
सौरव पाल/मथुरा. हिंदू धर्म की प्राचीन संस्कृति संस्कारों पर आधारित है. ऐसे ही व्यक्ति के जीवन में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं, जो उसके गर्भाशय समय से लेकर वृद्धावस्था तक होते हैं. जिसमे जनेऊ संस्कार भी शामिल है जो की बेहद पवित्र संस्कार भी माना जाता है. इसी संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ते हुए वृंदावन के श्रीमद् भागवत मंदिरम में सैकड़ों हिंदू बालकों का जनेऊ संस्कार कराया गया. जिसमे उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी भी शामिल हुए.
श्रीमद् भागवत मंदिरम के संस्थापक आचार्य बद्रीश जी ने बताया कि जनेऊ संस्कार को यज्ञोपवीत संस्कार और उपनयन संस्कार भी कहा जाता है. यह हिंदू धर्म के मुख्य 16 संस्कारों में से एक है. जिसके बाद बालक को वेद पढ़ने का अधिकार प्राप्त हो जाता है. श्रीमद् भागवत मंदिरम में पिछले 9 वर्षों से यहां हिंदू बच्चों का निशुल्क जनेऊ संस्कार कराया जा रहा है. जिसमे अब तक लग भाग 1000 से ज्यादा बच्चों का निशुल्क संस्कार कराया जा चुका है और इस वर्ष करीब 101 हिंदू बच्चों का संस्कार कराया गया.
कब कराया जाता है जनेऊ संस्कार
आचार्य बद्रीश जी ने आगे बताया कि वैसे तो जनेऊ संस्कार कभी भी करवाया जा सकता है. लेकिन शास्त्र के अनुसार ब्राह्मण कुल के बालक को 7 वर्ष, क्षत्रिय को 16 वर्ष और वैश्य कुल के बच्चों को 12 से 14 वर्ष की उम्र में संस्कार करा लेना चाहिए. विवाहित व्यक्ति भी यह संस्कार कुछ पश्चायताप के बाद जनेऊ धारण कर सकते है.
आप भी करा सकते है नि:शुल्क उपनयन संस्कार
यदि आप भी वृंदावन जैसी पवित्र जगह पर अपने परिवार के किसी सदस्य का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार करना चाहते है तो श्रीमद् भागवत मंदिर में संपर्क कर सकते है जिसके लिए आप 9412280000 पर कॉल करना होगा
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FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 16:44 IST








