगा.

लगे थे ‘रनर रूल’ के दुरुपयोग के आरोप
ICC की ओर से कहा गया था कि प्‍लेयर्स की फिटनेस में सुधार और स्किल डेवलपमेंट के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है.हालांकि एक तथ्‍य यह भी है कि बैटर्स इस नियम का दुरुपयोग करने लगे थे.कुछ ऐसे भी बल्‍लेबाज थे जिन पर चोट का बहाना करके रनर लेने का बहाना लगता था, इसमें पाकिस्‍तान के सईद अनवर (Saeed Anwar)और भारत के नवजोत सिद्धू (Navjot Singh Sidhu)का नाम प्रमुख है. टीम इंडिया के पूर्व कप्‍तान मोहम्‍मद अजहरुद्दीन ने एक बार मजाकिया लहजे में बताया था कि सिद्धू जैसे ही 90 रन पर पहुंचते थे, तुरंत अपना पैर पकड़ लेते थे, ऐसे में उनके लिए रनर को रेडी कर दिया जाता था.कार्यक्रम में मौजूद पाकिस्‍तान के वसीम अकरम ने भी कहा था, ‘क्रिकेट में रैफरी सईद अनवर की वजह से ही आए. वह हर 100 के बाद पैर पकड़कर बैठ जाता था. हर रैफरी पहले ही कप्‍तान से कह देते था कि सईद अनवर को रनर नहीं मिलेगा.’

Tags: Cricket, ICC

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें